प्रवासी जीवों के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय संधि में सूचीबद्ध 1100 से अधिक प्रवासी जीवों में मीठे पानी की प्रवासी मछलियों की मात्र 23 प्रजातियां सूचीबद्ध हैं।
नए अध्ययन में प्रवासी मछलियों के संरक्षण से जुड़ी चुनौतियों को चिह्नित करने के साथ कुछ उपाय भी सुझाए गए हैं।
क्लाइमेट ईस्ट
मीठे पानी की प्रवासी मछलियों की केवल 23 प्रजातियों को अंतरराष्ट्रीय संधि के तहत संरक्षण प्रयासों के लिए सूचीबद्ध किया गया है। आइयूसीएन रेड लिस्ट के अनुसार, मीठे पानी की ज्ञात प्रवासी मछली प्रजातियों में एक चौथाई संकटग्रस्त श्रेणी में हैं। इन सूचीबद्ध 23 प्रजातियों में भी 19 एसिपेंसरिफोर्मेस (स्टर्जन और पैडलफिश) हैं। यह खुलासा नेचर रिव्यू बायोडायवर्सिर्टी में प्रकाशित एक नए शोध आलेख में हुआ है। इस लेख में प्रवासी जीवों की अंतरराष्ट्रीय संधि में संरक्षण प्रयासों के लिए दर्ज 1100 से अधिक प्रवासी जीवों में मछलियों के कम प्रतिनिधित्व पर सवाल उठाया गया है।
इस आलेख को चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज (Chinese Academy of Sciences), लाइबनिज इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेशवाटर इकोलॉजी एंड इनलैंड फिशरीज Leibniz Institute of Freshwater Ecology and Inland Fisheries (IGB) और यूनिवर्सिटी ऑफ नेवादा, रेनो (University of Nevada, Reno) के शोधकर्ताओं ने तैयार किया है। इस लेख में मीठे पानी के प्रवासी मछलियों के संरक्षण के लिए वन्य जीवों की प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण के लिए किए गए 133 पार्टियों की अंतरराष्ट्रीय संधि (सीएमएस-Convention on the Conservation of Migratory Species of Wild Animals) की क्षमता को नाकाफी माना गया है। इन 133 पार्टी में दुनिया के 132 देश और यूरोपीय संघ शामिल हैं। ज्ञात हो कि सीएमएस परिशिष्ट – 1 व 2 में सूचीबद्ध संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण को बढावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग के समन्व्य के लिए एक वैश्विक ढांचा प्रदान करता है।

सीएमएस के परिशिष्ट – 1 एवं 2 में 1100 से अधिक प्रवासी प्रजातियां शामिल हैं, लेकिन इनमें ताजे पानी की प्रवासी मछलियों का प्रतिनिधित्व काफी कम है। इस आलेख के अनुसार, मीठे पानी की मछलियां सबसे लुप्तप्राय पशु समूहों में हैं। इस रिपोर्ट की सह लेखिका प्रो सोन्या जेनिग के अनुसार, आइयूसीएन रेड लिस्ट के अनुसार, ताजे पानी की ज्ञात एक चौथाई प्रजातियां विलुप्त होने के खतरे में हैं। एक और चिंताजनक आंकड़ा यह है कि 1970 और 2020 के बीच दुनिया भर में प्रवासी ताजे पानी की मछलियों की निगरानी की गई आबादी में औसतन 81 प्रतिशत की आबादी में गिरावट आयी है।
इस शोध के मुख्य लेखक फेंगजी हे के अनुसार, ताजे पानी की मछलियों का संरक्षण करने की आवश्यकता है और सीएमएस परिशिष्ट में वर्तमान में उनका प्रतिनिधित्व कैसे किया जाता है, इसके बीच एक बड़ा असंतुलन है। ऐसा असंतुलन ताजे पानी की मछलियों के जीवन इतिहास पर शोध और उन पर लक्षित संरक्षण कार्यों में कमियों को दर्शाता है।
इसकी वजह क्या है और उपाय क्या है?
अंतरराष्ट्रीय संरक्षण प्रयासों में ताजे पानी की प्रवासी मछलियों की कम मौजूदगी की वजह के बारे में बताते हुए लेखकों ने इसकी कई वजह बतायी है। सबसे अहम यह कि इस बात का कोई व्यापक मूल्यांकन नहीं है कि कितनी मछली प्रजातियां ताजे पानी में और राष्ट्रीय सीमाओं के पार अपना जीवन चक्र पूरा करती हैं। दूसरी बात कि ताजे पानी की सभी मछली प्रजातियों में से एक तिहाई को आइयूसीएन रेड लिस्ट में मूल्यांकित नहीं या डेटा अपर्याप्त के रूप में वर्गीकृत किया गया है। आधारभूत डेटा के बिना यह तय करना कठिन है कि कौन-सी प्रजातियां सीमा पार प्रवास और प्रतिकूल स्थिति के सीएमएस के मानदंडों को पूरा करती हैं। तीसरी बात कि सीमा पार बहने वाली नदियों या ट्रांसबाउंड्री नदी बेसिन वाले कई देश, खासकर एशिया व उत्तरी अमेरिका में सीएमएस के सदस्य नहीं हैं, जिससे इन क्षेत्र की प्रजातियों को सीएमएस की सूची में शामिल करने की संभावना कम हो जाती है।
लेखकों ने मीठे पानी के प्रवासी मछलियों के संरक्षण के लिए सीएमएस की पूरी क्षमता का उपयोग करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। इसके तहत यह बताया गया है कि पहले कदम के तौर पर ट्रांसबाउंड्री प्रवासी मीठे पानी की मछलियों की प्रजातियों की पहचान की जानी चाहिए और उसे सीएमएस की सूची में शामिल करना चाहिए। मेकांग व अमेजन जैसी नदी बेसिन में अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढाना चाहिए, जो प्रवासी मीठे पानी की मछलियों के लिए विविधता के हॉटस्पॉट हैं।