दुमका: झारखंड राज्य में केजी से पीजी तक सभी शिक्षण संस्थानों में संताल आदिवासी की ओलचिकी…
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संताल आदिवासियों का बाहा पर्व, जिसमें सादा पानी डाल मनाते हैं उत्सव
दुमका: आदिवासी समुदायं के पर्व, परंपराएं और मान्यताएं उन्हें सीधे प्रकृति से जोड़ती हैं। ऐसा ही…
राजकीय जनजातीय हिजला मेला और दिसोम मरांग बुरु का ऐतिहासिक संदर्भ और महत्व
सच्चिदानंद सोरेनसमाज सेवक झारखंड की उपराजधानी दुमका से सटे हिजला पहाड़ी की तलहटी में स्थित है…
आंदोलन का असरः हिजला मेले में हिंदी के साथ ओलिचिकी में लगाया गया डिस्प्ले
दुमका : हिजला गांव के ग्रामीणों और विभिन्न आदिवासी संगठनों की लगातार मांग करने और आंदोलन…
हिजला मेले में ओलिचिकी लिपि में तोरण द्वार व बैनर नहीं लगाए जाने से ग्रामीण व आदिवासी संगठन नाराज, तुरंत सुधार की मांग
दुमका : 135 वर्ष पुराना ऐतिहासिक राजकीय जनजातीय हिजला मेला महोत्सव दुमका प्रखंड के हिजला गांव…
कॉमन्स के लिए आदिवासियों के संघर्ष से जुड़ा है हिजला के सांस्कृतिक आयोजन का इतिहास
इन दिनों पर्यावरण के क्षेत्र में कॉमन्स शब्द की चर्चा प्रमुखता से हो रही है। हालांकि…
संताल आदिवासियों की धार्मिक पुस्तक जोमसिम विनती का डॉ धुनी सोरेन ने किया विमोचन
पुस्तक के लेखक संताल धर्म गुरु व टैगोर साहित्य पुरस्कार से सम्मानित सोमय किस्कू हैं, जिन्होेंने…
हिजला मेले में ओलिचिकी लिपि में तोरण द्वार व बैनर लगवाने की हेमंत सरकार से आदिवासी समाज ने की मांग
दुमका: दुमका में आयोजित होने वाले राजकीय जनजातीय हिजला मेला महोत्सव की शुरुआत तीन फरवरी 1890…
संताली भाषा व ओलचिकि लिपि में पढाने की मांग किस आधार पर कर रहे हैं झारखंड के संताल आदिवासी?
मुख्यमंत्री को मांग सौंप कर अमल करने की विभिन्न संगठनों ने किया है आग्रहदुमका : झारखंड…
संताल आदिवासियों की माघ बोंगा का सामाजिक जीवन में क्या है महत्व, जानिए
दुमका के मसलिया गांव में संताल आदिवासियों का माघ बोंगा (माघ पूजा) संपन्न दुमका : झारखंड…