जीरो कार्बन एनालिटिक्स की नई रिपोर्ट के मुताबिक, मौसम में हो रहे ये बदलाव स्थानीय स्तर पर होने वाली अस्थायी खाद्य कमी को लंबे समय तक बनी रहने वाली कीमतों की समस्या में बदल रहे हैं।
जलवायु में बदलाव के साथ बढ़ रही चरम मौसम की घटनाएं अब सिर्फ फसलों और खाद्य उत्पादन को नुकसान नहीं पहुंचा रहीं। इनका असर खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है। सूखा, रिकॉर्ड गर्मी और बहुत ज्यादा बारिश की घटनाओं ने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में कॉफी, मांस, सब्जियों, आलू और समुद्री शैवाल जैसी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेज बढ़ोतरी की है।
जीरो कार्बन एनालिटिक्स की नई रिपोर्ट के मुताबिक, मौसम में हो रहे ये बदलाव स्थानीय स्तर पर होने वाली अस्थायी खाद्य कमी को लंबे समय तक बनी रहने वाली कीमतों की समस्या में बदल रहे हैं। संस्था ने इसके साथ एक इंटरैक्टिव वैश्विक मानचित्र भी जारी किया है, जिसमें 2022 के बाद मौसम से जुड़ी खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी के 28 मामले दर्ज किए गए हैं।
इस मानचित्र में 16 मामले उस अकादमिक अध्ययन से लिए गए हैं, जिस पर इसकी पद्धति आधारित है। इसके अलावा 2024 के बाद खाद्य आपूर्ति को प्रभावित करने वाले 12 नए मामलों को भी इसमें शामिल किया गया है। मानचित्र में यह देखा गया है कि संबंधित अवधि में मौसम सामान्य से कितना अलग था और उसके बाद खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वास्तव में कितनी बढ़ोतरी हुई।
रिपोर्ट की मुख्य लेखिका जोआन बेंटली-मैकक्यून के मुताबिक, जलवायु से जुड़ी महंगाई का असर सिर्फ कुछ समय के लिए बाजार में कीमत बढ़ने तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता और चरम मौसम से होने वाला नुकसान रोजमर्रा की लागत पर लंबे समय तक दबाव बनाए रख सकता है।
रिपोर्ट में दिए गए नए मामलों से इस असर को समझा जा सकता है
ब्रिटेन में मई 2023 से अप्रैल 2024 के बीच 12 महीनों की अवधि रिकॉर्ड पर सबसे ज्यादा बारिश वाली रही। खेतों में पानी भरने से पशुपालन प्रभावित हुआ और 2024 में भेड़ के मांस की सालाना कीमत 19.9% बढ़ गई।
ब्राजील में 2024 के दौरान मई से सितंबर तक अरबिका कॉफी उगाने वाले क्षेत्र में रिकॉर्ड सूखा पड़ा। इससे कॉफी के फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित हुई और पैदावार घट गई। नवंबर 2025 तक अरबिका कॉफी की कीमत पिछले साल की तुलना में करीब 35% बढ़ गई।
अमेरिका में सितंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच ग्रेट प्लेन्स क्षेत्र में 26 साल में एक बार आने वाली गंभीर सूखे की स्थिति रही। इसके बाद मार्च 2026 में माउंटेन वेस्ट क्षेत्र में अभूतपूर्व गर्मी की स्थिति बनी, जिससे बर्फ का भंडार कुछ ही दिनों में तेजी से पिघला। रिपोर्ट के अनुसार, इन घटनाओं ने अप्रैल 2026 तक अमेरिका में बीफ की कीमतों में 14.4% की बढ़ोतरी में योगदान दिया।
ब्रिटेन में 2025 की वसंत और गर्मी रिकॉर्ड पर सबसे गर्म रही। लंबे समय तक चली गर्मी ने चरागाहों की वृद्धि को प्रभावित किया और पशुपालकों को अतिरिक्त चारा खरीदना पड़ा। इसका असर बीफ की कीमतों पर पड़ा, जो पिछले साल की तुलना में 12.8% बढ़ गईं।
स्पेन के अल्मेरिया क्षेत्र में जनवरी और फरवरी 2026 में हुई बहुत ज्यादा बारिश ने टमाटर की फसल को नुकसान पहुंचाया। इन दो महीनों की बारिश 80 साल के रिकॉर्ड में इस अवधि के लिए सबसे ज्यादा थी। इसके बाद स्पेन की सर्दियों की नीलामी में टमाटर की कीमत औसतन 11% बढ़ गई।
अमेरिका के फ्लोरिडा में 2026 की शुरुआत में आए विंटर स्टॉर्म जियाना के दौरान 30 वर्षों में सबसे ठंडा दिन दर्ज हुआ। इससे राज्य के मुख्य टमाटर उत्पादक क्षेत्र की करीब 80% फसल को नुकसान हुआ और जनवरी से अप्रैल के बीच अमेरिका में टमाटर की कीमत 40% बढ़ गई।
जापान में अक्टूबर 2025 में समुद्र की सतह का तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। एरियाके सागर में यह 81 वर्षों में सबसे गर्म अक्टूबर था। इससे समुद्री शैवाल की खेती में देरी हुई और उत्पादन की अवधि कम हो गई। मार्च 2026 तक भुने हुए नोरी और उससे बने उत्पादों की कीमत करीब 20% बढ़ गई।
जमैका में अक्टूबर 2025 में हुई असामान्य बारिश को तूफान मेलिसा से जोड़ा गया। इसके बाद जमैका के कोरोनेशन मार्केट में स्कॉच बोनट मिर्च की स्थानीय कीमत एक ही सप्ताह में 10 गुना तक बढ़ गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे वैश्विक हॉट सॉस की आपूर्ति को लेकर भी चिंता पैदा हुई।
मेक्सिको में 80 साल के ईआरए5 रिकॉर्ड के अनुसार दिसंबर सबसे गर्म रहा। इससे सोनोरा की मेयो और याकी घाटियों में आलू की खेती के लिए जरूरी ठंडे घंटों की कमी हुई। पैदावार 40 टन प्रति हेक्टेयर से घटकर 25 टन प्रति हेक्टेयर रह गई और मई 2026 तक मेक्सिको में आलू की कीमत पिछले साल की तुलना में 57.3% बढ़ गई।
सर्बिया में जून 2025 अब तक का सबसे गर्म जून रहा। इससे रास्पबेरी का उत्पादन प्रभावित हुआ और सितंबर 2025 तक जमी हुई पूरी रास्पबेरी की निर्यात कीमत 51% बढ़ गई। फ्रांस में रिकॉर्ड गर्म जून ने मक्के की फसल को उसके महत्वपूर्ण विकास चरण में नुकसान पहुंचाया और 2026 में फ्रांसीसी मक्के की निर्यात कीमत करीब 16% बढ़ी।
फ्रांस के नोवेल-अकितेन क्षेत्र में जून 2026 की रिकॉर्ड गर्मी का असर सब्जियों पर भी पड़ा। जुलाई 2026 में तोरई की उपभोक्ता कीमत पिछले साल की तुलना में 32%, टमाटर की 31% और हरी फलियों की कीमत 24% बढ़ी।
रिपोर्ट के मुताबिक, इन मामलों को अलग-अलग घटनाओं के रूप में देखने के बजाय एक बड़े बदलाव के हिस्से के तौर पर देखना होगा। कई तरह के जलवायु झटके एक साथ बढ़ रहे हैं और इनका असर खास तौर पर जल्दी खराब होने वाले और पोषक खाद्य पदार्थों पर पड़ रहा है। इससे दुनिया के प्रमुख खाद्य उत्पादन क्षेत्रों में एक साथ फसल खराब होने का जोखिम भी बढ़ रहा है।
रिपोर्ट यह भी कहती है कि एक गंभीर ‘सुपर’ अल नीनो की स्थिति व्यापक आर्थिक और भू-राजनीतिक दबावों के साथ मिलकर खाद्य आपूर्ति श्रृंखलाओं में मौजूद सुरक्षा-परतों को कमजोर कर रही है। संस्था के मुताबिक, मौजूदा वैश्विक खाद्य व्यवस्था के पास मौसम और दूसरी आर्थिक घटनाओं से होने वाले झटकों को संभालने के लिए बहुत कम गुंजाइश बची है।
अकादमिक अध्ययन के मुख्य लेखक मैक्स कोट्ज़ के मुताबिक, कीमतों में अचानक होने वाली ऐसी बढ़ोतरी का असर सिर्फ बाजार तक सीमित नहीं रहता। इससे लोगों की जीवन-यापन की लागत बढ़ती है, स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है क्योंकि लोग कम पौष्टिक विकल्पों की ओर जा सकते हैं। इसका असर महंगाई और ब्याज दरों पर भी पड़ सकता है।
जीरो कार्बन एनालिटिक्स का कहना है कि चरम मौसम और खाद्य कीमतों के बीच यह संबंध दिखाता है कि जलवायु में हो रहे बदलाव का असर खेत से लेकर बाजार और आखिरकार उपभोक्ता की थाली तक पहुंच रहा है। चरम मौसम की घटनाओं से होने वाला नुकसान अब केवल उत्पादन का सवाल नहीं रह गया है। यह भोजन की कीमत और उसकी उपलब्धता से भी जुड़ता जा रहा है।