संताल आदिवासियों की धार्मिक पुस्तक जोमसिम विनती का डॉ धुनी सोरेन ने किया विमोचन

पुस्तक के लेखक संताल धर्म गुरु व टैगोर साहित्य पुरस्कार से सम्मानित सोमय किस्कू हैं, जिन्होेंने…

हिजला मेले में ओलिचिकी लिपि में तोरण द्वार व बैनर लगवाने की हेमंत सरकार से आदिवासी समाज ने की मांग

दुमका: दुमका में आयोजित होने वाले राजकीय जनजातीय हिजला मेला महोत्सव की शुरुआत तीन फरवरी 1890…

झारखंड के ऐतिहासिक गांव हिजला में विकास का एक नमूना, सड़क का निर्माण ऐसे कि खत्म हो जाता है पीसीसी का महत्व

दुमका : दुमका जिले में स्थित हिजला झारखंड का एक एक ऐतिहासिक गांव है, जिसका इतिहास…

संताल आदिवासियों का सवाल, बंगाल, असम व ओडिशा में ओलचिकी लिपि मान्य तो झारखंड में क्यों नहीं?

दुमका: दिसोम मरांग बुरु संताली अरीचली आर लेगचर अखड़ा और ग्रामीणों ने संताली भाषा, ओलचिकी लिपि…

संताली भाषा व ओलचिकि लिपि में पढाने की मांग किस आधार पर कर रहे हैं झारखंड के संताल आदिवासी?

मुख्यमंत्री को मांग सौंप कर अमल करने की विभिन्न संगठनों ने किया है आग्रहदुमका : झारखंड…

आदिवासी हितों की रक्षा के लिए पेसा के अनुरूप हो झारखंड पंचायती राज कानून में संशोधन: महासभा

झारखंड जनाधिकार महासभा का तर्क है कि पंचायती राज कानून में राजस्व गांव को इकाई माना…

संताल आदिवासियों की माघ बोंगा का सामाजिक जीवन में क्या है महत्व, जानिए

दुमका के मसलिया गांव में संताल आदिवासियों का माघ बोंगा (माघ पूजा) संपन्न दुमका : झारखंड…

क्या है संताल आदिवासियों का सकरात पर्व, क्या है मान्यताएं व रस्म?

पूर्वजों व ईष्ट देवताओं को याद करने व गांव को चलाने वालों के प्रति सम्मान प्रकट…

अनूठी पहल, विलुप्त होने के कगार पर पहुंचे खूंटवा का 10 सालों बाद आयोजन

खूंटवा सोहराय पर्व की एक अहम कड़ी है, जिसमें पशुओं के प्रति सम्मान प्रदर्शित किया जाता…

प्रकृति पर्व है सोहराय, पशुओं के प्रति सम्मान व कृषि से जुड़ा है इसका नाता

बोध बोदरा सोहराय पर्व भारतीय राज्यांे झारखंड, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, ओडिशा और बिहार का फसल उत्सव…