आज यानी 22 अप्रैल 2026 को पृथ्वी दिवस है। इस मौके पर जानिए समुद्री जीवन पर बढता संकट कैसे हम सबके लिए परेशानी की वजह बनता जा रहा है…
रजत मुखर्जी का आलेख
आज विश्व उष्णायन से सभी प्रभावित हैं – मानव, पशु,-पक्षी, पेड़-पौधे। मनुष्य इससे निबटने की तैयारी में लगा है, लेकिन अन्य प्राणियों का क्या होगा यह एक जटिल प्रश्न है। जीवन का स्रोत सागर विश्व उष्णायन के कारण विनाश की राह पर चल रहा है। वैज्ञानिक इस विनाशलीला पर ब्रेक लगाने की कोशिश कर रहे हैं और वे चिंतित हैं कि मौसम में इस बदलाव का समुद्र के नीचे के जीवन पर क्या असर होता है? खासकर कार्बन डाइ ऑक्साइड समुद्री जीवन को कैसे प्रभावित कर रहा है।
वैज्ञानिकों ने पाया है कि पानी में कार्बन डाइ ऑक्साइड मिला देने से उसका पीएच वैल्यू गिर जाता है और समुद्र का पानी अम्लीय हो जाता है। इसका असर समुद्री जनजीवन पर साफ दिखाई दे रहा है। अपने प्रयोगों में वैज्ञानिकों ने पाया है कि अम्लीय पानी में सीप का आकार छोटा हो जाता है। सीप, अल्गी और वैक्टीरिया समुद्र के संवेदनशील जीवों में शामिल हैं। इनमें से एक भी कारक बदलता है तो चेन रिएक्शन शुरू हो जाता है जो फिर सबको प्रभावित करेगा।
समुद्र विज्ञानी यह पता कर रहे हैं कि पूर्वी सागर में कैसी परिस्थितियां हो सकती हैं। यदि समुद्र में जीवन खत्म हो जाएगा तो उसका असर दुनिया के पोषण पर पड़ेगा। समुद्र विज्ञानी प्रो मार्टिन वाल कहते हैं समुद्र की हालत खराब हो सकती है। वह कम ऑक्सीजन वाला बदबूदार शोरबा बन सकता है। उम्मीद करें कि यह संतुलन लंबे समय तक बना रहे।

बंगाल की खाड़ी का एक दृश्य जो जलवायु परिवर्तन जनित कई चुनौतियों का सामना कर रही है।
सवाल यह है कि समुद्री पानी के अम्लीकरण का पौधों पर क्या असर होता है? यह समुद्री घास के साथ जांच से पता चला है कि यदि पीएच अत्यंत कम हो जाता है तो प्रतिरोधी तत्वों का उत्पादन रूक जाता है। इससे समुद्री दीमक जैसे दुश्मनों के लिए घास स्वादिष्ट आहार बन जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जीवों की ऐसी प्रजातियां, जो सिर्फ समुद्र में पायी जाती है और उनमें एक भी प्रजाति प्रभावित होती है तो पूरा जीवन प्रभावित होगा। अत्यंत छोटे जीव भी परिवर्तन पर प्रतिक्रिया दिखाते हैं। रिसर्चर इस बात को जानने की कोशिश में लगे हैं कि कौन जीव विभिन्न परिस्थितियों में कितना तेजी से बदलता है?
ग्लोबल वार्मिंग बढने पर उन जीवों पर क्या असर होगा? प्रोफेसर मार्टिन कहते हैं, यदि हम कार्बन डाइ ऑक्साइड का उत्सर्जन जारी रखते हैं और हम यही कर रहे हैं तो निश्चित तौर पर समुद्र का अम्लीकरण बढेगा, ग्लोबल वार्मिंग बढेगी। फिर दबाव डालने वाले दूसरे कारक भी बढेंगे। हम सिर्फ उम्मीद कर सकते हैं यह इतनी धीमी गति से हो कि जीव अपने को उसके अनुरूप ढाल सकें।
(रजत मुखर्जी पर्यावरण प्रेमी व पर्यावरण चित्रकार हैं। वे झारखंड के देवघर में रहते हैं।)