सर्वे: कोशी की बाढ़ की 26% लोगों को सरकारी स्रोतों से मिली थी पूर्व सूचना, 40% को नहीं मिली मुआवजा राशि

सुपौल: कोशी नव निर्माण मंच ने कोशी क्षेत्र में शोध कर रहे मित्र शोधार्थियों जैसे आईआईटी से सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक के बाद अंबेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली में शोध व यूनिवर्सिटी ऑफ़ लंदन से पोस्ट डॉक्टरेट शोध शुरू कर रहे राहुल यादुका, टाटा समाज अध्ययन संस्थान (TISS) से शोध कर रही सुभा सृष्टि और राजीव गाँधी युवा शोध संस्थान श्री पेरामब्दुर (चेन्नई) से शोध कर रहे आरिफ निजाम के साथ मिलकर वर्ष 2024 में कोशी नदी में आयी प्रलंयकारी बाढ़ पीड़ितों का अध्ययन किया। इस सर्वे में बाढ़ से बचाव के लिए सरकारी तंत्र की लचर व्यवस्था को उजागार तो किया ही है, साथ ही बाद में राहत उपायों की नाकामी को सामने लाया है। सर्वे में यह तथ्य सामने आया कि मात्र करीब 26 प्रतिशत लोगों को बाढ़ की सरकारी तंत्र से पूर्व सूचना मिली थी और बाढ़ पीड़ित 40 प्रतिशत लोग अबतक मुआवजा राशि से वंचित हैं।

इस अध्ययन के लिए गूगल फॉर्म में ऑनलाइन डाटा कलेक्शन दिसंबर 2024 के अंत से लेकर 10 फरवरी 2025 के बीच किया गया। कुछ लोगों ने स्वयं अपना डेटा भरा तो बहुतों के संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं ने डेटा भरने में मदद की।

इस तरह कोशी तटबंध के भीतर बाढ़ की विभीषिका का सामना करने वाले सुपौल जिले के मरौना, किशनपुर, निर्मली, सरायगढ़ भपटियाही और बसंतपुर प्रखंड से कुल 917 परिवारों, सहरसा जिले के नौहट्टा, महिषी, सलखुआ और सिमरी बख्तियारपुर प्रखंडों के कुल 65, मधुबनी जिले के मधेपुर प्रखंड से 28 और कोशी तटबंध टूटने के बर्बाद हुए दरभंगा जिले किरतपुर प्रखंड के भूभौल गाँव से 71 परिवारों की जानकारी एकत्र हुई या यूं कहें कि इन चार जिलों के 12 प्रखंडो के 38 गांवों से 1081 परिवारों की जानकारी ऑनलाइन एकत्र हुई।

इन परिवारों में अनुसूचित जाति के 317, अति पिछड़ी जाति के 366, अन्य पिछड़ी जाति के 290, अल्पंख्यक समुदाय के 104 और सामान्य जाति के 3 परिवार हैं। इसके अलावा सुपौल जिले के 6 गांवों में बाढ़ व कटाव पीड़ितों के साथ सामूहिक बातचीत हुई। उसके साथ ही दरभंगा जिले के किरतपुर प्रखंड के भूभौल में ग्रामीणों के साथ सामूहिक बातचीत की गयी और 12 लोगों के इंटरव्यू लिए गये। रिपोर्ट की तैयारी अंतिम स्थिति में है जो जल्द जारी होगी।

कोशी नदी में आई बाढ का दरभंगा जिले का एक दृश्य। Photo – Rahul Singh

सर्वे में सामने आए नतीजे


बाढ़ पूर्व सूचना मिली थी कि नहीं यह पूछे जाने पर 760 लोगों ने कहा कि उन्हें सूचना मिली थी। 313 लोगों ने कहा कि उन्हें बाढ़ पूर्व जानकारी नहीं मिली थी। सात लोगों ने इसके संबंध में कोई जानकारी नहीं दी। यह पूछे जाने पर कि कितने देर पहले बाढ़ की पूर्व सूचना मिली इसके जवाब में 504 (46.6 प्रतिशत) लोगों ने कहा कि कुछ घंटे पहले ही इसकी सूचना मिली थी। यह भी दिलचस्प बात लोगों ने बताई कि सरकारी माध्यमों से मात्र 283 (26.2 प्रतिशत) लोगों को ही जानकारी मिली थी, बाकी लोगों को जानकारी समाज के लोगों और संगठनों से मिली।

बाढ़ पूर्व सूचना मिलने के बाद से कितने लोग निकले इसके बारे में जानने की कोशिश की गई तो लोगों ने बताया कि 298 परिवार तटबंध पर, 14 परिवार रिलीफ़ कैम्प में, 55 परिवार अपने रिश्तेदार के यहाँ निकल कर रहे। शेष 671 (62.1 प्रतिशत) परिवार निकल ही नही पाए। यह जानने की कोशिश करने पर कि सूचना होने के बाद भी क्यों नहीं निकले, इसके उत्तर में 464 लोगों ने बताया कि इतना पानी का अनुमान नही थां। बाकियों ने बताया कि परिवार के लोगों समान और माल-मवेशियों को लेकर कहां रहेंगे, इस चिंता में नही गए। लोगों को निकालने के लिए सरकारी रेस्क्यू टीम या सरकारी अनुबंधित नावें कितने लोगों तक पहुंच सकीं। इसके इसके उत्तर में 90 (8.3 प्रतिशत) लोगों ने बताया कि उन्हें सरकारी नावों से निकाला गया। निकालने के लिए पैसा कितने लोगों को देना पड़ा, यह जानने की कोशिश करने पर 54 (5.9 प्रतिशत) लोगों ने बताया कि उन्हें पैसा नही लगा शेष 94.1 प्रतिशत लोगों ने बताया कि अपना पैसा देकर निकलना पड़ा। यह जनाने की कोशिश करने पर कि आपके आसपास में कोई रिलीफ कैम्प था उसके उत्तर में 749 (69.3 प्रतिशत) लोगों ने बताया कि कोई रिलीफ कैंप या जानवरों के कैंप वहां नही था। कितने परिवार रिलीफ कैम्प में रहे इस सवाल पर 189 (17.5 प्रतिशत) लोगों ने कहा कि रिलीफ कैम्प या कम्युनिटी किचन की सुविधा उनको मिली थी। शेष 82.5 प्रतिशत लोग राहत कैम्प या कम्युनिटी किचन में नही रहे।

सुपौल जिले में कोसी तटबंध के बीच के एक गांव में बाढ़ के बाद फिर से अपना घर बनाने की कोशिश में जुटा एक व्यक्ति। फोटो – राहुल सिंह।

बाढ़ राहत के अनुग्रह अनुदान (जीआर) कितने परिवारों को मिला है, इस सवाल पर पर 634 (58.6 प्रतिशत) लोगों ने बताया कि मिला है और 439 (40.6 प्रतिशत) परिवारों ने बताया कि नही मिला है। वस्त्र, बरतन की क्षति मिली है कि नहीं यह जानने कि कोशिश पर सभी लोगों ने बताया कि उन्हें नही मिला है। इसी प्रकार गृह क्षति जानने की कोशिश पर लोगों ने बताया कि किसी को गृह क्षति नही मिली है। 34 (3.1 प्रतिशत) लोगों ने बताया कि उनके परिवार को फसल क्षतिपूर्ति मिली है।ं सर्व में यह भी तथ्य उभर कर सामने आया कि जिनके पशु मर गए उनमें से किसी को उसके ऐवज में क्षतिपूर्ति नहीं मिली है।

पुनर्वास के सवाल को भी जानने की कोशिश की गई और पूछा गया कि कितने लोगो को तटबंध के बाहर पुनर्वास मिला है, इसके उत्तर में 182 (16.8 प्रतिशत) लोगों ने बताया कि उन्हें पुनर्वास बाहर मिला है और शेष को नहीं मिला है।

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