निजी आर्थिक लाभ वाले वृक्षारोपण के प्रति किसानों का आकर्षण ज्यादा: अध्ययन

बेंगलुरु: एक नए अध्ययन से पता चलता है कि किसान वृक्षारोपण अभियान में उन तरीकों को प्राथमिकता देते हैं, जिससे निजी लाभ हासिल होने की संभावना अधिक होती है। जैसे खेतों की मेड़ या सीमा पर इमारती लकड़ी के पेड़ लगाना। इससे उलट अधिक जैव विविधता और कार्बन लाभ प्रदान करने वाले वृक्षरोपण अभियान के प्रति उनका आकर्षण कम होता है और ऐसे में उसे प्रोत्साहित करने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन की जरूरत होती है।

बेंगलुरु स्थित संस्था सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ स्टडीज की प्रमुख कृति के करंथ व अन्य के द्वारा किया इस संबंध में किया गया अध्ययन “Guiding private afforestation to raise public goods provision: Understanding farmers’ multi-dimensional preferences for trees in India” चार अप्रैल 2026 को इकोलॉजिकल इकोनॉमिक्स में प्रकाशित हुआ।

यह अध्ययन डॉ डैनी टोबिन, डॉ अलेक्जेंडर फाफ और जेफ्री आर. वन्सेंट एवं अनुभव वनमामलाई व डॉ कृति के करंथ द्वारा लिखा गया है। यह शोध कर्नाटक में छोटे जोत वाले किसानों द्वारा अपनी भूमि पर पेड़ लगाने के संबंध में लिए गए निर्णयों की पड़ताल करता है। अध्ययन कर्नाटक में वन्य अभ्यारण्यों के पास रहने वाले किसानों पर आधारित है।

अध्ययन के प्रमुख लेखक डॉ डैनी टोबिन कहते हैं, यह अध्ययन दर्शाता है कि निजी भूमि पर पेड़ लगाने की पहलें, जिन्हें नागरिक समाज और सार्वजनिक संस्थाएं आगे बढ़ाती हैं, भूमि धारकों, जैसे किसानों के साथ संवाद स्थापित करके अपने डिज़ाइन में सुधार कर सकती हैं। प्राथमिकताओं की बेहतर समझ कार्यक्रम को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक बेहतर ढंग से संबोधित कर सकती है। प्रमुख समूहों को लक्षित करना और प्रत्येक किसान को यह चुनने की अनुमति देना कि कि वे क्या और कहां लगाना चाहते हैं, जैव विविधता अनुकूल विकल्पकों को अपनाने को बढा सकते हैं। साथ ही सार्वजनिक लाभ प्रदान करने के लिए किसानों को मुआवजा देने का कार्यक्रम लागत को कम कर सकता है।

अध्ययन के अनुसार, प्राथमिकताओं की बेहतर समझ कार्यक्रम को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक प्रभावी ढंग से संबोधित कर सकती है।

यह अध्ययन वनीकरण पहलों के सामने एक प्रमुख चुनौती को रेखांकित करता है – सार्वजनिक पर्यावरणीय लक्ष्यों और किसानों द्वारा सामना की जाने वाली आर्थिक वास्तविकताओं के बीच संतुलन स्थापित करना। वैज्ञानिकों ने पाया कि पारिस्थितिकी रूप से लाभकारी वृक्षारोपण तरीकों को अपनाने में किसानों की इच्छा में व्यापक भिन्नता है। जहां कुछ किसानों को पर्याप्त मुआवजे की आवश्यकता होती है, वहीं अन्य कम या बिना किसी वित्तीय मदद के भी ऐसे तरीकों को अपनाने के लिए तैयार होते हैं। यह भिन्नता एक अवसर प्रदान करती है। किसानों की विशेषताओं के आधार पर प्रोत्साहनों के अनुकूलित करके या किसानों को चयन के लिए वृक्षारोपण के भिन्न विकल्प प्रदान करके कार्यक्रम की भागीदारी को बढाया जा सकता है या लागत को कम किया जा सकता है।

इस अध्ययन की सह लेकिखा डॉ कृति के करंथ कहती हैं, वृक्षारोपण कार्यक्रमों में व्यापक विस्तार को सफल बनाने के लिए जरूरी है कि इन्हें किसानों के साथ परामर्श और कठोर मूल्यांकन व निगरानी के साथ लागू किया जाए। हमारा अध्ययन ऐसी रूपरेखाएं प्रस्तुत करता है, जिनके माध्यम से स्थानीय किसानों की सक्रिय भागीदारी को आरंभ से लेकर क्रियान्वयन तक सुनिश्चित किया जा सकता है।

यह शोध सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ स्टडीज के वाइल्ड कार्बन कार्यक्रमों के अनुभवों व प्रथाओं पर भी आधारित है जो जैव विविधता से समृद्ध परिदृश्यों में छोटे जोत वाले किसानों से मिल कर वृक्षारोपण को बढावा देता है।

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