समुदाय के नेतृत्व वाले शासन व स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना जरूरी

समुदाय के साथ रोडमैप बनाने पर ओडिशा के रायगड़ा में मंथन, दो हजार से अधिक प्रतिनिधि हुए शामिल

रायगड़ा (ओडिशा) : ओडिशा के रायगड़ा जिले के बिसम कटक में ग्रामीण चर्चा 2026 एक मज़बूत और एकजुट रायगड़ा़ कॉल टू एक्शन के साथ 24 फरवरी को खत्म हुई। विभिन्न सहयोगी संस्थाओं की साझा पहल के तहत आयोजित यह चर्चा एक समुदाय के नेतृत्व वाला रोडमैप तैयार करने की कवायद थी। इसका मकसद ग्रामीण आजीविका को मज़बूत करना, स्थानीय पारिस्थितिकी की रक्षा करना और ज़मीनी स्तर पर शासन को मज़बूत करना है, जो विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के साथ जुड़ा हुआ था।

तीन दिन के इस आयोजन में सात राज्यों के 2,000 से अधिक आदिवासी नेता, महिलाएं, युवा और ज़मीनी स्तर के कार्यकर्ता शामिल हुए, जो 50 से अधिक संगठनों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन सबकी आवाज़ों और अनुभवों से जो बात सामने आई, वह थी ऊपर से नीचे के तरीकों से लोगों के नेतृत्व वाले समाधानों की ओर एक मज़बूत बदलाव, जिसने समुदायों को अपने विकास के संचालक के तौर पर मज़बूती से स्थापित किया। पैनल, वर्कशॉप और रायगड़ा चैलेंज लैब में हुई बातचीत में खेती, स्थानीय व्यापार और वहनीय संसाधन प्रबंधन के ज़रिए गांव की अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने की तुरंत ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया। लगभग 3,000 गांवों और 1.27 लाख से ज़्यादा घरों से मिली जानकारी ने इस बात को पक्का किया कि आत्मनिर्भर स्थानीय अर्थव्यवस्था को बेहतर ज़मीन के इस्तेमाल, दूसरी फसल उगाने और गांव के लेवल पर वैल्यू एडिशन पर बनाना होगा।

आयोजन में ओडिशा, झारखंड सहित सात राज्यों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

इस चर्चा में शामिल प्रतिभागियों ने सिंचाई की कमी, खेती में बढ़ती परेशानी, बाजार तक सीमित पहुंच, मौसमी पलायन, कमज़ोर होती पारंपरिक रोज़गार और असुरक्षित पीने के पानी जैसी जमीनी हकीकतों के बारे में खुलकर बात की। इसके समाधान के रूप में रायगड़ा चौलेंज लैब सॉल्यूशन के लिए एक जगह बन गई, जहां समुदायिक सौर सिंचाई और जल संरक्षण से लेकर स्थानीय प्रसंस्करण इकाई और मंडियों, मज़बूत मज़दूरी वाले रोज़गार और गांव के बिज़नेस तक आगे बढ़ने के रास्ते बनाने के लिए एक साथ आईं, और आदिवासी बुनाई और वन आधारित आजीविकाओं को पुनर्जीवित करने जैसे व्यावहारिक सुझाव सामने आए।

ग्रामीण चर्चा 2026 में, लोगों ने इस बारे में बात की कि कैसे अर्थव्यवस्था, पारिस्थितिकी और संस्कृति रोज़मर्रा की ज़िंदगी से गहराई से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि कैसे प्राकृतिक खेती, देसी खाना और पारंपरिक ज्ञान समुदायों को मज़बूत, जलवायु अनुकूल आजीविका बना रहे हैं। साथ ही खासकर युवाओं और महिलाओं के लिए बाज़ार और ग्रामीण उद्यमिता के मौके भी बना रहे हैं।

अंतिम दिन खेत व सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए इस भावना को मजबूत किया गया।

आयोजन में प्रतिभागियों ने विभिन्न मुद्दों पर संवाद किया और ग्रामीण आजीविका व स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के विकल्पों पर चर्चा हुई।

रायगड़ा कॉल टू एक्शन में पाँच मुख्य प्राथमिकताएँ बताई गई हैं – आत्मनिर्भर ग्राम अर्थव्यवस्था का निर्माण; सिंचाई, भंडारण और सुरक्षित पेयजल जैसी विकेंद्रीकृत अवसंरचना में निवेश करना; पल्ली सभाओं के ज़रिए समुदाय के नेतृत्व वाले शासन को मज़बूत करना; कौशल और उद्यमिता के ज़रिए युवाओं और महिलाओं के नेतृत्व को बढ़ावा देना; और आर्थिक विकास को पारिस्थितिकी संतुलन के साथ जोड़ना।

ग्रामीण चर्चा 2026 ने इस मज़बूत और बढ़ते विश्वास को और मज़बूत किया कि भारत का भविष्य उसके गाँवों में बनेगा, जिसमें समुदाय न सिर्फ़ हिस्सा लेगा बल्कि सक्रिय रूप से आगे बढेगा। रायगड़ा से आने वाली आवाज़ों और समाधानों में पॉलिसी को प्रभावित करने, प्रोग्राम डिज़ाइन को प्रेरित करने और ज़मीनी स्तर पर नवाचार को बढ़ाने की क्षमता है, जिससे ओडिशा विज़न 2036 और विकसित भारत 2047 की ओर ज़्यादा समावेशी, मज़बूत और टिकाऊ सफ़र का रास्ता बनेगा।

इस ग्रामीण चर्चा का आयोजन ओडिशा श्रमजीवी मंच, महिला श्रमजीवी मंच, नेशनल कंसोर्टियम टू कॉम्बैट मालन्यूट्रिशन द्वारा किया गया और इसे आत्मशक्ति ट्रस्ट, सोक्रेटस, कॉमन ग्राउंड और फाउंडेशन फॉर इकोलॉलिकल सिक्योरिटी का सहयोग मिला।

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