चाय बागान श्रमिकों के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की मध्यस्थता में बातचीत को सरकार हुई तैयार

पश्चिम बंग चा मजूर समिति ने अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन में पश्चिम बंगाल के चाय मजदूरों के मुद्दे को उठाया था। पीबीसीएमएस ने श्रमिकों पर झूठे आपराधिक मामले, काम से उनका निलंबन, धमकियां देना, शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई और उन्हें सरकारी परमर्शाें से उन्हें बाहर रखे जाने का जिक्र करते हुए हस्तक्षेप की मांग की थी।

कोलकाता : आखिरकार उत्तर बंगाल के डुअर्स इलाके के चाय श्रमिकों का लंबे समय से आंदोलन रंग लाया। गैर राजनीतिक चाय श्रमिक संगठन पश्चिम बंग चा मजूर समिति को भारत सरकार व राज्य सरकार की ओर से चाय श्रमिकों के मुद्दे पर बातचीत व सुलह के लिए न्यौता मिला। यह बातचीत अंतरराष्ट्रीय श्रमिक संगठन में संगठन की धारा 24 के तहत दर्ज करायी गयी शिकायत के आधार पर होगी और इसके लिए एक अक्टूबर 2026 की तारीख तय की गई है।

पश्चिम बंग चा मजूर संगठन (PBCMS) ने अपने एक प्रेस बयान में कहा गया है कि यह भारत सरकार की ओर से आइएलओ में उसके द्वारा दर्ज करायी गयी शिकायत पर प्रतिक्रिया थी। अंतरराष्ट्रीय मजदूर संगठन के समक्ष पीबीसीएमएस द्वारा दायर शिकायत में गंभीर उल्लंघनों का मुद्दा उठाया गया है।

पीबीसीएमएस ने शिकायत की है कि उत्तर बंगाल में चाय बागान मज़दूरों को अदालत के आदेशों और कानूनी सुरक्षा के बावजूद लंबे समय से वेतन, ग्रेच्युटी और प्रोविडेंट फंड का बकाया नहीं मिल रहा है। मजदूरों को अपर्याप्त वेतन मिलता है और कोई ठीक से तय न्यूनतम वेतन नहीं है, जबकि महिला और आदिवासी मजदूरों को लिंग, जाति और काम से जुड़े भेदभाव का सामना करना पड़ता है। चाय बागान की जमीन पर रहने के बावजूद मजदूरों की पीढ़ियाँ भूमिहीन बनी हुई हैं, जबकि नीतियां पर्यटन और व्यावसायिक परियोजनाओं के लिए उन्हें विस्थापित होना होता है।

पीबीसीएमएस ने श्रम निरीक्षण के कमजोर होने और प्रभावी ढंग से नियम लागू नहीं हो पाने का भी उल्लेख किया है। संगठन ने श्रमिक यूनियन विरोधी दमन का भी आरोप लगाया है, जिसमें श्रमिकों पर झूठे आपराधिक मामले, काम से उनका निलंबन, धमकियां देना, शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई और उन्हें सरकारी परमर्शाें से बाहर रखना शामिल है।

पीबीसीएमएस ने अपने बयान में कहा है कि सुलह के लिए सरकार की सहमति, चाय बागान मजदूरों के उस लगातार संघर्ष से बनी एक महत्वपूर्ण शुरुआत है, जिसका मकसद शोषण के उस सिस्टम का सामना करना है जो बागान उद्योग को बनाए रखता है और चाय बागानों की चाहरदीवारी से परे जवाबदेही तय करना है। संगठन ने कहा है कि हम किसी ऐसे समझौते में विश्वास नहीं करता जो मजदूरों को शोषण की उन्हीं स्थितियों में छोड़ दे।

हालांकि संगठन इस प्रक्रिया में श्रमिकों के सम्मान, उचित वेतन, सामाजिक सुरक्षा, शोषण से मुक्ति और चाय मजदूरों के पूरे अधिकार हासिल करने के स्पष्ट उद्देश्य के साथ शामिल होगा। अगर सुलह की कोशिश नाकाम रहती है, तो उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय श्रमिक संगठन की गवर्निंग बॉडी नवंबर 2026 में इस शिकायत पर विचार करेगी।

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