सुपौल जिले के एकडेरा घाट पर कोशी पीड़ित जुटे और अपनी आठ सूत्री मांगों को उठाया
सुपौल : कोशी नव निर्माण मंच के आह्वान पर कोशी तटबंध के भीतर एकडेरा घाट पर कोशी बाढ़ पीड़ितों का 22 सितंबर 2026 को एक दिवसीय जल सत्याग्रह आयोजित किया गया। इस जल सत्याग्रह में मरौना अंचल के सिसौनी पंचायत के एकडेरा, जोबहां, सिसौनी पलार, किशनपुर अंचल के बैराहा पंचायत के, बौराहा, गोढ़ियारी, मानिकपुर व बुर्जा मुसहरी, नोआबाखर पंचायत के परसाही, सिमराहा इत्यादि गांवों के बाढ़ पीड़ित एकत्र हुए और अपनी पीड़ा सुनायी।
कोशी नदी में खड़ा होकर लोगों ने बताया कि मानसून आने के बाद से कोशी तटबंध के भीतर हमलोगों के गांवों में पानी भरा है। घर, आंगन, रास्ते, चारों तरफ पानी ही पानी है। एक घर से दूसरे घर जाने के लिए नावों का ही सहारा है। महिला, बच्चे, बूढ़े, बीमार की स्थिति खराब है। पानी लगने से सभी परेशान हैं तो पशु भी पानी से बीमार हो रहे हैं। फसल तो इस साल किसी की नहीं बची है। सब पानी से बर्बाद हो गई है।

कोशी पीड़ितों ने अपने पुनर्वास की मांग की है।
पीड़ितों का कहना था कि प्रशासन को गांव आकर हमारी परेशानी सुनना चाहिए। बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग के पत्रांक 3340 दिनांक 3/9/16 में स्पष्ट उल्लेख है कि जब कोई मोहल्ला/टोला एवं गांव नदी के पानी से चार-पांच दिनों तक चारो तरफ से घिर जाए व वहां पहुंचने के लिए कोई रास्ता नहीं बचे, और इस घटना से लोगों का सामान्य जन-जीवन कुप्रभावित हो जाए तो वैसे मोहल्ले/टोले एवं गाँव को बाढ़ पीड़ित माना जाएगा। राज्य सरकार के प्रावधानों को जिला प्रशासन अनुपालन नहीं कर रहा है और अन्याय कर रहा है। जबकि हमलोगों के विधायको में एक उप मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री जी हैं। इनको बिहार के बाढ़ पीड़ितों की चिंता है पर अपने विधान सभा और जिले के बाढ़ पीड़ितों को भूल गए हैं। इसीलिए पानी में खड़ा होकर हमें अपना दुःख बताना पड़ रहा है।
लोगों ने जिले को बाढ़ घोषित कर मानक संचालन प्रक्रिया और मानदर के तहत जी. आर. की राशि देने, फसल क्षति का इनपुट अनुदान देनें, जिनके पास बाहर बसने को जगह नहीं है उन्हें बाहर पुनर्वासित कराने, तटबंध के भीतर स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था करने, मेडिकल और पशुओं का निःशुल्क कैंप लगाने, कोशी पीड़ित विकास प्राधिकार को पुनर्जीवित करने का प्रयास कराने सहित कोशी की छाड़न धाराओं को पुनर्जीवित कर कोशी का समाधान की दिशा में कार्य करने की मांग की।

कार्यक्रम में सुभाष यादव, जय कुमार, शिव नारायण मंडल, राम कुमार राय, शिव शंकर मंडल, आलोक राय, भूषण कुमार, मूंगा लाल मंडल, इन्द्रनारायण सिंह मो सदरूल, राजकुमार महतो, रीना देवी, रीता देवी, सरस्वती देवी, दुखी महतो, महेंद्र महतो, मनेश महतो, पांचू यादव, भोला महतो, अशोक यादव, जटायु मुखिया, श्रवण मंडल, लाल यादव, दुर्गा देवी, बेचन शर्मा, शिबू मंडल, रामलखन मंडल, निर्मल देवी, हीरा देवी, सुमित्रा देवी, सीता देवी, राधा देवी, चनन देवी, फूलकुमारी देवी, शिवनंदन राय, सूरज राय, बाले मंडल, धनेश्वर सदा, विद्यानंद सदा, रंजन सदा ललित राम, सरिता देवी, मुन्नी कुमारी, कौशल्या देवी, मुंद्रिका देवी, महेन्द्र यादव आदि ने अपनी बातें रखी। जल सत्याग्रह में सैकड़ों की संख्या में महिला-पुरुष उपस्थित थे।