दुमका: दुमका प्रखंड के माचखिचा गांव के लेखा होड़ (संताल गांव संचालक) की पहल पर ग्रामीणों द्वारा पारंपरिक पूजा स्थल मांझी थान मांझी स्थान में साप्ताहिक पूजा की शुरुआत की गई है। ऐसा आयोजन बीते रविवार यानी 26 अप्रैल को हुआ। इस अवसर पर गांव के महिला, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चों ने सामूहिक रूप से मांझी थान में एकत्र होकर पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार धूप, अगरबत्ती, जल, लड्डू, गुड़, चूड़ा, पानी आदि अर्पित कर विधिवत पूजा-अर्चना की।
लेखा होड़़ ने बताया कि वर्तमान समय में धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित रखने तथा बच्चों को सकारात्मक जीवन मूल्यों की ओर प्रेरित करने के उद्देश्य से इस साप्ताहिक मांझी थान पूजा की शुरुआत की गई है। यह पूजा संताल आदिवासी समाज के आराध्य देव मरांग बुरु के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने हेतु आयोजित की जाती है।

ऐसे आयोजनों के जरिए में बच्चों में सांस्कृति व धार्मिक चेतना आती है और अपनी परंपराओं के प्रति उनमें समझ बढती है।
साप्ताहिक मांझी थान बोंगा बुरु (पूजा) का मुख्य उद्देश्य सामुदायिक एकता, आध्यात्मिक शांति तथा सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना और इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। यह पहल विशेष रूप से युवा पीढ़ी और बच्चों को अपनी परंपरा और संस्कृति से जोड़ने के लिए की गई है। ताकि वे अपने रीति-रिवाजों को समझें, उनका सम्मान करें और उस पर गर्व महसूस करें।
इस आयोजन के दौरान बच्चों को सकारात्मक जीवन मूल्यों के प्रति प्रेरित करने हेतु विशेष प्रार्थना की गई, जिसमें नशा से दूर रहने, नियमित विद्यालय जाने, माता-पिता एवं बुजुर्गों का सम्मान करने का संदेश दिया गया।

पूजा में महिला-पुरुष सभी समान रूप से और पारंपरिक वेशभूषा में हिस्सा लेते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि साप्ताहिक मांझी थान बोंगा बुरु (पूजा) से गांव और परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और भाईचारा बढ़ेगा तथा धर्म, संस्कृति और सभ्यता को बचाए रखने में मदद मिलेगी जो आगे चलकर संताल समाज को धार्मिक, आर्थिक, सामाजिक रूप से मजबूत करेगी। पूजा के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा दान भी किया गया। ग्रामीणों ने निर्णय लिया कि प्रत्येक साप्ताहिक मांझी थान पूजा में दान स्वरूप प्राप्त राशि का उपयोग केवल मांझी थान की मरम्मत और अन्य सामाजिक व धार्मिक कार्यों में किया जाएगा। इस राशि का उपयोग हड़िया या अन्य नशे की वस्तुओं पर नहीं किया जाएगा। पूजा के उपरांत सभी श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
इस साप्ताहिक पूजा में राजा मरांडी, पलटन हेम्ब्रम, बुधन हांसदा, सुशील मरांडी, मुन्नू मुर्मू, जीवन टुडु, जय मुर्मू, रायसन मरांडी, परमेश्वर हांसदा, बाबूसोल हांसदा, सुरदेश मरांडी, एलिजाबेद मरांडी, सुकुरमुनि टुडू, चुड़की मुर्मू, हीरामुनि टुडू, मलोती मरांडी, मीरु मुर्मू, सोनोति सोरेन और समाजसेवी सच्चिदानंद सोरेन के साथ बड़ी संख्या में महिला, पुरुष, बुजुर्ग एवं बच्चे उपस्थित थे।