सोन नदी के पानी को लेकर बिहार व झारखंड के बीच केंद्र के हस्तक्षेप से समझौता

समझौते को लेकर कहा गया है कि इससे दक्षिण बिहार के जिलों व झारखंड के सूखा प्रभावित क्षेत्र को लाभ होगा

नई दिल्ली: बिहार और झारखंड के बीच 31 अक्टूबर 2026 को सोन नदी के पानी के लिए केंद्र सरकार की पहल पर एक ऐतिहासिक समझौता हुआ। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह एवं जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एवं झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हस्ताक्षर किए। वर्ष 2000 में बिहार के विभाजन एवं अलग झारखंड राज्य के गठन के बाद से ही दोनों राज्यों के बीच सोन नदी के पानी को लेकर विवाद था।

गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि इस समझौते के तहत बिहार के भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, अरवल, गया और पटना की बड़ी आबादी को अब सोन नदी से पीने व सिंचाई के लिए पानी मिल सकेगा। इसके साथ ही झारखंड के पलामू, गढ़वा व अन्य इलाके को सिंचाई व पीने के लिए भी पानी उपलब्ध होगा।

समझौते के अनुसार, बिहार को 5.75 एमएएफ (Million Acre Feet) और झारखंड को 2.00 एमएएफ पानी सोन नदी से मिलेगा। इस समझौते से दक्षिण बिहार के जिलों और झारखंड के सूखा प्रभावित क्षेत्रों को लाभ होगा।

दोनों राज्यो के मुख्यमंत्री ने समझौते को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व गृहमंत्री अमित शाह का आभार जताया।

समझौते की पृष्ठभूमि


1973 में बाणसागर समझौते के तहत, सोन नदी के कुल 14.25 एमएएफ पानी में 5.25 एमएएफ पानी मध्यप्रदेश को, 1.25 एमएएफ पानी उत्तरप्रदेश को और 7.75 एमएएफ पानी तत्कालीन अविभाजीत बिहार को आवंटित किया गया था। वर्ष 2000 में झारखंड के गठन के बाद दोनों राज्यों के बीच 7.75 एमएएफ पानी के बंटवारे को लेकर विवाद था। अब इस विवाद को सुलझा लिया गया है।

बिहार के भोजपुर जिले में कोईलवर के पास सोन नदी का दृश्य। Photo – Rahul Singh

इस साल चार अंतरराज्यीय करार हुए

प्रेस इन्फॉरमेशन ब्यूरो पर जारी सरकारी बयान के अनुसार, गृह मंत्री अमित शाह की पहल पर अंतर्राज्यीय परिषद के माध्यम से विभिन्न राज्यों के बीच कई दशकों से लंबित जल विवादों का समाधान निकाला जा रहा है, इस वर्ष अब तक चार ऐतिहासिक समझौते हो चुके हैं।

7 जुलाई, 2026 को गृह मंत्री की उपस्थिति में नर्मदा अवार्ड लाभार्थी राज्यों महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच लंबित भुगतान के निपटारे पर ऐतिहासिक समझौता हुआ।

29 जून, 2026 को शाह की उपस्थिति में यमुना जल परियोजना के निर्माण और कार्यान्वयन के संबंध में राजस्थान और हरियाणा सरकार के बीच एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। इस समझौते के तहत जुलाई से अक्टूबर तक लगभग 580 एमसीएम पानी यमुना नहर से तीन भूमिगत पाइपलाइंस के जरिए राजस्थान तक पहुंचेगा। इस परियोजना का उद्देश्य पश्चिमी यमुना नहर से भूमिगत पाइपलाइन के ज़रिए राजस्थान के हिस्से का यमुना का पानी पहुँचाना है।

इससे राजस्थान, अपर यमुना बेसिन के इस्तेमाल लायक सतही पानी के बँटवारे पर 1994 के समझौते के तहत मिले पानी का सही तरीके से इस्तेमाल कर पाएगा। इस परियोजना से राजस्थान के सूखे और कम बारिश वाले इलाकों में पीने के पानी की निरंतर आपूर्ति होगी और सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा, जिससे लाखों लोगों को फ़ायदा होगा।

16 जून, 2026 को गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में वर्षों से लंबित ‘किशाऊ बहु-उद्देशीय बांध परियोजना’ पर संबंधित राज्यों में सहमति बनी। बैठक में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान “किशाऊ बहु-उद्देशीय परियोजना” के क्रियान्वयन के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर सहमत हुए। किशाऊ बहु-उद्देशीय बांध परियोजना के संबंध में जल घटक के कार्य का 90% केन्द्रीय सहायता के रूप में केंद्र सरकार द्वारा और शेष 10% राशि का वित्तीय भार 6 राज्यों द्वारा वहन किया जाएगा। हिमाचल प्रदेश के विद्युत घटक के हिस्से की लागत को साझा करने के एवज में हिमाचल प्रदेश के लिए आवंटित पानी को दिल्ली और राजस्थान को देने पर सहमति बनी।

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