अमरनाथ झा एक जनसरोकारी पत्रकार थे और वे नदी और पानी से जुड़े मुद्दों पर विशेष रूप से सक्रिय रहते थे। इससे जुड़े जन आंदोलन व आयोजन में उनकी उपस्थिति महत्वपूर्ण होती थी।
पटना: जनसरोकार से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार व नदी प्रेमी अमरनाथ झा का बुधवार, 17 जून 2026 की रात को पटना में ब्रेन हेमरेज से निधन हो गया। 18 जून को पटना के दीघा घाट पर उनका दाह संस्कार किया गया। उनके निधन पर बिहार-बंगाल-झारखंड व अन्य क्षेत्रों में उनके जानने वालों व प्रशंसकों ने दुःख प्रकट किया है।
कोशी नवनिर्माण मंच के संस्थापक महेंद्र यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा – वरिष्ठ पत्रकार, नदी पानी समाज को समर्पित अमरनाथ झा जी का विगत रात 10 बजे निधन हो गया…अमरनाथ झा जी का असमय निधन सामाजिक जगत के लिए अपूर्णीय क्षति है। अश्रुपूरित विनम्र श्रद्धांजलि। परिजनों को दुःख सहने की शक्ति मिले, इसकी कामना करता हूं।
नदी बचाओ, जीवन बचाओ आंदोलन के संयोजक व पश्चिम बंगाल के प्रमुख नदी अधिकार कार्यकर्ता तापस दास ने उनके निधन पर शोक प्रकट करते हुए लिखा – प्रख्यात पत्रकार, विभिन्न आंदोलन के साथी, नदी पर्यावरण के प्रति संवेदनशील और नदी बचाओ, जीवन बचाओ आंदोलन के लंबे समय से साथी अमरनाथ झा ने कल रात अंतिम सांस ली। गहरी संवेदना…।
बिहार के पत्रकार पुष्यमित्र ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा – अमरनाथ जी से अक्सर मुलाकात और बातें होती थीं। नदी और पर्यावरण पर उनका काफी काम था। रंजीव जी और अमरनाथ जी जोड़ीदार की तरह पटना में दिखते, अब दोनों नहीं रहे। पटना की पत्रकार सीटू तिवारी ने लिखा – अमरनाथ जी अचानक चले गए…बीते दिनों रणजी (रंजीव जी) भाई गए तो बहुत बेचैन थे अमरनाथ जी। रणजी भाई का भी पानी पर बहुत अच्छा काम था। हमने कुछ सालों में ऐसे लोगों को खोया, जिनका पानी पर बहुत अच्छा काम था अैर समझ भी पानी जैसी साफ थी।
बिहार-झारखंड में सामाजिक व पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाले मुन्ना झा ने लिखा – अमरनाथ भाई चले गए। पटना में जब तक रहा, उनसे मुलाकात हर रोज हो ही जाती थी। पड़ोसी होने का रिश्ता था, लेकिन सच कहूं तो रिश्ता सिर्फ पड़ोस का नहीं था। पानी, नदी, समाज और गांव-देहात की बातों के बीच एक आत्मीयता बन गई थी…उनके जाने से सिर्फ एक व्यक्ति नहीं गया, एक आवाज चली गई। एक अपनापन चला गया है, रोजमर्रा की जिंदगी का एक हिस्सा चला गया है।
भाकपा (माले) ने भी अमरनाथ झा के निधन पर शोक व्यक्त किया है। संगठन ने कहा, अमरनाथ झा ने अपना पूरा जीवन पत्रकारिता को जनसरोकारों से जोड़ने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए समर्पित किया। उत्तर बिहार के गांवों में नदी, बाढ़, विस्थापन और आम जनता के जीवन से जुड़े सवालों पर उनका काम पत्रकारिता की जनपक्षधर परंपरा का महत्वपूर्ण उदाहरण है।