जयगांव/बीरपाड़ा: हंटापाड़ा, धुमचिपाड़ा, गरगंगा चाय बागानों के मजदूरों और तोरा चाय बागान में प्रस्तावित लैंड पोर्ट प्रोजेक्ट के प्रभावितों ने 22 सितंबर 2026 को राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के दौरे के दौरान शांतिपूर्ण पदयात्रा निकाला। इन दोनों समूहों ने अपने इस प्रदर्शन के जरिये यह संदेश दिया कि सिर्फ सरकार के आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि ठोस कार्रवाई करनी होगी।
पश्चिम बंग चा मजूर समिति के नेतृत्व में श्रमिकों ने हंटापाड़ा से अपनी पदयात्रा आरंभ की। उनकी मांग है कि चार से चार पखवाड़े की बकाया मजदूरी का भुगतान किया जाए, 2025 के लिए 10 प्रतिशत बोनस, 2025 के लिए छुट्टी की मजदूरी, 2023 से बकाया पीएफ का भुगतान और करीब 20 सालों से लंबित ग्रेच्युटी का भुगतान किया जाए।
मजदूरों ने अपने प्रदर्शन के क्रम में कहा कि उन्हें बार-बार आश्वासन मिला लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। डुअर्स कन्या और श्रमिक भवन में आश्वासन मिलने के बाद उन्हें हंटापाड़ा गेट पर भी वादा किया गया था कि 17 सितंबर तक उनका बकाया चुका दिया जाएगा। अब 22 सितंबर हो जाने के बाद भी भुगतान नहीं किया गया है।
हालांकि मदारीहाट पुलिस ने हंटापाड़ा पदयात्रा को रोक दिया और मजदूरों से अपनी यात्रा को रोकने की अपील की। पुलिस ने कहा कि ज्ञापन एसपी के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजा जाएगा। जबकि मजदूरों का कहना था कि उन्हें बार-बार केवल आश्वासन मिले हैं, इसलिए वे सीधे मुख्यमंत्री तक अपनी बात रखना चाहते हैं। श्रमिकों व पीबीसीएमएस की केंद्रीय कमेटी के सदस्य किरसेन खड़िया ने कहा कि अगर चार दिनों में ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
वहीं, तोरसा बागान जमीन बचाओ समिति के सदस्यों ने भी अपने धरना स्थल से मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने के लिए पदयात्रा शुरू की। मालूम हो कि पिछले 61 दिनों से यहां के आदिवासी व गोरखा चाय श्रमिक अपनी जमीन, घर व अधिकारों की मांगों को लेकर धरना पर बैठे हैं।
तोरसा के लोगों की मांग है कि प्रस्तावित लैंड पोर्ट से प्रभावित भूमि को परियोजना से बाहर किया जाए और प्रभावितों को उनकी जमीन वापस की जाए। ताकि तोरसा बागान में रहने वाले श्रमिकों को अपने घर व भूमि से हटना न पड़े।

तोरसा लैंड पोर्ट में बागान की जमीन लेने के खिलाफ बागान के श्रमिक दो महीने से अधिक समय से आंदोलन कर रहे हैं।
समिति से जुड़े लोगों ने ऐतिहासिक निवास, कब्जे व रोजगार से जुड़ी मांगों को मान्यता देने की मांग की। साथ ही जमीन व पुनर्वास के बिना किसी की जबरन बेदखली का विरोध किया। तोरसा की पदयात्रा को जयगांव पुलिस ने रास्ते में ही रोक दिया।
इस पर श्रमिकों का कहना था कि मुख्यमंत्री उनके क्षेत्र में आए तो वे स्वयं उनके सामने अपनी समस्याएं रखना चाहते हैं। बातचीत के बाद जयगांव थाने के ओसी ने एसपी के माध्यम से ज्ञापन मुख्यमंत्री तक पहुंचाने और सामस्याओं के समाधान के लिए जरूरी पहल का अश्वासन दिया। इसके बाद समिति के सदस्यों ने पदयात्रा को समाप्त कर दिया और धरना को फिर से शुरू किया।
पदयात्राओं से पहले कार्यकर्ताओं व स्थानीय नेताओं से पुलिस द्वारा पूछताछ और हिरासत में रखने की घटनाओं की भी शिकायत की गई। समिति ने शिकायत की है कि कार्यकर्ता किरण शर्मा को शाम चार बजे से रात 11 बजे तक बीरपाड़ा थाने में रखा गया। पीबीसीएमएस की सचिव हेमलता बेक और हंटापाड़ा व धूमिचिपाड़ा की अन्य स्थानीय महिलाओं से भी लगातार पूछताछ की गई। तोरसा के विनोद उरांव, बिलास व मिरियम से भी लगातार पूछताछ की गई।