27.6 लाख से अधिक जैव विविधता प्रबंधन समितियों को कार्यशील और प्रभावी बनाने का केंद्रीय मंत्री ने किया आह्वान
चंडीगढ़ : चंडीगढ़ में छह और सात सितंबर 2026 को राज्य जैव विविधता बोर्ड और केंद्र शासित प्रदेशों के जैव विविधता परिषदों की 16वीं बैठक को पहले दिन संबोधित करते हुए केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारत इस संरक्षण यात्रा में अपनी वैज्ञानिक क्षमता के साथ-साथ पारंपरिक सामुदायिक ज्ञान को भी साथ लेकर चलता है। जैव विविधता अधिनियम, 2002 का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि जैव विविधता (संशोधन) अधिनियम, 2023 और जैव विविधता नियम, 2024 ने जैव विविधता शासन ढांचे को और सुदृढ़ और सुव्यवस्थित बनाया है। उन्होंने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अपने नियमों, संस्थागत तंत्रों और कार्यान्वयन प्रक्रियाओं को संशोधित ढांचे के अनुरूप बनाने का आग्रह किया।
भूपेंद्र यादव ने इस अवसर पर अपने संबोधन में भारत की दीर्घकालिक पर्यावरण संरक्षण की भावना को रेखांकित किया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण से शुरू की गई पहलों जैसे मिशन लाइफ, एक पेड़ मां के नाम, अमृत सरोवर और ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम का उल्लेख किया।
मंत्री ने जैव विविधता पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में भारत की प्रगति की प्रशंसा की, जिसमें जैव विविधता पर सम्मेलन की सातवीं राष्ट्रीय रिपोर्ट और पहुँच एवं लाभ साझाकरण पर नागोया प्रोटोकॉल की पहली राष्ट्रीय रिपोर्ट प्रस्तुत करना शामिल है। जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन पर जोर देते हुए यादव ने 27.6 लाख से अधिक जैव विविधता प्रबंधन समितियों को कार्यशील और प्रभावी बनाने का आह्वान किया।

उन्होंने यह भी कहा कि जन जैव विविधता रजिस्टरों को स्थानीय निकायों के लिए गतिशील नियोजन उपकरणों के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, जिससे स्थानीय जैव विविधता और संबंधित पारंपरिक ज्ञान की जानकारी स्थानीय नियोजन और सतत विकास में योगदान दे सके।
पहुंच और लाभ साझाकरण पर मंत्री केंद्रीय मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने एबीएस निधि के 200 करोड़ रुपये से अधिक किसानों, स्थानीय समुदायों, जैव विविधता प्रबंधन समितियों, राज्य जैव विविधता बोर्डों ,केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों और अनुसंधान संस्थानों के साथ साझा किए हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एबीएस को संरक्षण और सतत आजीविका में योगदान देते हुए समुदायों को ठोस लाभ पहुंचाना चाहिए।
जैव विविधता और जलवायु परिवर्तन के बीच संबंधों पर प्रकाश डालते हुए भूपेंद्र यादव ने बताया कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल के अनुरूप निर्णायक कदम उठाए हैं, साथ ही संपूर्ण सरकारी और संपूर्ण सामाजिक दृष्टिकोण का पालन किया है। उन्होंने भारत की अद्यतन राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्य योजना एनबीएसएपी – 2024-2030 के बारे में बात की, जो कुनमिंग.मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचा केएमजीबीएफ के अनुरूप है। उन्होंने पारिस्थितिकी तंत्र बहाली, प्रजातियों और पर्यावास संरक्षण, कृषि जैव विविधता और जलवायु.लचीले परिदृश्यों में मापने योग्य परिणामों का आह्वान किया। उन्होंने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वैश्विक 30-बाय-30 संरक्षण लक्ष्य में योगदान देने के लिए भागीदार बनने के लिए भी प्रोत्साहित किया।