ओडिशा में पांच ओरंगुटान मिलने से आश्चर्य, वन्यजीव तस्करी की आशंका से जांच शुरू

बालासोर के बिचित्रपुर कैसुआरिना वन में मिले पांच ओरंगुटान; वन विभाग ने किया रेस्क्यू, उदयपुर


बालासोर (ओडिशा) : ओडिशा के बालासोर जिले के तटीय क्षेत्र में 8 सितंबर 2026 को पांच युवा ओरंगुटान मिलने की घटना ने वन्यजीव संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी के नेटवर्क को लेकर सवाल व आशंकाएं उत्पन्न हो रही है। इस दुर्लभ जीव के पांच युवा सदस्य बड़ापाई गांव के निकट बिचित्रपुर कैसुआरिना वन क्षेत्र में पाए गए, जिसके बाद स्थानीय लोगों की सूचना पर वन विभाग की टीम ने सभी पांचों ओरंगुटान को सुरक्षित रेस्क्यू किया। इनमें से दो मादा और तीन नर हैं और उम्र एक साल से कम है।

वन विभाग के अनुसार, पांचों युवा ओरंगुटान को उदयपुर वन सेक्शन कार्यालय लाकर निगरानी में रखा गया व उनके स्वास्थ्य की जांच के लिए पशु चिकित्सकों की सहायता ली गई। उसके बाद उन्हें नंदनकानन चिड़ियाघर भेज दिया गया है। राज्य सरकार ने इन जानवरों को वहां रखने के लिए केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण से मंजूरी मांगी है।

ओडिशा पुलिस का स्पेशल टास्क फोर्स और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की एक टीम इस मामले की जांच कर रही है कि कहीं इसके पीछे संगठित तस्करी रैकेट तो सक्रिय नहीं है। एसपी रैंक के एक अधिकारी के नेतृत्व में एसटीएफ की तीन सदसीय टीम मामले की जांच शुरू कर चुकी है। वे रेस्क्यू स्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रहे हैं और लोगों से पूछताछ भी कर रहे हैं।

भारत की स्वाभाविक प्रजाति नहीं है ओरंगुटान

ओरंगुटान भारत की प्राकृतिक वन्यजीव प्रजाति नहीं है। ये दक्षिण-पूर्व एशिया में पाए जाते हैं और इनका प्राकृतिक वितरण मुख्यतः बोर्नियो तथा सुमात्रा के वन क्षेत्रों से संबंधित है। इसलिए ओडिशा के एक प्राकृतिक वन क्षेत्र में पांच युवा ओरंगुटानों का एक साथ मिलना अत्यंत असामान्य घटनाक्रम माना जा रहा है है।

इस प्रजाति के जानवरों का प्राकृतिक रूप से बालासोर तक पहुंचना अत्यंत असंभावित माना जा रहा है, क्योंकि इस क्षेत्र को उनके प्राकृतिक आवास से जोड़ने वाला कोई ज्ञात प्राकृतिक कॉरिडोर नहीं है। इसी कारण इनके मानवीय हस्तक्षेप के माध्यम से यहां पहुंचने की आशंका की जांच की जा रही है। हालांकि बिना जांच पूरी हुए ऐसा कहना भी उचित नहीं होगा।

वन विभाग और संबंधित एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि ये जानवर भारत तक कैसे पहुंचे और उन्हें जंगल में किसने छोड़ा अथवा वे किस परिस्थिति में यहां पहुंचे। जांच में संभावित हवाई, समुद्री अथवा सड़क मार्गों सहित अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव व्यापार नेटवर्क की भूमिका की भी पड़ताल महत्वपूर्ण हो सकती है।

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