पश्चिम बंगाल में वीबी जी राम जी के तहत 1.2% और पुरुलिया में मात्र 1% काम की पेशकश

आधा से अधिक सितंबर गुजर जाने के बावजूद पुरुलिया जिले के 170 में 100 ग्राम पंचायतों में एक भी दिन का रोजगार सृजित नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री के जिले के दौरे से पहले पीबीकेएमएस ने श्रमिकों का मु्ददा उठाया।

पुरुलिया : पश्चिम बंगाल के प्रमुख श्रमिक संगठन पश्चिम बंग खेत मजूर समिति (PBKMS) ने राज्य के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के पुरुलिया दौरे से पहले उनसे ग्रामीण रोजगार से जुड़े सवाल पूछा है। इसके लिए पीबीकेएमएस ने ग्रामीण रोजगार के नए प्रारूप वीबी जी राम जी से जुड़े कई आंकड़े भी रखा है। मालूम हो कि मुख्यमंत्री का 20 सितंबर को पुरुलिया जिले का कार्यक्रम तय है।

पीबीकेएमएस ने पुरुलिया में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को कवर करने वाले पत्रकारों से भी अपील की है कि वे श्रमिक हित में ग्रामीण रोजगार से जुड़े सवाल उनसे पूछें।

पीबीकेएमएस ने कहा है कि वर्ष 2022 से 2026 तक चार सालों तक पश्चिम बंगाल को मनरेगा के कोष से वंचित रखा गया। अब जुलाई 2026 से मार्च 2027 तक नौ महीनों के लिए वीबी-जी राम जी के तहत काम के लिए 14,180 करोड़ रुपये उपलब्ध हैं। इसके बावजूद, राज्य काम उपलब्ध कराने में संघर्ष कर रहा है। वीबी जी राम जी के राज्य पोर्टल पर प्रकाशित आधिकारिक कार्यान्वयन आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में चालू वित्त वर्ष में सभी पंजीकृत परिवानों को केवल 1.2 प्रतिशत और पुरुलिया जिले में मात्र एक प्रतिशत से भी कम काम की पेशकश की गई है।

पीबीकेएमएस ने याद कराया है कि पुरुलिया राज्य के सबसे गरीब जिलों में एक है और यहां से पलायन की दर बहुत अधिक है। इसके बावजूद पुरुलिया में अबतक सबसे कम काम के दिनों का सृजन हुआ है।

पीबीकेएएमएस ने अपने बयान में कहा है कि पुरुलिया जिले में लोग, खासकर महिलाएं रोजगार पाने की आकांक्षी हैं। इसके बावजूद यहां सबसे कम रोजगार सृजन हआ। 18 सितंबर 2026 तक के एमआइएस के आंकड़ों से पता चलता है कि पुरुलिया में केवल 4, 448 परिवारों को काम की पेशकश की गई है। इनमें से 90 प्रतिशत से अधिक को केवल 15 दिनों से कम समय के लिए रोजगार मिला। इसके साथ ही सितंबर का आधा से अधिक महीना गुजर जाने के बावजूद पुरुलिया जिले के 170 पंचायतों में से 100 में इस महीने कोई काम सृजित नहीं हुआ। पीबीकेएमएस ने कहा है कि आवेदन स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं और जॉब कार्ड पेंडिंग है। पीबीकेएमएस ने पाया कि कुछ इलाकों में मजदूरों को काम के लिए आवेदन स्वीकार करवाने और तारीख वाली रसीद पाने में भी मुश्किलों का सामना करना होता है।

मजदूरों को अपने आवेदन स्वीकार करवाने के लिए ब्लॉक और कभी-कभी ज़िला स्तरीय कार्यालयों तक जाना पड़ता है। पीबीकेएएमएस के पास नए जॉब कार्ड, परिवार के सदस्यों को जोड़ने या हटाने और मौजूदा कार्ड में सुधार के लिए भी लगभग 2,000 आवेदन पेंडिंग हैं। पीबीकेएएमएस को मिली कई शिकायतों में, एक या दो साल पहले जमा किए गए आवेदनों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है, और न ही आवेदकों को देरी या रिजेक्शन की वजह लिखित में बताई गई है। 18 सितंबर 2026 तक, MIS में चालू वित्त वर्ष में कार्यक्रम से जुड़े किसी भी नए परिवार का नाम नहीं है।

बेलमा और रघुड़ी गांव का हाल


पीबीकेएमएस ने कहा है कि पुरुलिया – 2 ब्लॉक के बेलमा और रघुड़ी गांवों में मजदूरों ने 14 से 28 जुलाई के बीच काम के लिए आवेदन किया था और उन्हें 31 जुलाई से चार अगस्त तक काम दिया गया था। वहां के मजदूरों का आरोप है कि हालांकि उन्होंने तीन और चार अगस्त को मिट्टी काटने का काम किया था, लेकिन उनके नाम मास्टर रोल में दर्ज नहीं किए गए और उनके काम को ठीक से मापा या रिकार्ड नहीं किया गया।

पीबीकेएमएस की 11 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसारए उन्हें अभी तक अपनी मज़दूरी नहीं मिली है। ऐसी ही समस्या पुंचा ब्लॉक की लखरा ग्राम पंचायत के पाकबिदरा गांव में भी हुई है, जहां मज़दूरों को किए गए काम का भुगतान नहीं किया गया है। पीबीकेएमएस ने उन मजदूरों का रिकॉर्ड रखा है जिन्होंने रोजगार के लिए आवेदन किया था लेकिन उन्हें काम नहीं दिया गया। इसलिए समिति ने प्रशासन से मांग की है कि वे उन सभी मजदूरों की पहचान करें जिन्हें तय समय के भीतर रोज़गार नहीं दिया गया और कानून के अनुसार बेरोज़गारी भत्ता दें।

पीबीकेएमएस ने उठाये ये सवाल

पीबीकेएमएस के पास 832 मज़दूरों की एक शुरुआती लिस्ट थी, जिन्होंने सिर्फ़ तीन ब्लॉक की चुनिंदा ग्राम पंचायतों में काम के लिए आवेदन किया था – पुंचा से 493, हुरा से 195 और पुरुलिया-II से 144। ये आवेदन जून और जुलाई 2026 में अलग-अलग तारीखों पर जमा किए गए थे। पीबीकेएमएस ने यह भी तय किया था कि अगर 21 सितंबर 2026 तक काम नहीं दिया गया, तो वे अनिश्चितकालीन धरना शुरू करेंगे। पीबीकेएमएस के प्रतिनिधिमंडल ने 30 जुलाई और 11 सितंबर 2026 को एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (ज़िला परिषद) और डिस्ट्रिक्ट नोडल ऑफ़िसर से मुलाक़ात की और ये समस्याएं उठाईं। हालांकि, पिछले हफ़्ते काम शुरू करने में काफ़ी सुधार हुआ है। पीबीकेएमएस ने कहा है कि हमारा धरना फ़िलहाल टाल दिया गया है, लेकिन अगर हमारी मांगें पूरी नहीं हुईं तो हम इसे शुरू करने के लिए तैयार हैं। 1. तुरंत पक्का करें कि सभी पंचायतें काम के लिए आवेदन स्वीकार करें और तारीख के साथ पावती रसीदें जारी करें। 2. लंबित जॉब कार्ड/GRGC आवेदनों का निपटारा किया जाए और तुरंत जॉब कार्ड जारी किए जाएं। 3. योग्य आवेदकों को काम दिया जाए। 4. जहां भी बनता हो, बेरोज़गारी भत्ता दिया जाए। 5. जिन मज़दूरों ने काम किया है, उन्हें बिना किसी देरी के तय दर पर उनकी मज़दूरी मिलनी चाहिए। 6. बेरोज़गारी भत्ते और देर से भुगतान के लिए मुआवज़े की गणना की जाए और उसे अपने-आप मज़दूरों के खातों में जमा किया जाए।

पीबीकेएमएस ने राज्य के मुख्यमंत्री से कुछ सवाल पूछे हैं। संगठन ने मीडिया कर्मियों से आग्रह किया है कि वे मुख्यमंत्री से उनके ये सवाल पूछें : 1. भारी मात्रा में फंड उपलब्ध होने के बावजूद, राज्य सरकार को VB-G RAM G के तहत काम पैदा करने में इतनी मुश्किल क्यों हो रही है? 2. मुख्यमंत्री किन बाधाओं की पहचान करते हैं, और सरकार उनसे निपटने की क्या योजना बना रही है? 3. यह देखते हुए कि पुरुलिया में बेरोज़गारी, भुखमरी और मजबूरी में पलायन की समस्या गंभीर है, क्या सरकार इस ज़िले में VB-G RAM G के तहत काम पैदा करने के लिए कोई विशेष उपाय करेगी? 4. बेरोज़गारी भत्ते और मज़दूरी के देर से भुगतान के लिए मुआवज़े का भुगतान राज्य सरकार की ज़िम्मेदारी है। क्या राज्य सरकार ने इसके लिए बजट और सिस्टम तैयार किया है? 5. क्या मज़दूरों के खातों में बेरोज़गारी भत्ते और मज़दूरी के देर से भुगतान के मुआवज़े की अपने-आप गणना करने और जमा करने के उपाय किए जा सकते हैं? 6. क्या ऐसे सिस्टम मौजूद हैं जिनसे उन अधिकारियों की पहचान की जा सके और उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके जो जॉब कार्ड जारी करने, काम देने या मज़दूरी का भुगतान करने में देरी करते हैं?

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