बाघों के संरक्षण के लिए सिर्फ शिकार उपलब्धता नहीं, सुरक्षित गलियारा व टकराव कम करना जरूरी

तेलंगाना के कवल टाइगर रिजर्व में वर्ष 2010 से 2022 सात बार किए गए सर्वेक्षण पर आधारित अध्ययन में कहा गया है कि केवल शिकार की पुनर्बहाली कवल बाघ अभ्यारण्य में बाघों की वापसी में प्राथमिक बाधा नहीं है, बल्कि कमजोर वन्यजीव गलियारा संपर्क और मानव वन्यजीव संघर्ष महत्वपूर्ण कारक हैं।

बेंगलुरु : सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ स्टडीज के एक नए अध्ययन से यह पता चलता है कि बाघों के संरक्षण के लिए पर्याप्त शिकार उपलब्धता के अलावा पारिस्थितिकी पुनर्बहाली के साथ गलियारा संपर्क और मानव वन्यजीव संघर्ष टकराव जैसे मुद्दों को सुलझाना जरूरी है। भारत के तेलंगाना राज्य के कवल टाइगर रिजर्व में 35 से अधिक बाघों की आबादी पर केंद्रित यह अध्ययन 23 अप्रैल 2026 को संरक्षण पर केंद्रित एक अंतरराष्ट्रीय जनरल में प्रकाशित हुआ है।

यह अध्ययन सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ स्टडीज के इमरान सिद्दीकी के नेतृत्व में किया गया और हैदराबाद टाइगर कंजरवेशन सोसाइटी के नीलांजन बसु व डॉ कथन बंद्योपाध्याय (Haub School of Environment and Natural Resources, University of Wyoming), डॉ जॉन एल कोप्रोवस्की (School of Natural Resources and the Environment, University of Arizona) और डॉ वेंकटेश अंगंधुला (हैदराबाद टाइगर कंजर्वेशन सोसायटी) इसके सह लेखक हैं।

अध्ययन के निष्कर्षाें के अनुसार, 2012 में टाइगर रिजर्व घोषित होने के बावजूद कवल में वर्तमान में कोई स्थानीय प्रजनन बाघ आबादी नहीं है। पिछले एक दशक में महाराष्ट्र की एक निकटवर्ती स्रोत आबादी से 15 बाघ रिजर्व में आए हैं, लेकिन इनमें से केवल दो मादा थीं, जिससे बिना हस्तक्षेप के एक प्रजनन आबादी की स्थापना असंभव है।

2010 से 2022 के बीच सात सर्वेक्षण अवसरों पर एकत्र किए गए दीर्घकालिक डेटा का उपयोग करते हुए लेखकों ने पांच शिकार प्रजातियों के घनत्व रूझानों को ट्रैक किया। इस अवधि में चीतल की आबादी में वृद्धि हुई, जबकि सांभर, नीलगाय, चौसिंगा की आबादी स्थिर रही और जंगली सूअर की आबादी में उतार-चढाव देखा गया। शिकार प्रचुरता और शिकार जैव भार मॉडल लागू करते हुए शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया कि वर्तमान में शिकार उपलब्धता के आधार पर रिजर्व का मुख्य क्षेत्र करीब 35 से 41 बाघों को सहारा दे सकता है।

इस अध्ययन के मुख्य लेखक इमरान सिद्दीकी कहते हैं, “कागज पर संरक्षण पारिस्थितिकी की पुनर्बहाली की गारंटी नहीं देता है। कवल जैसे परिदृश्य के लिए सफलता कार्यात्मक शिकार आधार की बहाली, विचरण करने वाले बाघों के लिए संपर्क मार्गाें को सुरक्षित करने और स्थानीय समुदाय के साथ विश्वास और सह अस्तित्व बनाने पर निर्भर करती है, जो अंततः वन्यजीवों के भविष्य का निर्धारण करते हैं”।

यह अध्ययन खंडित परिदृश्यों, राजमार्गाें, नेलवे नेटवर्क, खुली खदानों और घनी मानव बस्तियों को कवल और महाराष्ट्र के ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व जैसी निकटवर्ती स्रोत आबादियों के बीच बाघों की आवाजाही में प्रमुख प्रमुख बाधाओं के रूप में पहचानता है। 2019 से 2025 तक के प्रारंभिक बाघ निगरानी डेटा से पता चलता है कि बाघ कई गलियारों के माध्यम से कवल की ओर बढ़ रहे हैं, लेकिन उनका प्रवासन अक्सर बुनियादी ढांचे एवं संघर्ष के कारण बाधित होता है।

विशेष रूप से कागजनगर वन प्रभाग के माध्यम से बाघों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए वन्यजीव ओवरपास या अंडरपास से सुसज्जित किया जाए। यह अध्ययन संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी के महत्व को भी रेखांकित करता है। कवल के मुख्य क्षेत्र में लगभग 30 गांव वन संसाधनों पर निर्भर हैं और पशुधर चराई, आवारा कुत्तों और फंदों जैसी समस्याएं वन्यजीव पुनर्बहाली के लिए लगातार खतरा बनी हुई है।

लेखक इस बात पर जोर देते हैं कि राजस्व साझाकरण, वैकल्पिक आजीविका और वन्यजीव क्षति के लिए समय पर मुआवजा के माध्यम से सामुदायिक जरूरतों को एकीकृत करना दीर्घकालिक सफलता के लिए जरूरी है।

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