मध्य पूर्व संकट से अमेरिकी एलएनजी कंपनियों की कमाई कैसे बढ़ रही है?

मध्य पूर्व के संकट से अमेरिकी एलएनजी निर्यातकों का मुनाफा बढ गया है। एक विश्लेषण के अनुसार, इससे अमेरिकी एलएनजी निर्यातकों को प्रति सप्ताह 870 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त मार्जिन मिल सकता है। संकट जितना लंबा चलेगा, उनकी कमाई उतनी बढेगी।

दुनिया में युद्ध सिर्फ़ मोर्चों पर नहीं लड़ा जाता ।कई बार उसका सबसे गहरा असर उन बाज़ारों में दिखाई देता है जहाँ ऊर्जा का कारोबार होता है।

मध्य पूर्व में हालिया संघर्ष ने यही दिखाया है। मिसाइलें गिर रही हैं। समुद्री रास्ते बंद हो रहे हैं और इसी बीच वैश्विक गैस बाज़ार अचानक उछल गए हैं।

एक नई विश्लेषण रिपोर्ट के अनुसार, इस उथल-पुथल का सबसे बड़ा आर्थिक फायदा अमेरिकी एलएनजी निर्यातकों को मिल सकता है।

ऊर्जा बाज़ार प्लेटफ़ॉर्म EnergyFlux.news की रिपोर्ट, जिसे ऊर्जा विश्लेषक Seb Kennedy ने तैयार किया है, बताती है कि मौजूदा संकट अमेरिकी गैस कंपनियों के लिए अरबों डॉलर का “विंडफॉल प्रॉफिट” पैदा कर सकता है।

अगर मौजूदा हालात कुछ महीनों तक बने रहते हैं, तो यह मुनाफ़ा ऊर्जा इतिहास के सबसे बड़े अचानक लाभों में शामिल हो सकता है।

संकट की शुरुआत कहाँ से हुई?

इस कहानी की शुरुआत एक बहुत छोटे लेकिन बेहद अहम समुद्री रास्ते से होती है।

इस तसवीर में होर्मुज़ का चोकपॉइंट दिखाया गया है, जो मात्र दो मील चौड़ी है, लेकिन इससे होकर दुनिया का 20 प्रतिशत कच्चा तेल और तरलीकृत पदार्थ का परिवहन होता है।
Photo Credit – https://www.eqwires.com/

Strait of Hormuz.
यह वही समुद्री गलियारा है जिसके ज़रिए मध्य पूर्व का बड़ा हिस्सा तेल और गैस दुनिया तक पहुँचाता है। दुनिया के सबसे व्यस्त ऊर्जा व्यापार मार्गों में से एक, मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के दौरान यह रास्ता लगभग ठप हो गया। कई बीमा कंपनियों ने युद्ध जोखिम का बीमा देना बंद कर दिया। जहाज़ों की आवाजाही धीमी पड़ गई। इसके साथ ही एक और बड़ा झटका लगा।

क़तर की विशाल एलएनजी निर्यात प्रणाली को नुकसान पहुँचा। क़तर की सरकारी कंपनी QatarEnergy ने अपने निर्यात पर “force majeure” घोषित कर दिया। यानी ऐसी असाधारण स्थिति जिसमें कंपनी अपनी आपूर्ति प्रतिबद्धताएँ पूरी नहीं कर सकती। क़तर का Ras Laffan LNG कॉम्प्लेक्स दुनिया की LNG सप्लाई का लगभग पाँचवाँ हिस्सा संभालता है। ऐसे में इसका बंद होना वैश्विक गैस बाज़ार के लिए बहुत बड़ा झटका था।

जब सप्लाई अचानक गायब हो जाए

ऊर्जा बाज़ार में एक नियम बहुत सरल है। अगर सप्लाई अचानक कम हो जाए और मांग बनी रहे, तो कीमतें तेजी से ऊपर जाती हैं। यही हुआ। यूरोप का प्रमुख गैस बेंचमार्क TTF दो दिनों के भीतर लगभग 70 प्रतिशत तक उछल गया। एशिया का एलएनजी स्पॉट इंडेक्स JKM लगभग 96 प्रतिशत तक बढ़ गया। इन कीमतों में उछाल का मतलब था कि दुनिया अब LNG के नए स्रोतों की तलाश करेगी। और उस समय सबसे बड़ा वैकल्पिक आपूर्तिकर्ता था – संयुक्त राज्य अमेरिका।

एक जहाज़ की कहानी

एलएनजी व्यापार की अर्थव्यवस्था को समझने का एक सरल तरीका है।
एक एलएनजी जहाज़ को देखें। एक सामान्य एलएनजी कार्गो लगभग 3.74 मिलियन MMBtu गैस लेकर चलता है। यह लगभग 160,000 घन मीटर तरलीकृत गैस के बराबर होता है। संकट से पहले यूरोप भेजे जाने वाले ऐसे एक कार्गो से औसतन लगभग 22 से 25 मिलियन डॉलर का लाभ मिलता था। लेकिन जैसे ही कीमतें उछलीं, वही लाभ 50 मिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया।

यानी एक ही जहाज़ और मुनाफ़ा लगभग दोगुना। EnergyFlux के मॉडल के अनुसार मौजूदा कीमतों पर अमेरिकी LNG निर्यातकों को लगभग 870 मिलियन डॉलर प्रति सप्ताह का अतिरिक्त मार्जिन मिल सकता है।

संकट जितना लंबा, मुनाफ़ा उतना बड़ा

इस पूरी गणना में सबसे महत्वपूर्ण कारक है – समय। अगर क़तर की सप्लाई एक महीने तक बाधित रहती है, तो अमेरिकी LNG निर्यात से लगभग 4 अरब डॉलर का अतिरिक्त लाभ पैदा हो सकता है। अगर यह व्यवधान तीन महीने चलता है तो यह आंकड़ा लगभग 20 अरब डॉलर तक पहुँच सकता है। छह महीने का संकट – करीब 70 अरब डॉलर और अगर किसी कारण से यह स्थिति एक साल तक बनी रहती है तो अतिरिक्त लाभ 170 अरब डॉलर के आसपास पहुँच सकता है। EnergyFlux के अनुसार यह आधुनिक ऊर्जा इतिहास के सबसे बड़े कमोडिटी विंडफॉल में से एक हो सकता है।

शेयर बाज़ार की तेज़ प्रतिक्रिया

ऊर्जा बाज़ार के जानकारों को यह समझने में देर नहीं लगी। अमेरिका की दो प्रमुख LNG कंपनियों के शेयरों में तेज़ उछाल देखा गया। Venture Global और Cheniere Energy ये वे कंपनियाँ हैं जिनका कारोबार सीधे LNG निर्यात से जुड़ा है। हालाँकि यह भी सच है कि हर निर्यातक को एक जैसा फायदा नहीं होगा। जिन कंपनियों के पास दीर्घकालिक गैस बिक्री अनुबंध हैं, उनके लाभ सीमित हो सकते हैं, जबकि स्पॉट मार्केट से जुड़े निर्यातकों को अधिक फायदा मिल सकता है।

symbolic photo, Photo Credit – https://ogv.energy/

इतिहास में ऐसा पहले भी हुआ है

ऊर्जा बाज़ार में युद्ध और संकट का असर नया नहीं है। 2021–22 के यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस द्वारा यूरोप को गैस आपूर्ति सीमित करने से वैश्विक LNG बाजार में भारी उछाल आया था। उस दौरान अमेरिकी LNG निर्यात से लगभग 84 अरब डॉलर का अतिरिक्त लाभ दर्ज किया गया। EnergyFlux के विश्लेषण के अनुसार, अगर मध्य पूर्व संकट लंबा खिंचता है तो यह आंकड़ा उससे भी बड़ा हो सकता है।

ऊर्जा, युद्ध और जलवायु की विडंबना

इस कहानी में एक गहरी विडंबना है। दुनिया जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए जीवाश्म ईंधनों को कम करने की बात कर रही है, लेकिन जब भी वैश्विक संकट पैदा होता है, ऊर्जा बाजार अचानक उन्हीं ईंधनों को बेहद लाभदायक बना देते हैं।


क्योंकि, वैश्विक ऊर्जा प्रणाली अभी भी उन्हीं पर निर्भर है और जब सप्लाई रुकती है, तो बाज़ार तुरंत प्रतिक्रिया देता है। यही कारण है कि हर युद्ध सिर्फ़ भू-राजनीतिक संघर्ष नहीं होता। वह ऊर्जा बाज़ारों की दिशा भी बदल देता है।


कई बार यह बदलाव दुनिया को स्वच्छ ऊर्जा की ओर धकेलता है और कई बार यह जीवाश्म ईंधनों को फिर से बेहद मुनाफ़ेदार बना देता है।

मध्य पूर्व का मौजूदा संकट उसी दोराहे की एक और कहानी है।

(आलेख स्रोत: क्लाइमेट कहानी।)

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