प्रोफेसर अर्नोल्ड डिक्स : मुश्किल और असंभव के बीच भ्रमित मत रहो

नेपाल में भोटेकोशी आपदा में हाइड्रो पॉवर सुरंग में फंसे लोगों के राहत-बचाव में जुड़े मशहूर टनल एक्सपर्ट का सवाल, जब रास्ता मुश्किल हो, नतीजा पता न हो, तब भी क्या हम सही काम करते रहते हैं?

नेपाल में सोशल मीडिया पर प्रोफेसर अर्नोल्ड डिक्स सोमवार, छह सितंबर को चर्चा में रहे। उनके चर्चा में आने की वजह रही, नेपाल में भोटेकोशी आपदा के बाद वहां के हाइड्रो पॉवर टनल ऑपरेशन को ज्वाइन करने के बाद एक सोशल मीडिया पोस्ट शेयर करना। उनके उस टिप्पणी को कई लोगों ने शेयर किया जो उन्होंने सात सितंबर की सुबह साझा की, जिसमें उन्होंने एक पंक्ति लिखी – हमारी पहचान सिर्फ उन लोगों की जान बचाने से नहीं होती जिन्हें हम बचाते हैं, बल्कि उन लोगों से भी होती है जिन्हें हम छोड़ने से इनकार कर देते हैं।

प्रोफेसर अर्नोल्ड के करीब 200 शब्दों की इस टिप्पणी को कई लोगों ने शेयर किया। उन्होंने अपने इस पोस्ट में लिखा –

अभी नेपाल में, हम ऐसी स्थिति का सामना कर रहे हैं जिसका सामना मैंने पहले कभी नहीं किया।

यह सिर्फ एक रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं, बल्कि कई संभावित रेस्क्यू ऑपरेशन एक साथ, अलग-अलग जगहों पर चल रहे हैं। हर एक में अपने-अपने खतरे और अनिश्चितताएँ हैं, और ऐसी जानें हैं जिन्हें अभी भी बचाया जा सकता है।

इसने मुझे सिलक्यारा (उत्तराखंड में स्थित टनल या सुरंग) की याद दिला दी।

वहां, 41 लोग जमीन के नीचे फंसे थे और हमारे सामने एक ऐसा काम था जो नामुमकिन लग रहा था – उन्हें जिंदा वापस लाना।

हमने मिलकर वह परीक्षा पास की।

लेकिन शायद एक बड़ी परीक्षा पास करने का मतलब यह नहीं है कि परीक्षा का दौर खत्म हो गया है।

शायद कभी-कभी इसका मतलब यह होता है कि हमें और भी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा रही है।

पश्चिमी परंपराएं इसे कर्तव्य कह सकती हैं, हम सही काम इसलिए करते हैं क्योंकि यह हमारी जिम्मेदारी है, भले ही सफलता पक्की न हो।

एशियाई परंपरा,ं एक और मज़बूत विचार देती हैं – धर्म। परीक्षा सिर्फ इस बात की नहीं है कि हम सफल होते हैं या नहीं। परीक्षा इस बात की है कि जब रास्ता मुश्किल हो जाए, ज़िम्मेदारियां बढ़ जाएं और नतीजा पता न हो, तब भी क्या हम सही काम करते रहते हैं।

सिलक्यारा ने मुझे सिखाया कि मुश्किल और नामुमकिन के बीच कभी भ्रमित नहीं होना चाहिए।

नेपाल मुझे कुछ और भी सिखा रहा है, जब एक साथ कई जानें हम पर निर्भर हों, तो उम्मीद को अनुशासन में बदलना होगा, दया को काम में बदलना होगा, और कर्तव्य को सफलता की गारंटी पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।

पूरब हो या पश्चिम, सिद्धांत एक जैसा ही लगता है।

हमारी पहचान सिर्फ उन लोगों की जान बचाने से नहीं होती जिन्हें हम बचाते हैं, बल्कि उन लोगों से भी होती है जिन्हें हम छोड़ने से इनकार कर देते हैं।

वर्ष 2023 में उत्तराखंड के सिलक्यारा टनल हादसे के ऑपरेशन में शामिल प्रोफेसर डिक्स।

प्रो अर्नाेल्ड डिक्स भारतीय राहत एवं बचाव दल के साथ नेपाल में ऑपरेशन में शामिल हुए हैं। वे हाइड्रो पॉवर की सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश व सुरक्षित रेस्क्यू करने के ऑपरेशन से जुड़े हैं। वे जिस ऑपरेशन से जुड़े हैं, उसमें अबतक चार लोगों को बचाया जा चुका है।

अर्नोल्ड डिक्स ने वर्ष 2023 में सिलक्यारा टनल से 41 मजदूरों को सुरक्षित बचाने में मदद की थी। उन्होंने विज्ञान व कानून दोनों की पढाई की है। प्रो डिक्स इंजीनियरिंग के एक प्रोफेसर हैं और कई विश्वविद्यालयों में इंजीनियरिंग पढाया है। साथ ही वे बैरिस्टर भी हैं। वे आस्ट्रेलिया के हाइकोर्ट में एक वकील के रूप में रजिस्टर्ड हैं और बार काउंसिल के मेंबर भी। वे अंनेकों राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय समितियों के सदस्य हैं। वे वर्ष 2026 में विक्टोरियन आस्ट्रेलिय आवार्ड के फाइनलिस्ट भी हैं।

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