मैरिको के चाय मजदूर वार्ता विफल होने के बाद धरने पर बैठे

बागान प्रबंधन सिर्फ सत्ताधारी पार्टी और मुख्य विपक्षी के यूनियन से वार्ता की बात कह रहा है।

कूच बिहार (पश्चिम बंगाल): 29 दसंबर 2025 को डुअर्स कन्या में हुए धरने के बाद पांच जनवरी 2025 को चाय बागान प्रबंधन से वार्ता के लिए पांच जनवरी 2026 को बुलाई गई बैठक विफल हो गई। बैठक विफल होने की वजह चाय बागान के प्रबंधन का इसमें शामिल नहीं होना रहा। इसके बाद चाय मजदूर कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बीच धरने पर बैठ गए हैं। धरने में करीब 150 मजदूर शामिल हैं।

चाय मजदूर नेता का यह वीडियो देखिए…

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प्रस्तावित बैठक से एक घंटे पहले मैरिको प्रबंधन ने एक पत्र भेजा जिसमें कहा गया कि वे मजदूरों से बात नहीं करेंगे, वे सिर्फ तृणमूल कांग्रेस और भाजपा से जुड़े चाय यूनियनों से बात करेंगे। चाय मजदूरों के गैर राजनीतिक यूनियन पश्चिम बंग चा मजूर समिति ने कहा है कि उन यूनियनों ने तीन जनवरी को एक पत्र लिख कर कहा था कि वे बैठक में आने के लिए बहुत व्यस्त हैं और यह स्थिति मजदूरों के हितों और स्वीकार्य समाधान में रुकावट डालने के लिए एक स्पष्ट मिलीभगत को दिखाता है। सीबीएमयू सीटू के प्रतिनिधियों को बुलाया गया था, लेकिन उन्हें अंदर नहीं आने दिया गया।

यहां यह गौरतलब है कि तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी है और भारतीय जनता पार्टी मुख्य विपक्ष। पांच जनवरी की बैठक से पहले 31 दिसंबर और दो जनवरी को भी बैठक बुलायी गयी बैठक टाली गई थी।

पश्चिम बंग चा मजूर समिति ने कहा है कि कंपनी ने पहले भी बकाया मजदूरी देने के लिए फंड का इंतजाम करने के नाम पर 15 दिन और मांगा था। संगठन ने कहा है कि डिप्टी लेबर कमिश्नर ने माना है कि मजदूरी न देना एक दण्डनीय अपराध (क्रिमिनल अफेंस) है, लेकिन उन्होंने कोई कानूनी पहल करने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि सिर्फ जिलाधिकारी ही ऐसा कर सकते हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि इसके बाद वे जिलाधिकारी के साथ मीटिंग आयोजित करने के लिए राजी नहीं हुए।

कड़ाके की ठंड में महिला चाय मजदूर इस तरह धरने पर बैठने को मजबूर हुईं।

समिति ने कहा है कि इसकी इंसानी कीमत और लोगों के जज्बात पर असर साफ दिख रहा है। वार्ता विफल होने के बाद मजदूरों के प्रतिनिधि महाकाल ओरांव ने डुअर्स कन्या की पांचवी मंजिल से कूदकर आत्महत्या करने की कोशिश की।

पश्चिम बंग चा मजूर समिति ने कहा है कि मैरिको कंपनी के मालिकाना हक वाला चाय बागान महीनों से मजदूरों की मजदूरी नहीं दे रहा है। महीनों से उनका बकाया पीएफ का पैसा जमा नहीं कर रहा है। इस संबंध मे सवाल पूछने पर वे जवाब नहीं देते और मालिक मजूदरों के समाने नहीं आते, जबकि वे विदेश में चाय निर्यात कर करोड़ों कमाएंगे। राज्य के श्रम मंत्री से मजदूरों द्वारा शिकायत किए जाने के बावजूद वे मैरिको कंपनी के साथ कोई मीटिंग नहीं करवा सके।

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