कोशी का पानी बढने से दर्जनों घर कटाव की चपेट में, लोग ऊँची जगह ढूंढ रहे ठिकाना

सुपौल से कम्युनिटी जर्नलिस्ट राजेश मंडल की रिपोर्ट

दुबियाही पंचायत, सुपौल जिला, बिहार: कोशी नदी में अगस्त के पहले सप्ताह में जलस्तर बढ गया है। बीरपुर बैराज से पानी छोड़े जाने से सुपौल जिले के तटबंध के बीच स्थित कई गांव प्रभावित हुए हैं। कई इलाके में नदी के अधिक करीब स्थित घरों को कटाव का सामना करना पड़ रहा है। पांच अगस्त से लोगों का संकट बढ गया।

बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग के डेटा से पता चलता है कि सुपौल जिले में कोशी नदी का जलस्तर पांच अगस्त को काफी बढ गया। चार अगस्त को बीरपुर बराज से अपस्ट्रीम डिस्चार्ज एक लाख 75 हजार 685 क्यूसेक पर पहुंच गया, जबकि डाउनस्ट्रीम डिस्चार्ज एक लाख 62 हजार 985 पर था। इसका असर अगले दिन पांच अगस्त को कोशी क्षेत्र में दिखा। बीरपुर बराज पर डिस्चार्ज में पांच अगस्त को थोड़ी कमी आने के बाद छह अगस्त को फिर वृद्धि दर्ज की गई, जिससे तटबंध के भीतर के गांवों पर खतरा कायम है।

आप कोशी के पानी के इस ग्राफ को समझने के लिए नीचे के लिंक पर जाइए –

ध्यान दें: आप इस लिंक पर जाकर कोशी बराज का डिस्चार्ज लेवल और पानी का स्तर देख सकते हैं।

सुपौल जिले के किशनपुर प्रखंड के अंतर्गत पड़ने वाली दुबियाही पंचायत के अंतर्गत ही बेला (या बेलागोट) गांव आता है, जहां कई घरों को कटाव का सामना करना पड़ रहा है। दुबियाही पंचायत में अबतक कुछ घर कोशी के कटाव में समा गए वहीं कई घर कटाव के खतरे में हैं। पंचायत के वार्ड नंबर -7 एवं 8 कटाव से प्रभावित हो रहे हैं। अगर पानी का स्तर और बढा तो और घरों के कटाव के चपेट में आने का खतरा है।

गांव के रामाधीन मुखिया, रामविलास मुखिया, संजय मुखिया, रामदेव पासवान, अनिल पासवान, जलधारा पासवान, लक्ष्मण पासवान, सुनील मुखिया, ब्रह्म मुखिया, सियाराम मुखिया, हरेराम मंडल के घर नदी के कटाव में समा गए। ये लोग तीन दिनों से नए ठिकाने की तलाश में हैं।

लोग मदद के बिना भी लाचार हैं। रिश्तेदारों को मदद के लिए बुलाते हैं, लेकिन विपरीत हालात में उनसे भी पर्याप्त मदद नहीं मिल पाती। लोग ऊँची जगहों की तलाश में हैं। लोगों की मांग है कि कटाव को रोकने वाले कार्य प्रशासन की ओर से किया जाए ताकि और घर इसकी चपेट में न आए।

एक युवक अपने घर की ईंट को दूसरी जगह ले जाते हुए।

बहुत सारे परिवार अपने टूटे घर के बचे हिस्से व सामान को लेकर दूसरी जगह ठिकाना तलाश रहे हैं। लोग कटाव से बचने के लिए अपने घरों में लगे समान को खोल रहे हैं ताकि वे पानी में बह न जाएं और फिर नया घर बनाने में उनका खर्च न बढ जाए।

कई इलाके में नदी के अधिक करीब स्थित घरों को कटाव का सामना करना पड़ रहा है। इस आपदा में नदी के पास स्थित घर पहला शिकार बने हैं, लेकिन पानी और बढ़ा तो गांव के अंदर के घरों पर भी कटाव का खतरा होगा।


पानी बढ़ जाने के कारण 15 दिनों से हमारे गांव में प्राथमिक विद्यालय में पढाई नहीं हो पा रही है। बारिश के दिनों में ज्यादातर दिन हम पढने नहीं जा पाते हैं।

लोग बारिश व जलस्तर बढ़ने के बाद एक जगह से दूसरी जगह सुरक्षित ठिकाना ढूंढ रहे हैं। इसे यहां की तसवीरों में भी देखा जा सकता है।

बेलागोट गांव की दूसरी क्लास में पढने वाली बच्ची निशा कुमारी (बदला नाम) पिछले 15 दिनों से स्कूल नहीं जा पा रही है। गांव में एक प्राथमिक विद्यालय है, जिसमें करीब 70-80 बच्चों का नामांकन है और तीन शिक्षक वहां हैं। पर, बारिश व बाढ़ जैसे हालात होने पर शिक्षक सामान्यतः स्कूल नहीं आते हैं। स्कूल जाने में भी बच्चों को परेशानी होती है। इसलिए पढाई बाधित हो जाती है।

पांच अगस्त को गांव के आसपास पानी काफी अधिक था, हालांकि छह अगस्त को इसमें मामूली कमी आयी, लेकिन फिर पानी बढने का खतरा कायम है, इसलिए लोग एहतियाती कदम उठा रहे है।

बाढ़, डूब और कटाव का खतरा हमलोगों के जीवन में दुर्गा पूजा तक रहता है। हम इस आपदा के स्थायी शिकार की तरह हैं।

बिहार सरकार व जिला प्रशासन को हमारे इलाके में कटावरोधी कार्य चलाना चाहिए ताकि कम से कम लोग पीड़ित हों।

(राजेश मंडल की तसवीरें व डेस्क से राहुल का इनपुट)

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