क्या बदल रहा है हिजला मेला, दुर्लभ कला चदर बदोनी को नहीं मिलेगा मंच?

लोगों में जागरूकता से संबंधित कई तरह के नुक्कड़ नाटक के आयोजन पर भी संकट


दुमका: झारखंड के दुमका के हिजला गांव में लगने वाला हिजला मेला सिर्फ एक आयोजन भर नहीं है, जहां लोग जुटते हैं, सामान खरीदते हैं, खाते-पीते हैं और चले जाते हैं। हिजला मेला आदिवासी व विशिष्ट रूप में संताल संस्कृति के संरक्षण, उसकी खूबियों, परंपराओं, जीवन पद्धति को सामने लाने की कोशिश है। इस आयोजन के जरिए ऐसे अभ्यास व कला से जुड़े लोगों को अपनी कला व ज्ञान प्रस्तुत करने का एक मंच मिलता है, उसे पहचान मिलती है और दूसरे लोगों को उससे जुड़ने का मौका मिलता है।

पर, वर्ष 2026 में मेला में कई आयोजनों की कमी खल रही है। मेले के आयोजन से जुड़े एक व्यक्ति ने बताया कि इस बार चदर बदोनी कठपुतली नृत्य का प्रदर्शन नहीं हो रहा है। यह एक ऐसी कठपुतली कला है जिसके बहुत कम कलाकार हैं और इसके संरक्षण व इसे आगे बढाने की कोशिशें करना जरूरी है।

इसी तरह इस बार नटुआ नाच, घोड़ा नाच जैसी कला का प्रदर्शन नहीं हो रहा है। इस बार मेले में छउ नृत्य का भी प्रदर्शन नहीं हो पा रहा है। छउ की पहचान झारखंड जैसे राज्यों से गहरे जुड़ी है। राज्य के सरायकेला-खरसावां जिले में छउ के कलाकार हैं। ओडिशा के कलाकार का भी इस बार पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है। दुमका जिले से सटे पश्चिम बंगाल के शाांतिनिकेतन क्षेत्र के कलाकारों का भी आगमन नहीं हुआ है।

मेले की निर्णय प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। 13 फरवरी को मेला शुरू होने से पूर्व इसको लेकर एक प्रतिनिधिमंडल ने दुमका के एसडीओ से भी मुलाकात की थी। जानकारों का कहना है कि कला व संस्कृति के प्रदर्शन में समन्वय जरूरी है, अगर बाहर के कलाकार आते हैं तो इससे सांस्कृतिक आदान-प्रदान होता है जो उनके फलने-फुलने के लिए जरूरी होता है।

इसी तरह इस बार पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के नुक्कड़ नाटक, सड़क सुरक्षा से संबंधित जागरूकता कार्यक्रम, पुलिस विभाग का साइबर क्राइम चर्चा, समाज कल्याण विभाग का नुक्कड़ नाटक, स्वास्थ्य विभाग के नुक्कड़ नाटक व जेएसएलपीएस का लिंग समानता पर नुक्कड़ नाटक की कमी भी खल रही है। ऐसे आयोजन होने से लोगों में जागरूकता आती है और इसमें प्रदर्शन करने वालों को एक अवसर भी मिलता है।

एक सदस्य ने कहा कि छात्र-छात्राओं की क्विज प्रतियोगिता, निबंध लेखन, बाल कवि गोष्ठी, कवि सम्मेलन व चित्रांकन प्रतियोगिता का भी आयोजन इस बार होने की संभावना नहीं दिख रही है।

मेला समिति के एक सदस्य ने बताया कि आयोजन समिति के कुछ अधिकारियों ने ऐसे कार्यक्रमों में भीड़ नहीं जुटने की बात कह कर इसे बंद करवाया है।

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