परगनैत राम सोरेन के 157वें जन्मोत्सव के मौके आदिवासी अधिकारों व चेतना पर जोर

परगनैत राम सोरेन आदिवासी स्वशासन व्यवस्था के तहत 80 मौजा के परगना थे। उनके पुत्र डॉ धुनि सोरेन ब्रिटेन में चिकित्सक हैं और अपनी माटी में सामाजिक कार्य से नियमित रूप से जुड़े हुए हैं।

बोआरीजोर (गोड्डा): परगनैत राम सोरेन मेमोरियल ट्रस्ट एवं आदिवासी युवा क्लब, बोआरीजोर के संयुक्त तत्वावधान में परगनैत राम सोरेन का 157वाँ जन्मोत्सव प्रखंड कार्यालय के सामने आम बगान में 24 फरवरी को हर्षाेल्लास के साथ मनाया गया।

संताल आदिवासी समाज की परगना व्यवस्था के अंतर्गत परगनैत राम सोरेन लगभग 80 मौजा के परगना थे। उनके नेतृत्व में इन गाँवों की सामाजिक व्यवस्था संचालित होती थी। वे एक समाजसेवी एवं कुशल प्रशासक के रूप में जाने जाते थे।

कार्यक्रम की शुरुआत उनके पुत्र, समाजसेवी, लेखक एवं चिकित्सक डॉ. धुनि सोरेन द्वारा स्वर्गीय परगनैत राम सोरेन की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पूजा-अर्चना के साथ की गई। उसके बाद आसपास के गाँवों के मांझी बाबा एवं ग्रामीणों ने भी श्रद्धापूर्वक माल्यार्पण किया।

सांस्कृतिक कार्यक्रम आरंभ होने से पूर्व कलाकार, शिक्षक एवं लेखक मंचन हांसदा को श्रद्धांजलि अर्पित की गई, जो प्रतिवर्ष इस जन्मोत्सव में भाग लेते थे।

अपने संबोधन में डॉ. धुनि सोरेन ने कहा कि हमें अपनी संस्कृति, सभ्यता और भाषा को नहीं भूलना चाहिए तथा अपने बच्चों को भी इसके महत्व से अवगत कराना चाहिए। साथ ही उन्होंने सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए शिक्षित एवं जागरूक होने पर बल दिया।

पेसा के जानकार जॉन सोरेन ग्रामीणों के आदिवासी स्वशासन एवं पेसा के बारे में जानकारी देते हुए।

दुमका से आए जॉन सोरेन (प्रशिक्षक, पंचायत राज विभाग, झारखंड) ने ग्राम सभा एवं पेसा कानून के संबंध में विस्तृत जानकारी दी।

समाजसेवी सच्चिदानंद सोरेन (मरांग बुरू) ने धार्मिक जागरूकता पर बल देते हुए साप्ताहिक मांझी थान पूजा नियमित रूप से करने का आग्रह किया। उन्होंने अपने संबोधन में बताया कि धार्मिक, सामाजिक व सांस्कृतिक चेतना के लिए ऐसी पूजा में महिला, पुरुष एवं बच्चों की सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने कहा कि धार्मिक जागरूकता के अभाव में लोग अपने पर्व-त्योहार और परंपराओं को धीरे-धीरे भूलते जा रहे हैं।

डॉ धुनि सोरेन अपने पिता व परगनैत राम सोरेन की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद।

इसके उपरांत होपना बेसरा, गबला माझी बेसरा, चुड़का हेम्ब्रम, जोपा मरांडी, संजला मुर्मू, मेघराय सोरेन, दिलीप हांसदा, झादे किस्कू, सिदो कान्हू किस्कू, भुजाय सोरेन, बाबूजी मरांडी, राजकुमार सोरेन एवं टूवर सोरेन द्वारा बांसुरी, फेटोर एवं बनाम जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुति दी गई।

कार्यक्रम में डॉ. धुनि सोरेन द्वारा उपस्थित सभी मांझी बाबा एवं कलाकारों को सम्मानित किया गया। प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले कलाकारों को नगद पुरस्कार प्रदान किया गया तथा अन्य प्रतिभागियों को सांत्वना पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया गया।

कार्यक्रम का संचालन विजेंदर सोरेन ने किया। इस अवसर पर बुधराय सोरेन, प्रधान टुडू, लालमोहन सोरेन, लखन टुडू, नटुलाल सोरेन, रोजमेरी मरांडी, मनोज किस्कु, डॉ. आनंद मोहन सोरेन, बादल सोरेन सहित बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष उपस्थित थे।

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