हिजला मेला 2026 को लेकर बैठक में ओल-चिकी को व्यापक स्वीकार्यता देने व मूल परंपराओं के संरक्षण की मांग

ग्रामीणों ने बैठक में जिला प्रशासन सह हिजला मेला समिति के समक्ष रखी गई मांगों पर चर्चा की, ग्रामीणों ने हिजला मेला में आदिवासी संस्कृति को अधिक से अधिक महत्व देने की मांग उठायी

दुमका: राजकीय जनजातीय हिजला मेला महोत्सव 2026 की तैयारी को लेकर दुमका के हिजला गांव में मंझी बाबा इमानुवेल हांसदा की अध्यक्षता में एक फरवरी 2026 को कुल्ही दुरुप (बैठक) का आयोजन किया गया। बैठक में ग्रामीणों ने मेला आयोजन से जुड़ी विभिन्न मांगों को लेकर चर्चा की तथा पूर्व में उपायुक्त सह अध्यक्ष एवं अनुमंडल पदाधिकारी सह सचिव, हिजला मेला समिति को सौंपे गए लिखित आवेदन व प्रशासन के रुख की समीक्षा की गई। बैठक में उपस्थित लोगों को मांगों की जानकारी दी गई।

इस दौरान बताया गया कि पूर्व में जिला प्रशासन व हिजला मेला समिति के समक्ष मेला से संबंधित सभी बैनर, पोस्टर, स्मारिका, आमंत्रण पत्र आदि को संताली भाषा की ओल-चिकी लिपि में भी लिखवाने व छपवाने की मांग की गई है। मेला में लगने वाली कृषि प्रदर्शनी, पारंपरिक प्रदर्शनी तथा आदिवासी संग्रहालय (म्यूजियम) में प्रदर्शित वस्तुओं पर लिखे जाने वाले नाम/सूचना अनिवार्य रूप से संताली ओल-चिकी लिपि में भी अंकित किए जाए। मेला परिसर में स्थित सभी कला मंच का नाम स्थायी रूप से संताली ओल चिकी लिपि से भी अंकित किया जाए। मेला परिसर एवं पवित्र स्थल दिसोम मारांङ बुरू थान में किसी अन्य धर्म से संबंधित फोटो, बैनर, प्रचार सामग्री या दुकान लगाने की अनुमति ना दी जाए क्योंकि इससे सामाजिक समरसता प्रभावित होने की संभावना रहती है। यह मेला संताल समाज की धार्मिक परंपरा, सांस्कृतिक एवं रिती रिवाजों पर आधारित है।

दुमका के विधायक बसंत सोरेन की पहल पर मेला परिसर में नवनिर्मित दिसोम मरांग बुरु थान का फोटो को सभी होडिंग, बैनर में दर्शाने की मांग की गई थी। हिजला मेला समिति में हिजला गांव के जयदेव हांसदा, दिलीप सोरेन, रुबिलाल हांसदा, एमेल मरांडी, बुद्दीलाल मरांडी, लाल हांसदा, देवी सोरेन को शामिल करने की मांग भी की गई है।

साथ ही ग्राम हिजला के मांझी थान एवं जाहेर थान को भव्य रूप से सजाने तथा जाहेर थान को स्थायी रूप से घेराबंदी करने एवं मेला के दौरान इन दोनों जगहों में प्रयाप्त रोशनी की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

हिजला में मौजूद तीन सोलर चालित जल मीनार को त्वरित रूप से चालू करने की मांग की गई है जो पिछले कई महीनों से खराब है।

हिजला गांव के अंदर खराब पड़े दो चपाकल को शुरू करने, हिजला गांव में नल से दो समय जलापूर्ति करने, स्थायी रूप से निर्माणाधीन मुख्य प्रवेश एवं निकास तोरण द्वारा में अंकित नाम/सूचना को संताली की ओल चिकी लिपि से भी अंकित करने की मांग की गई।

ग्राम हिजला में हर बिजली खम्भा पर वेपर लाइट लगाने, हिजला मेला परिसर में स्थित संताल आदिवासियों के पूज्य स्थल दिसोम मरांग बुरु थान के पास स्थित पानी टंकी में लोहे का नल लगाकर जल्द चालू करने, ताकि वह जल्द खराब नही हो और 12 महीने चालू रहे, जैसी मांगे की गई हैं।
पिछले वर्ष 2025 में हिजला मेला परिसर में स्थित मंझी आवास(पुआल का घर) और हिजला गांव के स्वंय सेवक के बकाया राशि का भुगतान करने की भी मांग रखी गई है।

मंझी बाबा ने ग्रामीणों को बताया कि अनुमंडल पदाधिकारी सह सचिव, हिजला मेला समिति द्वारा इन मांगों पर सकारात्मक पहल करने का आश्वासन दिया गया है।. आज की बैठक में ग्रामीण यह भी मांग कर रहे हैं कि मेला के दौरान मेला परिसर में विशेष साफ-सफाई का ध्यान रखा जाए और मेला बाद तुरंत मेला परिसर का सफाई की जाए, क्योंकि पॉलिथीन आदि खाकर मवेशी या तो बीमार हो जाते हैंया मर जाते हैं।

इस कुल्ही दुरुप(बैठक) में दिलीप सोरेन, एमेल मरांडी, जयगणेश हांसदा, रूबिलाल हांसदा, बुद्धिलाल मरांडी, लाल हांसदा, विनय हांसदा, सोम हांसदा, प्रदीप हांसदा, विनोद हांसदा, नरेश सोरेन, सनत हांसदा, मनोज हेंब्रम आदि के साथ काफी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

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