सड़क जाम के बाद मधु चाय बागान के 500 मजदूरों को मिलेंगे ₹25,000 प्रति मजदूर
बीरपाड़ा (अलीपुरद्वार) : नौ घंटे के सड़क जाम के बाद श्रम आयुक्त ने सभी पात्र मजदूरों को FAWLOI का बकाया भुगतान एक सप्ताह के भीतर करने का आश्वासन दिया। एक महीने तक चले आंदोलन और 8 अक्टूबर 2026 को नौ घंटे के सड़क जाम के बाद मधु चाय बागान के मजदूरों ने अपनी लड़ाई में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। पश्चिम बंग चा मजूर समिति (PBCMS) ने अपने एक बयान में कहा है कि श्रम आयुक्त ने आश्वासन दिया है कि एक सप्ताह के भीतर सभी पात्र मजदूरों को बंद उद्योगों के मजदूरों के लिए मिलने वाली आर्थिक सहायता (FAWLOI) का बकाया भुगतान कर दिया जाएगा। लगभग 500 मजदूरों को करीब ₹25,000 प्रति मजदूर मिलने की उम्मीद है। यह जीत प्रशासन की मेहरबानी से नहीं, बल्कि मजदूरों के संघर्ष से मिली है।
मधु चाय बागान को मई 2025 में श्याम सुंदर गोयल के नेतृत्व वाले प्रबंधन ने छोड़ दिया था। पिछले 17 महीनों से सैकड़ों मजदूर और उनके परिवार बिना किसी नियमित आमदनी के गुजारा कर रहे हैं। बंद उद्योगों के मजदूरों को मिलने वाली आर्थिक सहायता हासिल करने के लिए भी उन्हें रैली निकालनी पड़ी, आंदोलन करना पड़ा और सड़क जाम करनी पड़ी। प्रशासन तभी जागा, जब मजदूरों ने अपने संघर्ष से उस पर दबाव बनाया।
125 मजदूरों का प्रबंधन ने नहीं खुलवाया था पीएफ खाता
लगभग 500 पात्र मजदूरों में से पहले दौर में सिर्फ 193 को FAWLOI की सहायता मिली। करीब 350 मजदूरों के नाम शुरू में छूट गए। लगभग 125 मजदूर 2022 से बागान में काम कर रहे थे, लेकिन प्रबंधन ने उनके PF खाते ही नहीं खुलवाए। इसलिए उन्हें सहायता के लिए अपात्र बता दिया गया। इसी तरह, प्रबंधन के गलत PF रिकॉर्ड के कारण अन्य 125 मजदूरों के नाम रिकॉर्ड में नहीं मिले और उन्हें भी भुगतान से बाहर कर दिया गया।
क्या प्रबंधन की गलती की सजा मजदूरों को मिलनी चाहिए?
पीबीसीएमएस का स्पष्ट कहना है कि मजदूरों को उनके अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता, क्योंकि प्रबंधन ने PF खाते नहीं खुलवाए या सही रिकॉर्ड नहीं रखा। इन गड़बड़ियों के लिए प्रबंधन जिम्मेदार है। प्रोविडेंट फंड विभाग और श्रम विभाग भी अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहे। प्रबंधन की गलतियों पर कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन उसका खामियाजा मजदूरों को भुगतना पड़ा।
एक महीने का संघर्ष, सड़क पर आठ घंटे का आंदोलन
पीबीसीएमएस ने इस मामले को लेकर बिरपाड़ा के सहायक श्रम आयुक्त (ALC) कार्यालय में बड़ी संख्या में मजदूरों के साथ ज्ञापन दिया। क्षेत्रीय PF आयुक्त और उनके अधिकारियों से बैठक की गई। ALC और दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बार-बार बातचीत हुई।
श्रम विभाग के इंस्पेक्टर ने करीब एक महीने पहले ही बागान के रिकॉर्ड जमा कर लिए थे। फिर भी शुरुआत में केवल 70 और मजदूरों के नाम जोड़े गए। इस धीमी कार्रवाई से नाराज मजदूरों ने प्रशासन को दो दिन का समय दिया और चेतावनी दी कि समाधान नहीं होने पर 7 अक्टूबर से आंदोलन शुरू होगा। इसकी सूचना पुलिस, श्रम विभाग और EPFO को दी गई।
इसके बाद EPFO ने उसी दिन सुधारी हुई सूची जमा की। राज्य सरकार ने अन्य 125 मजदूरों को सहायता देने पर सहमति जताई, लेकिन भुगतान की कोई निश्चित तारीख नहीं बताई।
8 अक्टूबर को मजदूरों ने रैली निकाली और सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक सड़क जाम किया। बारिश के बावजूद वे अपने अधिकारों के लिए डटे रहे। आखिरकार, मजदूरों के दबाव के बाद श्रम आयुक्त ने सभी पात्र मजदूरों का भुगतान एक सप्ताह के भीतर करने का आश्वासन दिया। उन्होंने PBCMS से उन मजदूरों के वास्तविक कर्मचारी होने का प्रमाण देने को कहा, जिनके नाम वर्षों तक बागान में काम करने के बावजूद PF सूची में नहीं थे।
उसी शाम PBCMS ने सार्वजनिक जनसुनवाई की। इन 125 मजदूरों के नाम सबके सामने पढ़े गए और वहां मौजूद मजदूरों ने उनकी पहचान की पुष्टि की। पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई। इसके बाद सड़क जाम समाप्त किया गया।
मजदूरों को अपना हक पाने के लिए सड़क पर क्यों उतरना पड़े?
मधु चाय बागान का संघर्ष दिखाता है कि सरकारी विभागों की लापरवाही और श्रम कानूनों को लागू करने में विफलता का सबसे बड़ा बोझ मजदूरों पर पड़ता है।
आर्थिक सहायता कोई खैरात नहीं, मजदूरों का अधिकार है। उसे पाने के लिए सड़क जाम करने की नौबत नहीं आनी चाहिए।
पीबीसीएमएस मांग करता है कि एक सप्ताह के भीतर सभी पात्र मजदूरों को भुगतान किया जाए, किसी भी पात्र मजदूर का नाम न छूटे और गलत तरीके से मजदूरों को सहायता से वंचित रखने तथा भुगतान में देरी के लिए जिम्मेदारी तय की जाए।
मधु के मजदूरों का संघर्ष प्रबंधन और सरकारी विभागों, दोनों के लिए साफ संदेश है: रिकॉर्ड में नाम न होने से मजदूरों का अधिकार खत्म नहीं हो जाता। अपने अधिकारों से वंचित किए जाने पर मजदूर चुप नहीं बैठेंगे।