दुमका : हिजला गांव के ग्रामीणों और विभिन्न आदिवासी संगठनों की लगातार मांग करने और आंदोलन का चेतावनी देने पर सोमवार की शाम को मेला प्रशासन ने तोरण द्वार में हिंदी और ओलचिकी से एलइडी डिस्प्ले(लाइट) लगवाया। इन डिस्प्ले को मेला उद्घटान के एक दिन पूर्व किसी कारण वश मेला प्रशासन द्वारा हटवा दिया गया था। इस बात से स्थानीय ग्रामीण, आदिवासी समाज व उनके संगठन नाराज थे और पिछले दिनों उन्होंने इसको लेकर प्रदर्शन भी किया था।
आदिवासी संगठनों और ग्रामीणों ने मेला परिसर में स्थित आदिवासियों का पूज्य स्थल दिसोम मरांग बुरु स्थान की हाल की नई तस्वीर बैनर में लगाने की मांग की थी। इसके बाद मंगलवार शाम 4 बजे तक एक अपडेट बैनर लगाया गया है।
21 फरवरी को मेला शुरू होने के बाद 23 फरवरी को हिजला के ग्राम प्रधान सुनीलाल हांसदा के नेतृत्व में ग्रामीणों व आदिवासी संगठनों ने एक बैठक कर ओलिचिकी की हिजला मेले में उपेक्षा का विरोध किया था और सरकार व प्रशासन से तुरंत इसे दुरुस्त करने की मांग की थी। उक्त बैठक में ग्रामीणों और आदिवासी संगठनों ने कहा था कि आदिवासी व उनकी संस्कृति के नाम पर मेला हो रहा है, लेकिन कहीं भी मेला समिति के द्वारा संताली में बैनर और तोरण द्वार नहीं लगाया गया है, जबकि इसके पूर्व के वर्ष में लगाया गया था। ग्रामीणों के विरोध के बाद इसमें सुधार करने करने का प्रयास मेला समिति द्वारा किया गया है।