कोलकाता: कलकत्ता हाइकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में केंद्र सरकार को एक अगस्त 2025 से पश्चिम बंगाल में मनरेगा के तहत फिर से काम शुरू करने को कहा है। कलकत्ता हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगनम और न्यायमूर्ति चैताली चटर्जी की खंडपीठ ने 18 जून 2025 को ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार गारंटी देने वाले मनरेगा में मजदूरों की मजदूरी के भुगतान को रोके जाने व काम के बंद होने से संबंधित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया।
योजना के फिर से क्रियान्वयन का निर्देश देते हुए मुख्य न्यायाधीश ने मौखिक टिप्पणी की कि ये सभी आरोप 2022 से पहले के हैं, आप जो चाहें करें लेकिन योजना को फिर से शुरू करें। केंद्र सरकार की ओर से मनरेगा के कोष में अनियमितता का तर्क दिया गया था। इस मामले में खंडपीठ ने कहा कि इसके आधार पर कार्रवाई शुरू की गई और राशि को वसूल का एक खाते में रखा गया है।
पश्चिम बंगाल का मजदूर संगठन पश्चिम बंग खेत मजूर समिति (PBKMS) इस मामले पर लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहा था। पश्चिम बंगाल खेत मजूर समिति (पीबीकेएमएस) की ओर से इस मामले के अदालत में अधिवक्ता पुर्वायन चक्रवर्ती और कुंतल बनर्जी हैं। पश्चिम बंग खेत मजूर समिति ने इस संबंध में अदालत में याचिका दायर की थी, जिसका केस नंबर : WPA(P)/237/2023 है। पश्चिम बंगाल में वर्ष 2022 के शुरू से मनरेगा को केंद्र सरकार ने भ्रष्टाचार के आरोपों का हवाला देते हुए मनरेगा एक्ट की धारा 27 का प्रयोग करते हुए रोक दिया था और इसके लिए राज्य को पैसों का आवंटन बंद कर दिया था।
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