नदियों के प्रदूषण से प्रभावित हो रही है डॉल्फिन की संख्या, जन जागरूकता जरूरी: डॉ गोपाल शर्मा

राष्ट्रीय डॉलफिन दिवस पर पटना विश्वविद्यालय में संगोष्ठी का आयोजन

पटना: पटना विश्वविद्यालय के प्राणीशास्त्र विभाग में पांच अक्टूबर को राष्ट्रीय डॉल्फिन दिवस के अवसर पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम व व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए डॉ गोपाल शर्मा, पूर्व वैज्ञानिक एवं संयुक्त निदेशक, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार ने गांगेय डॉल्फिन की वर्तमान स्थिति, उसके अस्तित्व पर मंडराते खतरों और उसके संरक्षण उपायों पर प्रकाश डाला।

डॉ शर्मा ने बताया कि नदियों के बढते प्रदूषण, अवैध शिकार और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र में असंतुलन के कारण डॉल्फिन की संख्या प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि इसके निवारण के लिए सामूहिक प्रयास, नदियों की स्वच्छता और आमलोगों में जागरूकता आवश्यक है।

कार्यक्रम के दौरान पोस्टर एवं स्लोगन के माध्यम से विद्यार्थियों के द्वारा संदेश दिया गया कि गंगा की शान, नदियों की पहचान, गांगेय डॉल्फिन केा संरक्षण, हमारा स्वाभिमान। साथ ही स्वच्छ नदियां, सुरक्षित डॉल्फिन, समृद्ध भारत का संकल्प भी दोहराया गया।

व्याख्यान व कार्यक्रम की अध्यक्षता पटना विश्वविद्यालय के प्राणीशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो परिमल कुमार खान ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि गांगेय डॉल्फिन हमारी नदियों के स्वास्थ्य का प्रतीक है और इसके संरक्षण के लिए शैक्षणिक संस्थानों व युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है।

इस मौके पर विभाग की प्रो अनुपमा कुमारी, प्रो जीबी चांद, प्रो गजेंद्र कुमार, प्रो मयंक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ जीबी चांद ने किया।

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