रांची में 22 व 23 जुलाई को जलवायु अखड़ा का आयोजन किया गया। विधायक कल्पना सोरेन ने उदघाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा, छोटे व निरंतर प्रयासों से जलवायु परिवर्तन से मुकाबला संभव।
रांची : रांची स्थित ऐतिहासिक ऑड्रे हाउस में सारथी झारखंड जस्ट ट्रांजिशन नेटवर्क के तत्वावधान में 22 व 23 जुलाई 2026 को दो दिवसीय जलवायु अखड़ा का आयोजन किया गया। यह आयोजन जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं, सामाजिक क्षेत्र में काम करने वालों, नीति निर्माताओं व मीडिया के साथियों को एक साझा मंच पर लाने के उद्देश्य से किया गया, जिसमें राज्य के विभिन्न जिलों से आए 400 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। इस दो दिनी आयोजन में पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों तथा जस्ट ट्रांजिशन या न्यायसंगत बदलाव जैसे विषयों पर गहन नीतिगत विचार-विमर्श किया गया। आयोजन में झारखंड व पड़ोसी राज्यों से कई स्टॉल लगाए गए, जिसमें वनोपज, परंपरागत बीज, परंपरागत खानपान और हस्तकला से जुड़े वस्तुओं के विक्रय केंद्र व प्रदर्शनी शामिल थे।
कार्यक्रम का उदघाटन पहले दिन विधायक कल्पना सोरेन ने किया और समापन सत्र को राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने संबोधित किया।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए विधायक कल्पना सोरेन ने सारथी नेटवर्क और जमीनी स्तर के सामाजिक संगठनों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा, हम छोटे-छोटे और निरंतर प्रयास करके जलवायु परिवर्तन के खिलाफ जारी लड़ाई को मुकाम तक पहुँचा सकते हैं। झारखंड के आदिवासी और मूलवासियों के पारंपरिक ज्ञान को आधार बनाकर ही हमें आगे बढ़ना होगा ताकि राज्य की प्राकृतिक सुंदरता और धरोहर को अक्षुण्ण रखा जा सके। जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए समाज के सभी स्टेकहोल्डर्स को एक मंच पर आना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।

कार्यक्रम में शामिल लोग।
सारथी नेटवर्क के संस्थापक सदस्य जॉन्सन टोप्पो ने कहा कि जलवायु अखड़ा सरकार, सामाजिक संगठनों, शोधकर्ताओं, पत्रकारों, कम्युनिटी लीडर्स और जमीनी कार्यकर्ताओं को एक साथ लाने वाला एक अनूठा मंच है। उन्होंने कहा कि झारखंड की जलवायु कहानी केवल कोयले, सौर ऊर्जा या कार्बन उत्सर्जन तक सीमित नहीं है, बल्कि बदलती बारिश, जंगलों के अधिकार, पारंपरिक खानपान, स्थानीय आजीविका और खनन से इतर विकसित होती अर्थव्यवस्था की भी कहानी है।
असर की सीईओ वीनूता गोपाल ने कहा कि न्यायसंगत बदलाव केवल ऊर्जा परिवर्तन का विषय नहीं है, बल्कि समावेशी विकास का सवाल है। उन्होंने कहा कि झारखंड जैसे कोयला आधारित राज्यों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कोयले पर निर्भरता धीरे-धीरे कम हो रही है, लेकिन हरित निवेश और नए आर्थिक अवसर अभी भी सीमित हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राज्य के भविष्य से जुड़ी नीतियों में जंगलों पर निर्भर समुदायों, किसानों, महिलाओं, मजदूरों और आदिवासियों की आवाज को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, ताकि विकास और ऊर्जा परिवर्तन दोनों में स्थानीय समुदाय केंद्र में रहें।
विकास और पर्यावरण में संतुलन जरूरीरू राज्यपाल
समापन सत्र को संबोधित करते हुए राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री के भारत पंचामृत मिशन और नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वकसित भारत की संकल्पना तभी साकार होगी जब हमारा विकास समावेशी होगा। इस दो दिवसीय जलवायु अखड़ा के मंथन से जो व्यावहारिक समाधान निकलकर आए हैं, उन्हें आगे बढ़ाने की सामूहिक जिम्मेदारी हम सबकी है। जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से निपटने के लिए जमीनी स्तर पर ठोस कदम उठाने होंगे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक सरयू राय ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि झारखंड में जल, जंगल और जमीन की स्थिति दिन-प्रतिदिन संवेदनशील होती जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य की समृद्ध प्राकृतिक संपदा और धरोहरों को अक्षुण्ण रखने के लिए सरकार, सामाजिक संगठनों और जमीनी स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं को मिलकर नीतिगत प्रयास करने होंगे।

जलवायु अखड़ा के दूसरे दिन समापन सत्र को संबोधित करते राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार। फोटो – सारथी नेटवर्क।
सारथी नेटवर्क के मुन्ना झा ने संगठन के उद्देश्यों की जानकारी देते हुए बताया कि झारखंड के 43 सामाजिक संगठनों का यह नेटवर्क जलवायु परिवर्तन और न्यायसंगत बदलाव के मुद्दों पर लगातार कार्यरत है। विशेषकर कोयला-प्रभावित क्षेत्रों में नीतिगत और व्यावहारिक सुधार लाने के लिए जमीनी स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।
इस अवसर पर राज्यपाल के द्वारा पर्यावरण व सामाजिक क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले नेटवर्क के 43 साथियों को सम्मानित भी किया गया।
इस दो दिवसीय आयोजन को सफल बनाने में सारथी नेटवर्क के मुन्ना झा, कृष्णकांत, घनश्याम, सुरेश कुमार शक्ति, गौतम सागर, जॉन्सन टोप्पो, शंकर रवानी, हेमंत कुमार, शेखर, गुलाबचंद, शालिनी संवेदना, पारोमिता, प्रांजल, मीनाक्षी, अंकिता, रिचा चौधरी, मिथिलेश कुमार, संजीव भगत, सुभाष चंद्र बोस, ओमकार, लखी दास, मौसमी बाखला, नर्गिस और अजय कुमार सहित कई सदस्यों ने प्रमुख भूमिका निभाई।