दुमका: नाजीर हेम्बरम एक संताली कवि हैं, जिन्हें इस साल संताली भाषा में श्रेष्ठ अनुवाद के लिए साहित्य आकादमी आवार्ड से सम्मानित करने का ऐलान किया गया है। नाजीर हेम्बरम को यह आवार्ड उनके अनुवाद ‘हेन्दे सादोम’ के लिए दिया जाएगा। हेन्दे सादोम संताली भाषा के दो शब्द हैं, जिसका शाब्दिक अर्थ डार्क हॉर्स है। संताली भाषा में अनूदित यह नीलोत्पल मृणाल की पुस्तक डॉर्क हॉर्स का अनुवाद है।
नाजीर हेम्बरम ने डार्क हॉर्स पुस्तक के अनुवाद के अनुभवों के साझा करते हुए क्लाइमेट ईस्ट से बातचीत में बताया कि उन्हें उनके एक दोस्त ने डार्क हॉर्स पुस्तक पढने के लिए दी थी और उन्हें पढ कर काफी अच्छा लगा। फिर गांव का वह दोस्त यह किताब वापस मांगने लगा। इस दौरान उनके मन में इस पुस्तक का हिंदी से संताली में अनुवाद करने का विचार आया। फिर पुस्तक के लेखक नीलोत्पल मृणाल से उनकी बातचीत हुई जो दुमका के ही हैं और दुमका आते-जाते रहते हैं। वे कहते हैं, “नीलोत्पल मृणाल का दुमका के नोनीहाट के हैं और मैं उस दौरान दुमका जिले के ही रामगढ ब्लॉक में पदस्थापित था और दोनों जगह आसपास ही है, इसलिए उनसे मेल-मुलाकात व बातचीत होती रही”। नजीर बताते हैं कि इससे लेखक के साथ संवाद और तालमेल में उन्हें सहूलियत हुई।

सांवहेत साकवा निंबंध का कवर पेज।
वे कहते हैं कि अनुवाद शुरू करने के बाद बीच-बीच में जब नीलोत्पल दुमका आते तो फोन करते और हालचाल पूछते। नाजीर हेम्बरम के अनुसार, अनुवाद कभी लगातार चला और कभी उसमें गैप हो गया, इस कारण अनुवाद करने में करीब दो साल लग गए। उन्होंने 2017 में पुस्तक का अनुवाद शुरू किया था और अनुवाद में लंबा वक्त लगने के बाद उसे कंप्यूटर पर संताली भाषा की लिपि ओलचिकी में टाइप करने में भी करीब एक साल लग गए। मूल किताब 174 पेज की है और उसका संताली अनुवाद होने के बाद वह 239 पेज की हो गई।
इस दौरान उन्होंने और जामताड़ा में स्थित संताली साहित्य व पुस्तकों के प्रकाशक हंस हासील पब्लिकेशन के प्रमुख ने पुस्तक के प्रूफ की जांच की और 2022 में इसका प्रकाशन हुआ।

नाजीर हेम्बरम की लिखी पुस्तक (कविता संग्रह) बान्डोक का कवर पेज।
पाकुड़ जिले के महेशपुर प्रखंड के चंडालमारा गांव के रहने वाले नाजीर हेम्बरम बताते हैं कि पुस्तक का प्रकाशन होने के बाद जमशेदपुर में साहित्य आकादमी के एक आयोजन में इस पुस्तक का विमोचन करवाया गया, जिससे इसने लोगों व पाठकों का ध्यान आकर्षित किया। फिर उससे आगे साहित्य आकादमी आवार्ड का सफर सभी लोग जानते हैं।
नाजीर बताते हैं कि यह पुस्तक एक युवा पर केंद्रित है जो सिविल सर्विस की तैयारी करना चाहता है और जो दिल्ली जाता है लेकिन उसमें एक भटकाव आता है और फिर वह खुद को केंद्रित करता है और अलग ठिकाना बनाता है और अलग कोचिंग ज्वाइन कर एकाग्र होकर तैयारी करता है और आइपीएस के लिए चुन लिया जाता है। वह अपनी पढाई और सिविल सर्विस की तैयारी की बहुत सारी चीजों का त्याग करता है।
नाजीर ने लिखी पुस्तकें
नाजीर हेम्बरम इस वक्त दुमका जिले के काठीकुंड ब्लॉक में मनरेगा के प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी के रूप में कार्यरत हैं, लेकिन मन से वे कवि हैं। 41 वर्षीय नाजीर बताते हैं कि उन्होंने 2003-04 से लिखना शुरू कर दिया। उन्होंने ‘बान्डोक’ नाम से एक कविता संग्रह लिखी है, जिसमें 57 कविताएं हैं। संताली के इस शब्द का हिंदी अर्थ पुतला है। इसके अलावा उन्होंने ‘कोरोम कपाल’ नाम से एक पद्य की रचना की है जो अधिक विस्तृत है। कोरोम कपाल शब्द का अर्थ है – कर्म भाग्य। नाजीर हेंब्रम को उनकी रचना के लिए पूर्व में तोड़े सुताम स्मृति पुरस्कार भी मिला है।

नाजीर हेम्बरम की लिखी पुस्तक का कवर पेज।
नाजीर हेम्बरम को कविता, कहानी, अनुवाद एवं निबंध सभी विधा में मिश्रित योगदान के लिए डॉ डोमान साहू ‘समीर’ स्मृति पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है।