हंतापाड़ा चाय बागान के श्रमिकों ने वेतन न देने पर मेरिको के खिलाफ शुरू किया क्रमिक भूख हड़ताल

मजदूरों में इस बात को लेकर आक्रोश है कि टीएमसी के बाद राज्य में बीजेपी की सरकार आने पर हालात नहीं बदले हैं, जबकि कुछ मजूदरों ने बदलाव के लिए वोट किया था।

अलीपुरद्वार (पश्चिम बंगाल) : पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले के मदारीहाट ब्लॉक में स्थित हंतापाड़ा चाय बागान की महिला मज़दूरों ने 25 अगस्त 2026 को फैक्ट्री गेट पर मजदूरी की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना और क्रमिक भूख हड़ताल शुरू की। उन्होंने छह सप्ताह यानी तीन पखवाड़े तक काम किया है, लेकिन उन्हें एक रुपया भी मज़दूरी नहीं मिली है। मजदूरों का कहना है कि यह सिर्फ उन्हें उनका मेहनताना देने में देरी नहीं है, बल्कि यह मज़दूरी की चोरी भी है।

इस बागान के मालिक, मेरिको एग्रो इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड को पिछली टीएमसी सरकार ने 13 चाय बागान सौंपे थे। इन बागानों में मज़दूरों का भारी बकाया है। मेरिको ने बार-बार मज़दूरों के अधिकारों का उल्लंघन किया है, जबकि श्रम विभाग और प्रशासन ने इस पर ध्यान नहीं दिया। महीनों के संघर्ष के बाद भी – जिसमें दिसंबर की कड़ाके की ठंड में तीन दिन और रात का धरना भी शामिल था – उन्हें कोई खास राहत नहीं मिली।

अप्रैल 2026 के विधानसभा चुनाव में, कई मज़दूरों ने बदलाव के लिए वोट दिया था। चुनाव जीतने के तुरंत बाद, बीजेपी विधायक लक्ष्मण लिंबू और सांसद मनोज तिग्गा ने मज़दूरों से 45 दिनों के भीतर कार्रवाई का वादा किया था। फिर भी 109 दिन बीत जाने के बाद भी कुछ नहीं बदला है। खोखले वादों से मज़दूरों के परिवारों का पेट नहीं भर सकता।

फैक्ट्री गेट पर धरना-प्रदर्शन व क्रमिक हड़ताल पर बैठे हंतापाड़ा चाय बागान के श्रमिक।

विरोध प्रदर्शन के पहले ही दिन, महिलाओं को डराने-धमकाने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस के सर्कल इंस्पेक्टर ने महिलाओं से मिलकर उन्हें हटने के लिए मनाने की कोशिश की। असिस्टेंट लेबर कमिश्नर और सांसद भी इन कोशिशों में शामिल हुए। मज़दूरों को एक पुराना और एक मौजूदा भुगतान देने की पेशकश की गईकृलेकिन अस्पष्ट आश्वासन पूरे भुगतान और जवाबदेही का विकल्प नहीं हो सकते।

मज़दूरों की मांग इस प्रकार है – मज़दूरी के तीन बकाया पखवाड़े का भुगतान किया जाए, अक्टूबर 2025 का बकाया 10 प्रतिशत पूजा बोनस, दो साल में से हर साल 14 दिन की सालाना छुट्टी का भुगतान, मज़दूरी से काटा गया लेकिन चार-पांच साल से रोका गया प्रोविडेंट फंड जमा करना और रिटायर हो चुके मज़दूरों को लगभग एक दशक से न दी गई ग्रेच्युटी का भुगतान।

मजदूरों का कहना है कि मेरिको को मज़दूरी रोके रखकर, कानूनी बकाया राशि हड़पकर और मज़दूरों के परिवारों को भुखमरी की ओर धकेलकर चाय बागान चलाने की इजाज़त नहीं दी जा सकती। राज्य सरकार को तुरंत पूरा भुगतान सुनिश्चित करना चाहिए, पीएफ और मज़दूरी गैर-कानूनी तरीके से रोकने के लिए ज़िम्मेदार लोगों पर मुकदमा चलाना चाहिए, और इस कंपनी को मिल रहे सरकारी संरक्षण को खत्म करना चाहिए। मज़दूर सिर्फ़ वादों के सहारे ज़िंदा नहीं रह सकते। वे अपना पूरा बकाया पैसा चाहते हैं और अभी चाहते हैं। अब और देरी नहीं मंजूर नहीं और कोई बहाना भी नहीं सुनना चाहते हैं। सरकार को मज़दूरों के साथ खड़ा होना चाहिए, न कि भुगतान न करने वाले मालिक का साथ देना चाहिए।

Leave a Reply