भारत कार्बन कनक्लेव में इस बात पर जोर दिया गया कि ‘समुदाय को बाद की चीज’ समझने के बजाय किसी परियोजना की दीर्घकालिकता के लिए उन्हें मुख्य ड्राइवर के रूप में देखना जरूरी है।
नई दिल्ली: भारत कार्बन कनक्लेव 2026 में एक उच्च स्तरीय पैनल चर्चा में समुदाय केंद्रित जलवायु समाधानों को तलाशने पर विमर्श किया गया। इस चर्चा का विषय था – “स्टीवर्डशिप बिफोर मार्केट्स: रीथिंकिंग फॉरेस्ट वैल्यू, कम्युनिटी प्रायोरिटीज, एंड द लिमिट्स ऑफ कार्बन मार्केट्स” (बाजार से पहले प्रबंधन: वन के महत्व, समुदाय की प्राथमिकता और कार्बन मार्केट की सीमाओं पर पुनर्विचार)।
इस चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि वास्तव में जलवायु वित्त में ‘कम्युनिटी एजेंसी’ को पहचानने के तरीके में बड़े बदलाव की जरूरत है।
एलजीटी वेल्थ इंडिया के वेंचर फिलैंथ्रॉपी के मैनेजर श्रीजन दत्ता ने इस सत्र का संचालन किया। सत्र में फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी की डायरेक्टर स्वप्ना सारंगी, इंडियन ग्रामीण सर्विसेंज के सीओओ डॉ संजीब सारंगी, उर्वरा के फाउंडर विनय बारे एवं केनेको के फाउंडर और सीइओ सचिन अग्रवाल शामिल हुए।
चर्चा की शुरुआत प्रकृति आधारित समाधान के लिए एक ज़रूरी शर्त के तौर पर ज़मीन के मालिकाना हक से हुई। स्वप्ना सारंगी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि संस्थानिक सेफगार्ड सिर्फ प्रशासनिक नहीं हैं, वे सामाजिक भी हैं।
उन्होंने कहा, जमीन का मालिकाना हक एक किसान या समुदाय की आधारभूत पहचान है, जो उन्हें रिसोर्स सिस्टम के कस्टोडियन और केयरगिवर के तौर पर उनकी भूमिका की पहचान देती है। उन्होंने समुदाय के अधिकार सिस्टम में महिलाओं की भागीदारी पर ज़ोर देते हुए कहा, महिलाएं यहां अपनी जगह का दावा कर सकती हैं और अपने गहरे ज्ञान की वजह से एक शानदार भूमिका निभा सकती हैं।
चर्चा में लिविंग लैंडस्कैप या जीवित परिदृश्य, जैसे पानी, जैवविविधता और संस्कृति जैसे मुद्दे पर चर्चा हुई, जिसे समुदाय प्राथमिकता देता है। आयोजन के दौरान विनय बारे ने कंपनियों को उनके द्वारा किये जाने वाले पर्यावरणीय उपभोग के लिए नेचल बैलेंस शीट का प्रस्ताव रखा।
वहीं, डॉ संजीब सारंगी ने ओडिशा के मंगलाजोडी मॉडल की सफलता के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि कैसे ओडिशा का यह गांव जो कभी जलीय पक्षी का शिकार करने के लिए बदनाम था, अब इको-टूूरिज्म के जरिए उनका संरक्षक बन गया।
सचिन अग्रवाल ने सुझाव दिया कि समुदाय को बाद की चीज के तौर पर देखना बंद किया जाए और इसके बजाय उन्हें प्रोजेक्ट को वहनीय बनाने वाले मुख्य ड्राइवर के तौर पर देखा जाए। उन्होंने कहा कि टेक्निकल बेसलाइन से फोकस हटाकर समुदाय को केंद्र में रखते हैं तो दूसरी चीजें अपने आप ठीक हो जाएंगी।
इस सत्र को फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी, एफइएस एवं लैंडस्टैक ने मिल कर कार्बन कॉन्क्लेव 2026 में आयोजित किया था।