कोशी बाढ़ व कटाव पीड़ितों का धरना, मांगें नहीं मानीं तो सितंबर में अनिश्चितकालीन सत्याग्रह

बेलागोठ, बगहा, खोखनहा, पंचगछिया, सियानी, ढोली के कटाव पीड़ितों को पुनर्वास/सरकारी जमीन में जिला प्रशासन बसाए

सुपौल (बिहार) : कोशी नदी के बाढ़-कटाव पीड़ितों के 10 सूत्रीय मांगों को लेकर कोशी नव निर्माण मंच ने सुपौल जिला पदाधिकारी के कार्यालय के समक्ष 20 अगस्त 2026 को धरना दिया। धरना की कुछ मांगों पर डीएम ने प्रदर्शनकारियों व पीड़ितों को कार्रवाई करने का भरोसा दिलाया है।

धरना कार्यक्रम को संबंधित करते हुए कोशी कटाव पीड़ित राजेश मंडल, अखिलेश, मो रऊफ, सुलेखा देवी, रेखा देवी, इशरत परवीन, बेबी समसुन, इत्यादि ने कटाव की अपनी पीड़ा को बताया। पीड़ितों ने बताया कि कोशी में जीवन नर्क के समान हो गया है। घर का सारा समान नदी में बह गया। समान निकालने के लिए नावें नहीं थीं, बचा-खुचा समान तटबंध के भीतर ही हमलोग कहीं रखकर गुजर कर रहे हैं।

पीड़ितों ने कहा कि फिर से मानसून में वहां पानी आएगा तो हमलोग फिर से न कट जाएं यह संकट व चिंता कायम है। हमलोगों को पुनर्वास नहीं हुआ है, हमें सरकार बाहर कही बसाये। उसी प्रकार मो सदरूल, गौकरण सुतिहार, प्रीतम मुखिया, प्रिय कुमार, राजेंद्र यादव, रामचंद्र शर्मा, इमामुल, रामचंद्र यादव, उमेश पासवान, नीतीश, परमिला देवी, बादामी देवी, संतोष मुखिया, संजय यादव, रामबिलास चौधरी, नुरूल होदा, मो अब्बास, रामानंद राय, अरविंद मेहता, छुटहरू, शिवशंकर मंडल, इत्यादि लोगों ने बाढ़ व कटाव की अपनी पीड़ा सुनाई।

धरना-प्रदर्शन के दौरान जिला अध्यक्ष आलोक राय ने संगठन का 10 सूत्रीय मांग पत्र लोगों को पढ़कर सुनाया और सभी की सहमति ली सभी के हस्ताक्षर से मांग पत्र तैयार हुआ। घोघररिया की मुखिया एकता यादव, माले नेता डा अमित ने कोशी पीड़ितों की मांगों का समर्थन किया। 10 सूत्री मांगपत्र को डीएम को सौंपा गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महेंद्र यादव ने की और संचालन इंद्र नारायण सिंह ने किया। धर्मेन्द्र, मनीष, प्रमोद राम, भीम सदा, जितेन्द्र, बबीता, अर्चना सिंह ने कार्यक्रम की व्यवस्था में भूमिका निभाई।

धरना से जुड़ी मांगें

बेला गोठ, बगहा, पंचगछिया, खोखनहा, ढ़ोली, सियानी, पिपराही सहित अन्य सभी गाँवो एवं कटाव पीड़ित परिवारों को जिनके पास बसने या पुनर्वास या बाहर जमीन नहीं है, उन्हें तत्काल सरकारी जमीन-पुनर्वास में बसाया जाए। उनको गृह क्षति का लाभ भी तत्काल दिलाया जाए, पिछले वर्ष की बाढ़ कटाव पीड़ित, लालगंज, सोनवर्षा, बेला गोठ, पंचगछिया, खोखनहा सहित सभी जगह के कटाव पीड़ितों को गृहक्षति का भुगतान हो।

आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा बनाई गयी बाढ़ पीड़ितों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया(एसओपी) और तय मानदर के मुताबिक कोशी तटबंध के भीतर आये पानी को बाढ़ मानते हुए कार्य किये जाएं। तटबंध के भीतर सर्वे कराकर सभी को पुनर्वासित कराया जाए, अनुबंध पर रखीं गयी नावों की सूची सार्वजनिक किया जाए। अभी भी पहले के कटाव पीड़ित जहाँ बसे हैं, वहां रोशनी की व्यवस्था हो, जिन बसावटों में सरकारी स्कूल, आंगनबाड़ी नहीं हैं, वहां स्कूल-अंगबाड़ी खोला जाएं। निःशुल्क कोशी छात्रावासों की स्थापना करायी जाए, तटबंध के भीतर उप स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना हो और उनका संचालन हो। महिलाओं और बच्चों के लिए नियमित टीकाकरण हो। बाढ़ के समय नौका से मेडिकल टीमें भेजीं जाए। कोशी पीड़ित विकास प्राधिकार को पुनः सक्रिय और प्रभावी बनाया जाए। माफ़ लगान की वसूली पर रोक लगे और भू-सर्वे की प्रक्रिया सरल हो, कोशी तटबंध और स्परों पर बसे लोगों को उजाड़ने के पहले पुनर्वासित किया जाए। पुनर्वास में बसे कोशी के लोगों के होल्डिंग टैक्स से मुक्त किया जाए, कोशी समस्या का वास्तिवक समाधान करते हुए कोशी की सभी छाडन धाराओं को पुनर्जीवित कराने की पहल हो।

जिलाधिकारी से मिला आश्वासन


डीएम ने मांग पत्र पढ़ते हुए कटाव पीड़ितों को गृह क्षति देने का आश्वासन दिया वहीं पुनर्वास पर अन्य मुद्दों पर भी विचार करने का उन्होंने पीड़ितों को भरोसा दिलाया।

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