खूंटव में बैल के सींगों में सिंदूर व तेल लगाया जाता है और उसे फूलों की माला पहनाई जाती है। इस तरह पशुओं के प्रति सम्मान प्रकट किया जाता है।
बोआरीजोर (गोड्डा) : संताल आदिवासी समाज द्वारा सोहराय पर्व के तीसरे दिन, 11 जनवरी 2026 को खूंटव माह का आयोजन किया जाता है। गोड्डा जिले के बोआरीजोर गांव में लगभग 30 वर्षों के अंतराल पर इस साल पारंपरिक रूप से खूंटव अनुष्ठान का आयोजन किया गया। इस कवायद को संताल आदिवासियों की गौरवशाली परंपरा को पुनर्जीवित करने की कवाायद और नई पीढी को इसको लेकर सक्रिय करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

30 सालों बाद किया गया यह आयोजन जोगमांझी नारायण बेसरा के घर के सामने संपन्न हुआख् जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों की सहभागिता रही। खूंटव माह के अवसर पर बैल के सींगों में सिंदूर व तेल लगाया गया तथा उसे फूलों की माला पहनाई गई। माला में पकवान और रुपये भी लगाए गए।
परंपरा के अनुसार कुल्हि में घर के दामाद द्वारा खूंटा गाड़ा गया। पूजा-अर्चना के उपरांत बैल को माला पहनाकर दामाद द्वारा उसे बाहर ले जाकर खूंटा से बांधा गया।

इसके पश्चात दामाद सहित सभी ग्रामीणों ने बैल के चारों ओर मांदर की थाप पर चक्कर लगाते हुए पारंपरिक पैकाहा लवड़िया नृत्य किया। इस पारंपरिक आयोजन से ग्रामीणों में विशेष उत्साह और खुशी देखने को मिली। इस अवसर पर सुनील मुर्मू, हराधन बेसरा, ताला सोरेन, संजलह सोरेन, बबलू मुर्मू, लखन सोरेन, रघु मुर्मू, सच्चिदानंद सोरेन सहित अनेक ग्रामीण उपस्थित थे।