झारखंड में पेसा को लेकर लंबे समय से जद्दोजहद चलती रही है। सरकार व नागरिक समूहों के बीच लंबी वार्ता के बाद आखिरकार इसने आकार लिया है। इस फैसले के बाद सरकार ने फिर दोहराया है कि अगर कहीं कोई सवाल हो तो हम बातचीत करने के लिए तैयार हैं।
रांची: झारखंड कैबिनेट ने 23 दिसंबर 2025 को राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई बैठक में अनुसूचित क्षेत्रों के लिए पेसा नियमावली को मंजूरी दे दी। झारखंड के प्रमुख अखबार प्रभात खबर की रिपोर्ट के अनुसार, कैबिनेट ने दो संशोधन के साथ नियमावली पारित की है। इसमें राजस्व गांव को ग्रामसभा की इकाई मानने और ग्रामसभा द्वारा किसी पर लगाये जाने वाले दंड की राशि 10 हजार रुपये से कम कर दो हजार रुपये करने को मंजूरी दी गई। राशि को कम करने का निर्णय ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की कमजोर आर्थिक स्थिति को ध्यान में रख कर लिया गया।
ग्रामसभा का अब लघु वनोपज, लघु जल निकाय पर अधिकार दिया गया है। इसके साथ ही लघु खनिज का भी अधिकार दिया गया है। ग्रामसभा की बैठक में एक तिहाई महिलाओं की मौजूदगी आवश्यक होगी। ग्रामसभा की अध्यक्षता परंपरागत शासन प्रणाली के तहत मान्यता प्राप्त व्यक्ति करेंगे। निर्णय सामूहिक व पारदर्शी ढंग से लिए जाएंगे।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस फैसले के बाद प्रेस से कहा, “आज हमलोगों ने पेसा एक्ट किस तरीके से लागू हो इसको लेकर नियमावली बनायी है। हमलोगों ने लोगों से विमर्श करते हुए, विभिन्न विभागों से इस विषय पर मंतव्य लेते हुए आज आखिरकार यह निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि विशेषतौर पर अनुसूचित क्षेत्र में इसके प्रावधानों को जमीन पर उतारा जाएगा”।
इस फैसले के बाद राज्य की पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि आदिवासी क्षेत्र में जनजातीय स्वाशासन के लिए इसे बहुत पहले मंजूरी मिल जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि पेसा एक्ट के प्रावधानों के अनुरूप निर्णय लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि कहीं कोई गलती न हो इसका पूरा ख्याल रखा गया है, लेकिन विपक्ष भ्रांतियां फैला सकता है।
उन्होंने कहा, “इसके जो स्टेकहोल्डर हैं, मैं उनसे निवेदन करूंगी कि कैबिनेट के द्वारा पारित संलेख और जो नियमावली लागू होगा, उसका अध्ययन कर लें और कहीं कोई बात हो तो हमारे दरवाजे खुले हुए हैं, हम इस पर चर्चा करेंगे”। उन्होंने कहा कि राज्य में जो जनजातीय स्वशासन परंपरागत रूप से चल रही है, उसी को इसके जरिए मजबूत करने की बात है।

पेसा को कैबिनेट की मंजूरी के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन व ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह। फोटो स्रोत: दीपिका पांडेय सिंह का एक्स हैंडल।
पंचायती राज मंत्री ने कहा कि ग्रामसभा में सामूहिक रूप से निर्णय लिया जाएगा और उसमें हर जाति-धर्म के लोग शामिल होंगे और उसके निर्णय को कोई भी सरकार हो वह उसे मानने के लिए बाध्य होगी।
पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने अपने एक्स हेंडल पर लिखा, झारखंड कैबिनेट का यह फैसला अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभा को वास्तविक अधिकार, स्वशासन को मजबूती और आदिवासी समाज के संवैधानिक हक़ को सशक्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। पेसा की मंज़ूरी के साथ झारखंड में सहभागी लोकतंत्र, स्थानीय नेतृत्व और न्यायपूर्ण विकास का नया अध्याय शुरू हुआ है।

झारखंड के 24 में 14 जिले पूरी तरह पेसा क्षेत्र हैं। इन जिलों के नाम हैं – रांची, खूंटी, गुमला, पश्चिम सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, लोहरदगा, लातेहार, सिमडेगा, दुमका, जामताड़ा, साहिबगंज और पाकुड़।
इन दो जिलों में आंशिक क्षेत्र में पेसा के प्रावधान लागू होंगे –
पलामू, गढवा और गोड्डा।
पेसा एक्ट : अनुसूचित क्षेत्रों ( scheduled area) में पंचायत विस्तार (Panchayat extension to scheduled areas -PESA) अधिनियम का उद्देश्य देश में अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए पारंपरिक ग्राम सभाओं के माध्यम से स्वशासन सुनिश्चित करना है। अनुसूचित क्षेत्र ऐसे स्थान हैं जहां मुख्य रूप से आदिवासी समुदायों का वर्चस्व है। ये क्षेत्र 73वें संविधान संशोधन या पंचायती राज अधिनियम के अंतर्गत नहीं आते थे।