दुमका: झारखंड के दुमका जिले के हिजला गांव में लगने वाला राजकीय जनजातीय हिजला मेला 13 फरवरी से शुरू हो रहा है, जो 20 फरवरी चल चलेगा। मेले की तैयारी से पूर्व मेला परिसर के आसपास लगाए गए बैनर, बोर्ड व छपवाये गए कार्ड को लेकर लोगों में नाराजगी है। साथ ही प्रस्तुति देने वाले कला दल के सदस्य कम मेहनाता दिए जाने से नाराज हैं।
हिजला मेले को लेकर छपवाये गए कार्ड में मरांग बुरू शब्द का प्रयोग नहीं किया है, जो परिसर के मुख्य द्वारा की तसवीर पर दिखना चाहिए। इसको लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सच्चिदानंद सोरेन ने नाराजगी जताते हुए मेला समिति से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने दुमका के अनुमंडल पदाधिकारी को अपने इस्तीफा भेजा है।

आमंत्रण पत्र के इस लिफाफे पर मरांग बुरू नहीं लिखा हुआ है, मरांग बुरू संतालों के ईष्ट देवता है, जिनकी वे पूजा करते हैं।
सच्चिदानंद सोरेन ने कहा, मेला स्थल पर लगाए गए होर्डिंग में संताली भाषा व ओलचिकी लिपि का प्रयोग नहीं किया गया है। अच्छा होता कि हिंदी-देवनागरी के साथ संताली-ओलचिकी का भी प्रयोग होता, इससे संताली भाषा-संस्कृति को और मजबूती मिलती।
आदिवासी कला, नृत्य व संस्कृति को प्रस्तुत करने वाले कला दल को कम पारिश्रमिक दिया जा रहा है, जिससे उनमें नाराजगी है।
उन्होंने यह उम्मीद जतायी है कि मेला अभी शुरू ही हो रहा है और हो सकता है कि सरकार व प्रशासन इसमें संशोधन करे।
वर्ष 2025 में कला की प्रस्तुति देने वाले कलाकारों को इस साल भुगतान दिया जा रहा है, कहा जा रहा है कि वह भी कम है। इसको लेकर एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष अपनी शिकायत रखी है। लोगों ने दुमका के एसडीओ के समक्ष भी अपनी बातें रखी हैं।