दुमका रेलवे स्टेशन के नाम पट्ट में जुटा संताली भाषा व ओलचिकी लिपि, आदिवासी समाज में हर्ष

दुमका : दुमका रेलवे स्टेशन का नाम नाम पट्ट में संताली भाषा व ओलिचिकी लिपि में दर्ज किया गया है, जिस पर आदिवासी समाज ने प्रसन्नता जतायी है। दुमका स्टेशन का नाम संताली भाषा व ओलचिकी लिपि से भी लिखे जाने पर आदिवासी समाज के संगठनों ने खुशी जतायी है। आदिवासी समाज व उनके संगठनों ने पूर्व में रेलवे के समक्ष इस संबंध में अपनी मांग रखी थी।

अब नाम पट्ट पर संताली भाषा व ओलिचिकी लिपि को जगह मिलने के बाद दो मार्च को आदिवासी सामाजिक संगठनों के समन्वयक प्रतिनिधि मंडल ने दुमका रेलवे स्टेशन प्रबंधक टीपी यादव से मुलाकात कर उनका आभार जताया।

स्टेशन प्रबंधन को धन्यवाद देने पहुंचे आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधि। आदिवासी समाज व संगठन इसे भाषाई व सांस्कृतिक पहचान की लड़ाई को मिली जीत के रूप में देखते हैं।

ज्ञात हो हाल ही में दुमका रेलवे स्टेशन का नामपट्ट हिंदी, अंग्रेज़ी के साथ-साथ संताली भाषा की मूल लिपि ओलचिकी में दर्ज किया गया है। आदिवासी सामाजिक संगठनों के समन्वयक प्रतिनिधि मंडल ने कहा कि यह संताल आदिवासियों के लिए यह बहुत गर्व की बात है कि आज भाषा, लिपि और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हुई है। आज भाषा और लिपि को बढ़ावा के साथ-साथ सम्मान मिला है।

इस अवसर पर समन्वयक प्रतिनिधिमंडल में सुभाष किस्कू, ईमेल मरांडी, राजाधन हेंब्रम, सुनील मरांडी, संजीव टुडू, सोनेलाल मुर्मू, एंथोनी किस्कू, सुनील टुडू, संजय मुर्मू आदि सदस्य उपस्थित थे।

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