पश्चिम बंगाल में ग्रामीण रोजगार गारंटी के लिए 29,752 करोड़ के आवंटन की मांग

पश्चिम बंगाल के बजट से पहले पश्चिम बंग खेत मजूर समिति पीबीकेएमएस ने राज्य के वित्त मंत्री के सामने रखी ग्रामीण रोजगार गारंटी से संबंधित मांगें

कोलकाता: चुनावी वर्ष होने की वजह से पश्चिम बंगाल की नई सरकार अब राज्य का बजट पेश करने की तैयारी में है। इसको लेकर राज्य के वित्त मंत्री स्वप्न दासगुप्ता ने आमलोगों से पश्चिम बंगाल के वर्ष 2026-27 के बजट के लिए सुझाव आमंत्रित किया था। इसके मद्देनजर पश्चिम बंगाल खेत मजूर समिति ने एक पत्र लिख कर राज्य के मनरेगा मजूदरों, जिसका परिवर्तित नाम वीबी-जीरामजी है, के मुद्दों को उठाया है और उनके लिए पर्याप्त आवंटन की मांग रखी है।

पश्चिम बंग खेत मजूर समिति की राज्य समिति सदस्य अनुराधा तलवार व स्वपन गांगुली की ओर से लिखे गए इस पत्र में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में ग्रामीण रोजगार के 125 दिनों के लिए 29,752 करोड़ रुपये की जरूरत है। उन्होंने मांग की है कि वर्ष 2026-27 के लिए राज्य के बजट में वीबी-जीरामजी के लिए पूरी तरह से पारदर्शी बजटीय प्रावधान किया जाए।

पत्र में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल के लिए प्रस्तावित केंद्रीय हिस्सा 8,508 करोड़ रुपये है और 60ः40 के हिस्सेदारी पैटर्न के तहत राज्य को अपने अनिवार्य हिस्से के रूप में 5,672 करोड़ रुपये आवंटित करने होंगे। लेकिन, यह यह कुल आवंटन प्रति सक्रिय जॉब कार्ड को केवल 60 दिनों का रोजगार दे पाएगा, जो 125 दिन के रोजगार के कानूनी गारंटी से बहुत कम है।

राज्य में पूरे 125 दिनों का रोजगार देने और कम से कम 330 रुपये का मेहनताना जो न्यूनतम कृषि मजदूरी के बराबर है, के लिए 15,572 करोड़ रुपये और मजदूरी बढाने के लिए 6,647 करोड़ रुपये की जरूरत होगी।

पत्र में कहा गया है कि हमने बेरोजगारी भत्ते और वेतन भुगतान में देरी के लिए मुआवजे के लिए भी अलग से बजट प्रावधान की मांग की है जो राज्य सरकार की कानूनी जिम्मेवारियां हैं। पश्चिम बंगाल में मजबूरन पलायन के बड़े पैमाने पर पहुंचने के साथ, श्रमिकों और ग्रामीण परिवारों की सुरक्षा के लिए ग्रामीण रोजगार पैदा करना सबसे जरूरी कदम है।

पश्चिम बंग खेत मजूर समिति ने सरकार से पत्र में कहा है कि अगर राज्य सरकार कानूनी रूप से जरूरी ग्रामीण रोजगार पैदा करने के लिए आवश्यक धनराशि उपलब्ध नहीं करा सकती है तो उसे पारदर्शी रूप से यह बताना चाहिए कि उसने वास्तव में कितने दिनों के काम के लिए बजट बनाया है। यह कहा गया है कि 125 दिनों के गारंटीकृत ग्रामीण रोजगार की बातों से जनता को गुमराह न करें।

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