वेदितम इंडिया फाउंडेशन व आइएसडब्ल्यू ने छतरपुर व ग्वालियर में किया डेटा स्प्रिंट व मीडिया कार्यशाला का आयोजन
ग्वालियर/छतरपुर : भारतीय नदियों पर काम करने वाली कोलकाता स्थित संस्था वेदितम इंडिया फाउंडेशन और उसकी सहयोगी इकाई इंडिया सैंड वॉच (ISW) ने फरवरी के आखिरी सप्ताह और मार्च के शुरुआत में मध्यप्रदेश के छतरपुर व ग्वालियर में नदी संसाधनों पर संवाद के लिए दो अलग-अलग कार्यशालाओं का आयोजन किया। छतरपुर में 21 व 22 फरवरी 2026 को जबकि ग्वालियर में 28 फरवरी व एक मार्च 2026 को इस कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में पत्रकारों, सामाजिक कार्यकताओं, वकीलों, छात्रों, नदी पारिस्थितिकी के विशेषज्ञों आदि ने हिस्सा लिया।
इस आयोजन में इस बात पर जोर दिया गया कि नदियों पर जब बात होती है तो सामान्यतः उसके संसाधन रेत, पत्थर, बजरी, उसकी पारिस्थितिकी आदि का मुद्दा गौण रहता है और सिर्फ बड़े मुद्दों पर संवाद होता है, जबकि नदी को नदी बनाए रखने के लिए ये सबसे जरूरी तत्व हैं। इसलिए इस पर संवाद व बातचीत को चर्चा के केंद्र में लाना जरूरी है।
दोनों शहरों में आयोजित इस कार्यशाला के पहले दिन के आयोजन का नाम डेटा स्प्रिंट रखा गया, जिसमें प्रतिभागियों के साथ इंडिया सैंड वॉच की वेबसाइट का जिक्र किया गया और यह बताया गया कि ISW एक ओपन डेटा प्लेटफॉर्म है, जहां नदी व रेत खनन को लेकर देश के किसी भी हिस्से के अपने अवलोकन/अनुभव व तसवीरों को अपलोड कर सकते हैं। भारत जैसे विकासशील देश में इस तरह के ओपन डेटा प्लेटफॉर्म फिलहाल कम हैं, इसलिए नदी व रेत खनन से जुड़ी रिपोर्टिंग, रिसर्च, अध्ययन या किसी अन्य प्रकार के कार्य के लिए यह एक महत्वपूर्ण डेटा स्रोत है।

ग्वालियर में आयोजित कार्यशाला में चर्चा का एक दृश्य। फोटो: वेदितम इंडिया फाउंडेशन।
दोनों शहरों में आयोजित डेटा स्प्रिंट में प्रतिभागियों ने कुछ तसवीरों व अपने अवलोकन को वेबसाइट पर अपलोड किया और वेदितम इंडिया फाउंडेशन व इंडिया सेंड वॉच की टीम ने इस संबंध में प्रतिभागियों को एक समझ प्रदान की।
वेदितम इंडिया फाउंडेशन व इंडिया सैंड वॉच के प्रमुख व संस्थापक सिद्धार्थ अग्रवाल ने बताया कि हमारा काम अभी मध्य भारत पर फोकस है और इस क्रम में हम मध्यप्रदेश में ऐसे आयोजन पर विशेष जोर दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले साल भोपाल में भी ऐसी एक कार्यशाला का आयोजन किया गया था और बार यह आयोजन राज्य के दो अलग-अलग शहरों में किया गया।
ग्वालियर की कार्यशाला
ग्वालियर मध्यप्रदेश के चंबल संभाग का केंद्र व प्रमुख शहर है और ऐसे में यह आयोजन खासा महत्वपूर्ण रहा। कार्यशाला में प्रतिभागियों ने मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों की जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट (District Survey Report-DSR) का गहन विश्लेषण किया और उस संबंध में अपनी समझ लिखित रूप में आयोजकों के साथ साझा की। प्रतिभागियों ने सर्वेक्षण रिपोर्ट में नियमों की अनदेखी और खामियों को चिह्नित किया और इस बात पर जोर दिया कि इसे और अधिक स्पष्ट और प्रभावी बनाया जाना चाहिए। साथ ही हिंदी में इसकी उपलब्धता भी सुनिश्चित हो।
सर्वेक्षण रिपोर्ट के विश्लेषण में प्रतिभागियों ने पाया की छतरपुर जिले की जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट पढ़ने लायक नहीं है। भिंड जिले की जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट अस्पष्ट है। कुछ अन्य प्रतिभागियों ने शिवपुरी के जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट में पाया कि रिपोर्ट में वन क्षेत्रों, हाईवे से खनन क्षेत्र की दूरी का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, न ही खनन क्षेत्र के पुनर्भरण की किसी व्यवस्था का उल्लेख है।
यहां यह स्पष्ट कर दें कि जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट किसी जिले के जिला प्रशासन के द्वारा पांच वर्ष में तैयार किए जाने वाला एक आधिकारिक दस्तावेज होता है, जिसमें जिले की भौगोलिक सीमा, स्थिति, विभिन्न क्षेत्रों की वन संपदा संपदा, नदियों और वहां पाए जाने वाले खनिजों का ब्योरा शामिल होता है। ऐसी रिपोर्ट में लघु खनिजों को विशेष रूप से चिह्नित किया जाता है और उसके खनन की संभावनाओं, उससे पूर्व में मिले राजस्व आदि का ब्योरा होता है।

इंडिया वॉटर पोर्टल की कुमारी रोहिणी कार्यशाला को संबोधित करते हुए। फोटो: वेदितम इंडिया फाउंडेशन।
प्रतिभागियों ने सर्वे रिपोर्ट की भाषा, उपलब्धता, स्पष्टता पर सवाल उठाये। कुछ जिलों की सर्वे रिपोर्ट्स एक दूसरे से एकदम मेल खा रहीं थी। प्रतिभागियों ने सर्व रिपोर्ट पर खुली चर्चा भी की।
आयोजन के दूसरे मीडिया कार्यशाला में इंडिया वाटर पोर्टल हिंदी के प्रबंध संपादक अजय मोहन व संपादक कुमारी रोहिणी ने पानी व नदियों को लेकर रिपोर्टिंग करने की तरीकों व जरूरत पर चर्चा की। वहीं, वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट के तरुण नायर ने चंबल नदी पर अवैध खनन के कारण घड़ियालों के सामने आ रहे संकट का जिक्र किया। इस कार्यशाला में महोबा स्थित स्वंयेसवी संस्था प्रोजेक्ट विंड की टीम ने भी हिस्सा लिया।
तरुण नायर ने सेटेलाइट मैप और तस्वीरों के जरिये चंबल नदी के विभिन्न हिस्सों में हो रहे अवैध खनन के बारे में बताया। तरुण ने अवैध खनन के पुरानी और वर्तमान तस्वीरों के माध्यम से बताया कि कैसे अवैध खनन घड़ियाल के प्रजनन क्षेत्रों और अंडे देने के स्थानों को बर्बाद कर रहा है।
इसके साथ ही उन्होंने अवैध खनन के नदी पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रभावों पर चर्चा कि कैसे अवैध खनन चंबल नदी की भौतिक संरचना के साथ-साथ उसके जलीय जीवन को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है।