बजट प्रावधानों से VB-GRAMG के तहत मात्र 52 दिन का रोजगार मिल सकेगा

नरेगा संघर्ष मोर्चा से सरकार के बजट भाषण, बजट दस्तावेज और मनरेगा के खर्च के ट्रेंड, देनदारियों आदि का विश्लेषण कर अपने बयान में कहा है कि बजट आवंटन विकसित भारत – जी राम जी बिल के तहत 125 दिन का ग्रामीण रोजगार उपलब्ध कराने के लिए जरूरी राशि का मात्र 42 प्रतिशत है। यहां राज्य की हिस्सेदारी पहले से तय व अतिरिक्त है।

नई दिल्ली: नरेगा संघर्ष मोर्चा (NSM) ने एक फरवरी 2026 को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट भाषण पर एक विस्तृत बयान देकर ग्रामीण रोजगार गारंटी को लेकर सरकार के कार्यक्रमों व इसके लिए लाए गए नए अभियान विकसित भारत – जी राम जी (VB-GRAMG) को लेकर सवाल उठाया है। नरेगा संघर्ष मोर्चा ने अपने बयान में कहा है कि बजट भाषण और दस्तावेज वीबी-जी राम जी पर मोदी सरकार की पारदर्शिता की कमी की ओर बढाने वाले हैं। अपने 90 मिनट के बजट भाषण में वित्त मंत्री ने मनरेगा व वीबी -भारत जी राम जी के बारे में एक शब्द नहीं कहा।

एनएसएम ने कहा है कि बजट दस्तावेजों में भी इस बात का कोई संकेत नहीं दिया गया है कि वीबी – जी राम जी को कहां और कब अधिसूचित किया जाएगा। राज्य वार मानक आवंटन क्या होने की संभावना है और मनरेगा से बदलाव कैसे होगा?

यह अनिश्चितता और भ्रम राज्य सरकार को मुश्किलों में डाल रहा है, क्योंकि उन्हें अंधेरे में योजनाएं बनानी पड़ रही हैं, जिसमें महत्वपूर्ण बजट आवंटन भी शामिल हैं। बयान में कहा गया है कि फ्रंटलाइन अधिकारी भी भ्रम की स्थिति में हैं। इसलिए केंद्र सरकार को इस अस्पष्टता को खत्म करना चाहिए और बिना देरी के वीबी – जी राम जी के लिए अपनी योजनाओं का खुलासा करना चाहिए।

एनएसएम ने वीबी – जी राम जी बिल के तहत 125 दिन के रोजगार देने के वादे को एक दिखावा करार दिया है। बजट आवंटन इस गारंटी को वास्तव में वित्त पोषित करने के लिए आवश्यक राशि का केवल 42 प्रतिशत है।

मनरेगा की प्रतीकात्मक तसवीर। Photo Credit – – Lib Tec.

यह भी कहा गया है कि यह बजट ऐसे समय में कोई स्पष्टता नहीं लाता है जब राज्यों को नई योजना के लिए धन आवंटित करने की आवश्यकता है। इस बारे में कोई स्पष्टता नहीं है कि जब गर्मियों के महीनों में जो पारंपरिक रूप से मनरेगा के लिए सबसे व्यस्त मौसम होते हैं, श्रमिकों के लिए क्या उपाय किए जाएंगे।

वास्तव में 3.84 लाख करोड़ रुपये की जरूरत

एनएसएम ने कहा है कि मनरेगा के तहत हर पंजीकृत परिवार के लिए बजट बनाना होगा। सिर्फ सक्रिय परिवारों को 125 दिन का काम देने के लिए वीबी – जी राम जी का कुल बजट कम से कम 3.84 लाख करोड़ रुपये होना चाहिए। इसमें से केंद्र का 60 प्रतिशत हिस्सा 2.3 लाख करोड़ रुपये होगा। 95,692 करोड़ रुपये का आवंटन इस जरूरी आवंटन का मात्र 42 प्रतिशत है। मनरेगा के तहत रजिस्टर्ड हर परिवार को असल में 125 दिन रोजगार देने के लिए बजट करीब सात लाख करोड़ रुपये होना चाहिए, जिसकी दूर-दूर तक संभावना नहीं है।

नरेगा संघर्ष मोर्चा ने कहा है कि यह मानते हुए कि 95, 692 यानी 60 प्रतिशत केंद्र का हिस्सा मानते हुए राज्यों का हिस्सा 63, 795 करोड़ रुपये होगा। इस तरह कुल 1.59 लाख करोड़ रुपये होंगे और इस आवंटन से मात्र 52 दिन का औसत काम सक्रिय परिवारों को मिल सकेगा। गाइडलाइंस के अनुसार, राज्यों को केंद्र के आवंटन से अधिक खर्च का 100 प्रतिशत फंड देना होगा। इसलिए 125 दिन का रोजगार देने के लिए राज्यों को दो लाख रुपये से अधिक खर्च करने होंगे।

मनरेगा फाइनेंस के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 कम से कम 11 हजार करोड़ रुपये की बकाया देनदारियों के साथ खत्म होने की राह पर है। यह फरवरी और मार्च के लिए वित्त वर्ष 2024-25 के ट्रेंड का इस्तेमाल करके एक अनुमानित आंकड़ा है। इसमें मनरेगा के तहत लंबित देनदारियों को जोड़ने पर (उदाहरण के लिए पश्चिम बंगाल की कुल बकाया देनदारियां जोड़ने पर) यह लगभग 15 हजार करोड़ रुपये हो जाती हैं।

वित्त वर्ष 2026-27 में मनरेगा के लिए आवंटित 30 हजार करोड़ रुपये में से आधा हिस्सा बकाया चुकाने में खर्च होने की संभावना है। हालांकि केंद्र सरकार ने इस बारे में स्पष्ट नहीं किया है कि यह आवंटन किस लिए है। यदि इसका इस्तेमाल पहली तिमाही में मनरेगा काम के लिए किया जाना है, जब वीबी – जी राम जी कार्यक्रम शुरू हो रहा है तो यह बहुत कम है।

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