डिजिटल कॉमन्स की नेटवर्क के बीच उपलब्धता से पर्यावरण व स्थानीय शासन में बढेगी उपयोगिता

दिल्ली में आयोजित दो दिनों का डिजिटल कॉमन्स कान्फ्रेंस मंगलवार को संपन्न हो गया। चर्चा के दौरान यह सहमति बनी कि डेटा की एक नेटवर्क के बीच उपलब्धता हो जिससे पर्यावरण व स्थानीय शासन में उसकी उपयोगिता बढे और अच्छे परिणाम आएं।

नई दिल्ली: नौ एवं 10 मार्च 2026 को नई दिल्ली में आयोजित डिजिटल कॉमन्स कान्फ्रेंस (Convening for Digital Commons 2026) में प्रैक्टिसनर, नीति निर्माताओं, रिसर्चर, सिविल सोसाइटी व समुदाय के बीच से आने वाले लोगों-प्रतिनिधियों ने शासन, जमीन या क्षेत्र की पुनर्बहाली व समुदाय के नेतृत्व से जुड़े फैसले में डिजिटल डेटा व तकनीक की भूमिका पर चर्चा की। इस चर्चा ने डिजिटल कॉमन्स और उसके गवर्नेंस के आइडिया से जुड़ने के लिए एक प्लेटफॉर्म बनाया। साथ ही इस आयोजन ने साझा तौर पर संरचनात्मक निर्माण, साझेदारी और लंबे समय तक उसे लागू करने के व्यावहारिक तरीकों पर चर्चा को बढावा दिया गया।

डिजिटल कॉमन्स पर आयोजित यह कान्फ्रेंस भारत में एक परिपक्व डिजिटल कॉमन्स इकोसिस्टम की रूपरेखा और उसके साझा संचालन, पारदर्शिता और सबको साथ लेकर चलने वाले एक्सेस के महत्व पर केंद्रित था। इस चर्चा में यह तथ्य उभर कर सामने आया कि डेटा को कॉमन यानी सबसे लिए उपलब्ध करने का मतलब यह नहीं है कि उसे किसी को दे दिया जाए, बल्कि एक नेटवर्क के अंदर उसकी उपलब्धता व उपयोगिता को मुमकिन बनाया जाए। ताकि स्टेकहोल्डर फैसले लेने के लिए डेटा का सही इस्तेमाल कर सकें और अपने विश्लेषण व नजरिये के जरिए वापस उसमें योगदान दे सकें।

कान्फ्रेंस में इस विषय पर भी चर्चा की गई कि डेटा कौन इकट्ठा करता है, इसका प्रयोग कैसे किया जाता है और इसे कौन कंट्रोल करता है। प्रतिभागियों ने इस बात पर जोर दिया कि पंचायतों और समुदाय के अपने गांव, पंचायत, लैंडस्केप और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े डेटा को कंट्रोल करने के अधिकारों और एजेंसी को पहचानने की जरूरत है, ताकि वे सोच-विचार कर फैसले ले सकें और स्थानीय शासन को मजबूत कर सकें।

स्ट्रेटजिस्ट्स वर्ल्ड की को-फाउंडर भारती सिन्हा ने इस बात पर ज़ोर दिया कि डेटा अपने आप में वैल्यू नहीं बनाता है। उन्होंने कहा, “इससे सोच-समझकर फैसले लेने, आपदा लचीलापन और शहरी योजना आदि की ओर बढ़ना चाहिए”।

चर्चा के सत्रों में संस्थाओं में डेटासेट के बंटवारे को ठीक करने, साझा संचालन को मज़बूत करने और मौजूदा डेटा सिस्टम में भरोसा बनाने की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया गया ताकि नकल कम हो और डेटा का असरदार इस्तेमाल बेहतर हो सके।

वूलपर्ट की सीनियर कंसल्टेंट मेघा दत्ता ने कहा, “जब हम डिजिटल इकोसिस्टम की बात करते हैं, तो ‘भरोसा’ उन मुख्य अंदरूनी फैक्टर्स में से एक है जिन पर हमें ध्यान देने की ज़रूरत है।” डेटा के अच्छे इस्तेमाल के बारे में बात करते हुए, अर्घ्यम की सीनियर मैनेजर-गवर्नमेंट पार्टनरशिप, भावना बडोला ने कहा, “अभी नया डेटा इकट्ठा करने में बहुत सारा फंड लग रहा है, लेकिन बहुत सारा डेटा पहले से ही मौजूद है। यह देखना होगा कि मौजूद डेटा का इस्तेमाल कैसे किया जा रहा है और जिस मकसद से डेटा इकट्ठा किया जा रहा है, वह पूरा हो रहा है या नहीं।”

चर्चा के दौरान एक और मुद्दा जो सामने आया, वह था लैंगिक आधार पर अलग-अलग डेटा का न होना। दिल्ली यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर सीमा मेहरा परिहार ने कहा कि अगर डेटा इकट्ठा भी किया जाता है, तो वह अलग-अलग पैरामीटर का इस्तेमाल करके किया जाता है, जिससे उसे समझना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा, “सोशल प्रॉब्लम, डेटा फ्रेमवर्क और डेटा स्टैंडर्डाइजेशन अभी भी एक मुद्दा है।”

प्रतिभागियों ने अलग-अलग कारकों और डेटासेट के बीच ज़्यादा सहयोग की अहमियत पर ज़ोर दिया ताकि ज़्यादा एक जैसा और एक्शन पर आधारित डेटा गवर्नेंस सिस्टम बन सकें। डॉ. शिवांगी सोमवंशी, हेड – सेंटर फॉर एप्लाइड जियोमैटिक्स (CAG) ने प्रतिभागियों के लिए एक ज़रूरी बात कही: “डेटा-टू-डिसीजन पाइपलाइन (यानी डेटा से निर्णय लेने की प्रक्रिया तक) में सिग्नल कहां गुम हो जाता है – संग्रहण, मानकीकरण, संयोजन, सांस्थानिक प्रक्रिया, राजनीतिक इच्छाशक्ति या क्षमतावर्द्धन के दौरान?” उन्होंने रेखांकित किया : पाइपलाइन के सभी स्टेज में कमियां बनी हुई हैं, जो पूरे डेटा इकोसिस्टम में सिस्टमिक सुधार की ज़रूरत को दिखाता है।

आइटी फॉर चेंज के सीनियर एसोसिएट अभिनीत नैयर ने कहा कि डेटा निर्माता, विज़ुअलाइज़र और निर्णय लेने वाले के रूप में पर काम करने वाले लोग अलग-अलग काम कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, ज़्यादा संवाद एकत्रीकरण की जरूरत है।

अर्घ्यम, सीइपीटी रिसर्च एंड डेवलपमेंट फाउंडेशन (CRDF), कोरस्टैक, फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी (FES) और ओपन जियोस्पेशियल कंसोर्टियम द्वारा आयोजित इस कान्फ्रेंस में विभिन्न क्षेत्र के 70 से ज़्यादा प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

डिजिटल कॉमन्स कान्फ्रेंस में पहले दिन किन मुद्दों पर चर्चा हुई, यहां पढें –

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