पश्चिम बंगाल के श्रमिक संगठनों की चेतावनी : राज्य सरकार काम पूरा करे, नहीं तो करेंगे आंदोलन

पश्चिम बंगाल के 12 अगल-अलग श्रमिक संगठनों ने कोलकाता में एक साझा सम्मेलन कर राज्य की नई सरकार को चेतावनी दी है और कहा है कि वह श्रमिक हित में फैसले ले। श्रमिक संगठनों ने कहा है कि वह शुभेंदु सरकार के 200 दिन पूरे होने पर एक रिपोर्ट कार्ड भी जारी करेंगे।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल के विभिन्न श्रमिक संगठनों ने शुभेंदु अधिकारी की अगुवाई वाली राज्य की नई भाजपा सरकार को चेतावनी दी है कि वह मजदूरों की मांगों को पूरी करे या राज्य में नए सिरे से आंदोलन का सामना करने के लिए तैयार रहे। 30 अगस्त 2026, रविवार को कोलकाता के भारत सभा भवन में राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए करीब 300 श्रमिकों व कामकाजी लोगों ने अपनी एकजुटता प्रदर्शित करते हुए कहा कि अगर सरकारी हमारे अधिकारों व हितों को पूरा नहीं करती है तो वह बड़ा आंदोलन का सामना करेगी।

श्रमिकों की मांग आवास व जमीन का अधिकार, काम और उचित मजदूरी की मांग है। यह आयोजन असंगठित क्षेत्र श्रमिक संग्रामी मंच, भूखा मानुषेर अधिकार अभियान द्वारा आयोजित किया गया था और इस आयोजन में 12 श्रमिक व जन संगठनों ने हिस्सा लिया।

सम्मेलन में खेतिहर मजदूरों, फुटपाथ पर सामान विक्रेता, घरेलू कामगार, चाय बागान मजदूर, होजरी मजदूर, सेक्स वर्कर, मिड डे मील वर्करों और झुग्गी के लोगों ने पिछली सरकार की विफलताओं को उजागर किया।

सम्मेलन में कहा गया कि नई सरकार के आरंभिक कदमों में एक था – हॉकरों व अतिक्रमण करार दी गई बस्तियों को धमकाना, जिसको मजदूरों ने कड़ा विरोध किया। मंच और उससे जुड़े संगठनों – मुक्तकंठ महिला समिति और पश्चिम बंगाल गृह परिचारिका समिति ने पूरे कोलकाता में बस्तियों को संगठित करने का काम किया है। अबतक पांच कानूनी मामलों ने लोगों की बेदखली को रोकने में मदद की है। लोगों ने 21 दिन के धरने और सम्मेलन के दौरान ढाकुरिया पुल के नीचे रहने वाले लोगों का भी साथ दिया। लोगों की मांग है कि उनकी बेदखली बिना पुनर्वास न की जाए। श्रमिक संगठनों का कहना है कि अदालत ने इस मांग कर समर्थन किया है और सरकार को कोलकाता के बेघर और बस्ती में रहने वाले लोगों के लिए तुरंत उचित आवास नीति बनाना चाहिए।

चाय बागान श्रमिकों के मुद्दे

चाय बागान मजदूरों के अनियमित वेतन भुगतान, पीएफ में अंशदान जमा नहीं करने, ग्रेच्युटी व बोनस भुगतान न करने व वेतन सहित वार्षिक छुट्टी नहीं मिलने के खिलाफ साल भर चले संघर्ष के मुद्दा भी उठाया गया।

मेरिको एग्रो इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड पर विशेष तौर पर चर्चा की गई जिसे पिछली राज्य सरकार ने 13 चाय बागानों का नियंत्रण सौंपा था। मजदूरों का आरोप है कि कंपनी ने उनसे महीनों तक बिना वेतन के काम करवाया और पीएफ का योगदान काटा लेकिन उसे जमा नहीं किया। बार-बार शिकायत करने के बावजूदए नई सरकार ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है।

इससे भी ज़्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि बंद चाय बागानों के मज़दूरों को मिलने वाला 1500 रुपये का गुजारा भत्ता रोक दिया गया है। यह भुगतान छह महीने से बंद है, जिससे पहले से ही गरीब मज़दूर भुखमरी की कगार पर पहुँच गए हैं। सम्मेलन में तोरसा टी एस्टेट में आदिवासियों की ज़मीन पर कब्ज़ा करने की कोशिशों का भी विरोध किया गया।

महिला मज़दूरों ने उस बिना वेतन वाले काम को मान्यता देने की माँग की, जो महिलाएँ रोज़ करती हैं, लेकिन जिसके बारे में ऐसी मान्यता है कि कोई आर्थिक मूल्य ही न हो। बिंदोदिनिन श्रमिक यूनियन की सेक्स वर्करों ने अपने काम को ‘मज़दूरी’ के तौर पर मान्यता देने की मांग की।


घरेलू कामगारों ने बताया कि सरकार का लेबर सिस्टम अक्सर मालिकों के साथ विवाद सुलझाने के लिए कोई असरदार तरीका नहीं देता, क्योंकि उनका काम करने की जगह और रोज़गार पारंपरिक परिभाषाओं में नहीं आते।


होजरी वर्करों ने कम वेतन, बिना भुगतान के ओवरटाइम, जेंडर के आधार पर वेतन में भेदभाव और वेतन संशोधन में देरी जैसे मुद्दों को उठाया।

सरकार के 200 दिन पूरे पर रिपोर्ट कार्ड जारी करने का निर्णय


मिड-डे मील वर्करों ने चेतावनी दी कि उनके काम को इस्कॉन (ISKCON) जैसी बड़ी कॉर्पोरेट संस्थाओं को सौंपने की कोशिशों से हज़ारों मौजूदा वर्करों की आजीविका खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें साल में सिर्फ़ 10 महीने का वेतन मिलता है। सम्मेलन में लाखों महिलाओं को अन्नपूर्णा योजना का भुगतान मनमाने ढंग से रोकने या न करने की निंदा की गई, जिसमें कोई पारदर्शिता या सही प्रक्रिया नहीं अपनाई गई।

सम्मेलन में कहा गया कि ग्रामीण रोज़गार के मामले में सबसे बड़ी विफलता वीबी-जी-राम जी है। 125 दिन के काम के वादे के बावजूद, यह योजना शुरू ही नहीं हो पाई है। पश्चिम बंगाल खेत मज़दूर समिति ने काम मांगने वाले वर्करों के लगातार उत्पीड़न की बात कही है।

श्रमिक संगठनों ने आगे के कार्यक्रमों की एक रूपरेखा भी तय की। इसमें छह सितंबर को हाशिमारा में चाय बागान वर्करों के ज़मीन के अधिकारों पर सम्मेलन, पुरुलिया के छह ब्लॉकों में 125 दिन के रोज़गार और अन्नपूर्णा योजना की मांग को लेकर धरना शामिल है। साथ ही श्रम, शिक्षा, स्वास्थ्य, खाद्य आपूर्ति, शहरी विकास, ग्रामीण विकास, भूमि सुधार और अन्य विभागों को ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया गया।

श्रमिक संगठन के प्रतिनिधियों व श्रमिकों ने तय किया कि जहां जरूरी हो, वहां कानूनी कार्रवाई करेंगे और 17 नवंबर 2026 को नई सरकार के 200 दिन पूरे होने पर राज्य सरकार के कामकाज पर एक रिपोर्ट कार्ड जारी किया जाएगा।

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