बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की बाघिन को बंगाल किया गया स्थानांतरित

भारतीय वायु सेना के विशेष विमान से गोरखपुर से बक्सा टाइगर रिजर्व पहुंची वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की बाघिन

पटना/वाल्मीकिनगर : बिहार के पश्चिम चंपारण जिले में स्थित वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की एक बाघिन को भारतीय वायु सेना के विशेष विमान से गोरखपुर हवाई अड्डे से पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व पहुंचाया गया है। संरक्षण के उद्देश्य से बिहार से किसी बाघ को पहली बार किसी अन्य राज्य के टाइगर रिजर्व में स्थानांतरित किया गया है।

बिहार सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, बाघिन को 29 सितंबर 2026 की शाम करीब पांच बजे वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में सफलतापूर्वक बेहोश कर रेडियो-कॉलर लगाया गया। आवश्यक पशु चिकित्सा एवं वन्यजीव प्रबंधन प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद उसे सुरक्षित रूप से गोरखपुर हवाई अड्डे तक पहुंचाया गया, जहां से भारतीय वायु सेना के विशेष विमान द्वारा बक्सा टाइगर रिजर्व ले जाया गया।

बाघिन को 30 सितंबर की सुबह लगभग आठ बजे बक्सा टाइगर रिजर्व के निर्धारित सॉफ्ट-रिलीज एनक्लोजर में सुरक्षित पहुंचा दिया गया। इस प्रकार बाघिन को बेहोश किए जाने से लेकर उसके नए संरक्षण क्षेत्र में सुरक्षित पहुंचाने तक की पूरी प्रक्रिया लगभग 15 घंटे में सफलतापूर्वक पूरी हुई।

बक्सा टाइगर रिजर्व में बाघिन को फिलहाल विशेष रूप से तैयार किए गए एनक्लोजर में रखा गया है। वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञ उसके स्वास्थ्य, व्यवहार एवं नए वातावरण के अनुकूलन की लगातार निगरानी कर रहे हैं। दो अक्टूबर को उसे एनक्लोजर से बड़े वन क्षेत्र में छोड़े जाने की योजना है।

इस ऐतिहासिक अभियान को बिहार एवं पश्चिम बंगाल वन विभाग, भारतीय वन्यजीव संस्थान और भारतीय वायु सेना के समन्वित प्रयासों से पूरा किया गया। अभियान में वन्यजीव विशेषज्ञों, पशु चिकित्सकों, वन अधिकारियों तथा दोनों राज्यों के मैदानी वनकर्मियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बाघिन के सुरक्षित पकड़ने, रेडियो-कॉलर लगाने, सड़क मार्ग से गोरखपुर तक पहुंचाने, विशेष विमान से परिवहन तथा बक्सा टाइगर रिजर्व में सुरक्षित स्थानांतरण की पूरी प्रक्रिया निर्धारित वन्यजीव प्रबंधन एवं पशु चिकित्सा प्रोटोकॉल के अनुरूप की गई।

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से बक्सा टाइगर रिजर्व तक बाघिन का यह स्थानांतरण बिहार की संरक्षण यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व देश के महत्वपूर्ण तराई वन परिदृश्य का हिस्सा है और बिहार में बाघ संरक्षण का प्रमुख केंद्र है। बिहार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने इसे इस ऐतिहासिक पहल बताते हुए कहा है कि पहली बार अपने यहां के बाघ को दूसरे राज्य के संरक्षण कार्यक्रम के लिए उपलब्ध कराकर राष्ट्रीय स्तर पर बाघ संरक्षण में अपनी सक्रिय भूमिका को और मजबूत किया है।

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