पटना : कोशी पीड़ितों की गृहक्षति सहित अन्य क्षतिपूर्ति दिलाने, कोशी तटबंध के भीतर के लोगों के पुनर्वास के सवाल पर कोशी नव निर्माण मंच द्वारा पटना के गांधी संग्रहालय में 25 मार्च 2025 को जनसुनवाई का आयोजन किया गया ।
मुख्य अतिथि के रूप में जनसुनवाई को संबोधित करते हुए पटना उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश जस्टिस अरुण कुमार ने कहा कि कोशी पीड़ितों की बातों से स्पष्ट हो रहा है कि इनके लिए आपदा और कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में गैप है जिसे दूर करना चाहिए।
बिहार राज्य आपदा प्राधिकरण के पूर्व उपाध्यक्ष और अवकाश प्राप्त वरिष्ठ IAS पदाधिकारी व्यास जी ने कहा कि लोगों की बातें सुनने से दो बातें समझ में आई है पहली तात्कालिक आपदा विभाग के बाढ़ पर बने SOP व मानदर को कोशी पीड़ितों को दिया जाए। दूसरा दीर्घकालिक मांग है जिसमें पुनर्वास देना और कोशी पीड़ित विकास प्राधिकार को सक्रिय करना है। उन्होंने आयोजकों को सलाह दी कि आपदा की योजनाओं की तैयारियों व क्रियान्वयन में जन भागीदारी कर धरातल पर उतारने में मदद करें।
प्रो पुष्पेंद्र ने कहा कि यह बहुत दुखद बात है कि कोशी के पीड़ितों को आज पटना में आकर अपनी विपदा की कहानी कहनी पड़ रही है। राहत पुनर्वास को सरकार को जल्द पूरा करना चाहिए। वहीं लोगों को सरकार नहीं सुनती है तो संगठन को मजबूत कर राजनैतिक मुद्दा के रूप में स्थापित करना होगा।

जनसुवाई में संबोधित करते अतिथि।
प्रो मधुबाला ने कहा कि राज्य के आपदा विभाग और प्राधिकरण मुख्यमंत्री के नारे पर चलती है कि सरकारी खजाने पर आपदा पीड़ितों का पहला अधिकार है पर आज कोशी पीड़ित लोगों की बातों को सुनने से लगता है कथनी और कहनी में अंतर है उसे अविलंब क्रियान्वयन करना चाहिए।
जन सुनवाई में आपदा प्रबंधन विभाग के अपर मुख्य सचिव और जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव को भी आमंत्रित किया गया था पर न वे आये और न उनकी तरफ से कोई प्रतिनिधि ही आया।
पीड़ितों ने क्या कहा?
सुपौल जिले के किशनपुर प्रखंड की बेला की रेखा देवी ने भूखे प्यासे बाढ़ में बिताए दिनों को याद करते हुए कहा कि बच्चों को छप्पर पर किसी तरह बैठाकर जान बचाए। उस पर भी सांप आ गया तो किसी तरह हटा कर छोटी नाव पर जान बचाई। हमलोगों को पुनर्वास नहीं मिला है सरकार पुनर्वास दे। उन्होंने अपने गांव में सांप के डसने के बाद छोटी नाव में बैठाकर नदी पार करते समय बच्चे की हुई मौत की दर्दनाक कहानी बताई।
सुपौल अंचल के बलवा गांव के डुमरिया गांव की प्रमिला देवी ने कहा कि मेरा घर नदी में समा गया आज तक गृह क्षति भी नहीं मिली है दूसरे आदमी ने अपने घर में शरण दिया पर उनका घर भी छोटा था तो अंत में वहां से बांध पर आकर पल्ली डालकर रह रहे हैं। धूल और धूप से बच्चे बीमार हो रहे हैं। बाढ़ के समय ससुर बीमार थे दवा का उचित प्रबंध नहीं होने से उनकी मौत हो गई। सासू अंधी हो गई हैं तीन बच्चे हैं, इन सभी के इलाज में एक लाख का कर्ज हो गया इधर-उधर मजदूरी करके घर चला रहे हैं, जब किसी को अपना घर बुहारते देखते हैं तो मन में टीस उठती है कि मेरा घर भी होता तो मै भी बुहारती। मेरे जिंदगी की एक ही तमन्ना है कि पुनर्वास मिले जहां मेरा अपना झोपडी भी बना लूं । मजदूरी करके अपना गुजर कर लेंगे।

जनसुवनवाई में उपस्थित प्रभावित लोग व अन्य।
संतोष मुखिया और आलोक राय ने नाव की अनुपलब्धता, बाढ़ में हुई पीड़ा और पुनर्वास में दबंगों के अवैध कब्जे की बात कहते हुए कहा कि इसके अभाव में हमलोगों का गांव आज यहां है दूसरे साल कहीं और जाकर बसना पड़ता है। चन्द्रबीर नारायण यादव ने दरभंगा जिले के भूभौल के पीड़ितों को टूटे घरों को क्षति नहीं मिलने सहित वहां के नदी के सवाल को उठाया। कोशी महा सेतु के प्रभाव पर एडवोकेट अजीत मिश्रा ने बात रखी।
दयारानी देवी ने बाढ़ में बारे में बताते हुए कहा कि मेरे घर का बच्चा जब चौकी पर पानी आ गया तो छप्पर पर रखा उसके कुछ लाने गई तबतक बच्चा गिरकर पानी में बहने लगा। यह देखकर चिल्लाई और पानी में भागकर बचाई दो घंटे बाद उसको होश आया कुछ नहीं मिला है यदि पुनर्वास मिल जाता तो यह भोगना नहीं पड़ता।
राजेन्द्र यादव ने आपबीती बताते हुए कहा कि नाव डूबने की खबर आने के बाद पानी में घर वाले जीवित हैं कि नहीं यह जानकारी नहीं मिली। वे अपनी पीड़ा का वर्णन करते हुए फफक उठे और बोले कि दो दिन बाद उनके परिजनों के जीवित होने की जानकारी मिली।
फूल कुमारी, अरणी देवी, बादामी देवी, प्रियंका, रेखना देवी, प्रदीप राम, सदरुल, अरविंद मेहता, बिजेंद्र सदा, शिव शंकर मंडल, चंद्र मोहन, भागवत पंडित इत्यादि ने अपने दुःख भरी दास्तान बताई । संचालन महेंद्र यादव और इंद्र नारायण ने संयुक्त रूप से किया विषय प्रवेश संदीप ने किया।वहीं, बाढ़ पीड़ितों की स्थिति के अध्ययन की जानकारी शोधार्थी आरिफ ने रखी। धन्यवाद ज्ञापन धर्मेन्द्र ने किया।
जनसुनवाई में पटना विश्वविद्यालय की भूगोल की प्राध्यापक प्रो देबरानी, सामाजिक कार्यकर्ता कुणाल किशोर, इंदिरा रमण उपाध्याय, डॉ रिंकी, किरणदेव, जवाहर निराला, गांधीवादी रमन, अमर, सदानंद, चंदन मंडल इत्यादि ने पीड़ित लोगों के साथ एकजुटता व्यक्त किया।