तोरसा लैंड पोर्ट मामले में गिरफ्तार 11 लोगों को मिली जमानत, हाइकोर्ट से भी आया महत्वपूर्ण फैसला

कलकत्ता हाइकोर्ट ने लैंड पोर्ट ऑथिरिटी ऑफ इंडिया व पुलिस से लोगों को हटाने से पहले कानून सम्मत प्रक्रिया का पालन करने को कहा है।

अलीपुरद्वार/कोलकाता: दो नवंबर 2026 को पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले के तोरसा चाय बागान में विवादित जमीन पर कब्जा किए जाने के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे 11 लोगों को आज अलीपुरद्वार कोर्ट ने जमानत दे दी है।

उन्हें तब गिरफ्तार किया गया था जब जमीन पर कब्जा करने के लिए बुलडोजर और पुलिस बल तैनात किए गए थे। उम्मीद है कि जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद सात नवंबर को उन्हें न्यायिक हिरासत से रिहा कर दिया जाएगा।

दूसरी ओर आज कलकत्ता हाइकोर्ट को वेकेशन बेंच में पश्चिम बंग चा मजूर समिति पीबीसीएमएस के तोरसा मामले पर सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति सब्यसाची भट्टाचार्य और न्यायमूर्ति अर्जुन रे मुखर्जी की खंडपीठ ने आज इस मामले में कहा कि भले ही जमीन पर रहने वाले लोगों को अनधिकृत कब्जाधारी या अतिक्रमणकारी माना जाए, फिर भी उन्हें हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह से कानून के अनुसार ही होनी चाहिए।


तोरसा चाय बागान के श्रमिक जो अपनी मांगों को उठा रहे हैं। Photo – PBCMS

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि परियोजना (प्रोजेक्ट) आगे बढ़ सकती है, लेकिन कानून के शासन की कीमत पर नहीं। न तो लैंड पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया और न ही पुलिस, लोगों को बेदखल करने से जुड़ी कानूनी प्रक्रियाओं की अनदेखी कर सकती है। मालूम हो कि लैंड पोटर्स ऑथिरिटी ऑफ इंडिया द्वारा यहां एक लैंड पोर्ट का निर्माण प्रस्तावित है।

यह आदेश मनमानी बेदखली के खिलाफ तोरसा के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच है। लोगों को बुलडोजर, पुलिस बल या डरा-धमकाकर उनके घरों और जमीन से जबरन नहीं निकाला जा सकता। किसी को भी बेदखल करने से पहले, अधिकारियों को उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा।

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