विश्व सर्प दिवस : हजारों सर्प को जीवनदान देने वाले रमेश कुमार महतो की कहानी

रमेश कुमार महतो पिछले 21 सालों से कर रहे हैं सांपों का रेस्क्यू, शौक से शुरू किया गए काम के अब अनुभवी व पशिक्षित विशेषज्ञ बन गए हैं।

16 जुलाई विश्व सर्प दिवस पर विशेष आलेख

सुजीत कुमार केशरी

सहृदय मानव अपने जीवन में तमाम जीवधारियों से प्रेम करता है। ऐसे व्यक्ति की करूणा अन्य जीवों के लिए वरदान से कम नहीं है। ऐसे ही एक व्यक्ति हैं – झारखंड राज्य के रांची जिला अंतर्गत कांके ब्लॉक के पिठोरिया गांव निवासी रमेश कुमार महतो। पर्यावरण और वन्यजीवों की रक्षा के लिए संकल्पित और समर्पित इनका जीवन बचपन से ही वन और वन्यजीवों विशेषकर सांपों के प्रति अटूट प्रेम से जुड़ा है। अन्य इंसान की तरह यह भी बाल्यावस्था में सांपों को देखकर डर जाता थे। यहां तक कि उनके पास जाने की हिम्मत नहीं होती थी और कोई जबरदस्ती ले जाये तो रोंगटे खड़े हो जाते थे।

रमेश बताते हैं कि वर्ष 2004 ई. में एक बार अपने खेत में बैंडेड करैत सांप मिला, डरकर सांप को एक डंडा मार दिया। मारने के बाद अपराध बोध से मेरा दिल बोझिल हो गया। उस घायल सांप को चिड़ियाघर ओरमांझी, रांची ले जाकर इलाज कराया। जब सांप स्वस्थ हो गया तो जंगल में ले जाकर सुरक्षित छोड़ दिया। उसी दिन से मेरे जीवन में शुरू हुआ सांपों को बचाने का सिलसिलां। 21 वर्ष से अनवरत सांपों को रेस्क्यू कर अब-तक लगभग सात हजार सांपों को जीवनदान दे चुके हैं।

रमेश कुमार महतो के सांपों को बचाने का यह मुहिम धीरे-धीरे रंग लाने लगी और सम्प्रति पूरे झारखंड राज्य में इसका व्यापक असर देखने को मिल रहा है। सांप बचाने वालों की टीम पूरे झारखंड में खड़ी हो गई है। इनके नेतृत्व में बनी टीम के अन्य सदस्य भी सांप मिलने की खबर पर हजारों सांपों का रेस्क्यू कर जान बचा चुके हैं। सांप के साथ-साथ सर्पदंश के शिकार हुए सैकड़ों लोगों को तत्काल इलाज के लिए भेजकर उनकी जान बचा चुके हैं। आरंभ में घर-परिवार के लोग भी सांप के रेस्क्यू के काम का विरोध करते थे, लेकिन रमेश के जुनून के आगे सभी विवश हो गये। अब तो घर के लोग भी इस कार्य में तन-मन-धन से समर्पित होकर सहयोग करते हैं।

पहले वह अपने क्षेत्र में ही सांपों का रेस्क्यू करते थे। तब सांप को पकड़ने के लिए उनके पास न कोई औजार था और न ही प्रशिक्षण का अनुभव। बांस की बनी छड़ी से ही सांपों का रेस्क्यू किया जाता था। फोन आने पर पर सांप को रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ देना उनकी दिनचर्या बन गई थी। सांपों को बचाने का यह सारा प्रयास व्यक्तिगत स्तर पर बिना किसी सरकारी या एनजीओ के मदद के जारी रहा. इस कार्य में आने वाला सारा खर्च स्वयं उठाना पड़ता था। पैसे का मलाल नहीं होता था क्योंकि इस कार्य में दिल को असीम सुकून मिलता था। इस कार्य का प्रतिफल यह हुआ 2004 से 2017 के 13 वर्ष के लंबे सफर के बाद सर्परक्षक के रूप में इनकी ख्याति रांची एवं इसके आस-पास के जिलों में फैल गई। इनकी इस प्रतिभा को देखते हुए 2018 ई. में वन विभाग झारखंड सरकार से जुड़ने का अवसर मिलां इस प्रस्ताव को स्वीकार कर प्रशिक्षक बनकर सांप पकड़ने और उसे सुरक्षित जंगल में छोड़ने का प्रशिक्षण देने लगे। फॉरेस्ट ट्रेनिंग स्कूल महिलौंग, रांची में पांच वर्ष से सांपों को रेस्क्यू करने का नियमित प्रशिक्षण दे रहे हैं। वन विभाग की इस पहल से ये बहुत खुश हैं। यहां से प्रशिक्षित सैकड़ों वनकर्मी एवं पदाधिकारी सांपों को रेस्क्यू कर जीवनरक्षण करने में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। तमिलनाडु और कर्नाटक राज्यों में भारत देश के ख्याति प्राप्त सर्पवैज्ञानिक एवं कोबरा विशेषज्ञ डॉ. गौरी शंकर के कार्यशाला में शामिल होने के बाद सर्पों के बारे में इनकी जानकारी गहराई से बढ़ती गई। सर्प वैज्ञानिक डॉ गौरी शंकर की प्रेरणा से ये अभी झारखंड में पाये जाने वाले सांपों के व्यवहार का सूक्ष्म निरीक्षण कर एक पुस्तक लिख रहे हैं।

सांपों के अध्ययन के क्रम में गुमला के जंगल में इन्हें दुर्लभ प्रजाति का एटलस मोथ (बड़े पतंगों में एक) मिला। इस घटना के बाद इन्हें सांपों के अलावा वन्यजीवों को बचाने की प्रेरणा मिली और इस पर भी अपना अमूल्य योगदान देने लगे। सांप के अलावा स्वयं या वन विभाग की टीम के साथ जुड़कर झारखंड में बहुतायत से पाये जाने वाले वन्यजीवों भालू, लक्कड़बघा, मॉनिटर लिजार्ड, वज्रकीट, नीलगाय, खटास और अनेक पक्षियों को रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ चुके हैं। सांपों के साथ अन्य वन्यजीवों को बचाने की सफलता को देखकर इन्हें अनेक सम्मान से नवाजा गया है। एनजीओ बिंग काइंड बिथ हैप्पी, धनबाद के द्वारा 2018 में मोमेंटो देकर, 2019 में पूर्व केंद्रीय मंत्री रहे चंद्र प्रकाश चौधरी ने प्रशस्ति पत्र देकर, राजकीय वन महोत्सव 2023 ई. में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के द्वारा वन्यजीव संरक्षण सम्मान और कल्पशक्ति फाउंडेशन, रामगढ़, झारखंड के द्वारा कल्पशक्ति पर्यावरण सम्मान 2025 से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा दर्जन भर संस्थान से भी सम्मान मिला है।

Symbolic Photo.

रमेश कुमार महतो का मानना है कि सांप अन्य जीवों की भांति एक सामान्य जीव है। उसे समझने की जरूरत है। बारिश के मौसम में सर्पदंश के मामले बढ़ जाते हैं। कारण यह मौसम सांपों के ब्रीडिंग का है। इस वजह से छोटे सांप बहुत संख्या में देखने को मिलते हैं। बिलों में पानी के भर जाने के कारण सांप का दिखना आम हो जाता है। भोजन की तलाश में सांप घरों में घुस जाते हैं। इस वजह से सर्पदंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं। झारखंड के जहरीले सांपों में नाग, करैत और रसल वाइपर के सर्वाधिक बाइट केस मिलते हैं। यहां जानने की बात यह है कि रसल वाइपर 24 घंटे एक्टिव रहते हैं।

खेत व बगान में बारिश के मौसम में सावधान रहने की जरूरत है। बारिश के मौसम में रिम्स रांची में 8-10 मामले सर्पदंश के औसतन पहुंचते हैं। वहीं दूसरी ओर सांप की अन्य प्रजातियां रैट स्नेक, पानी वाला सांप, वुल्फ स्नेक और कुकरी जैसे कई सांप विषहीन होते हैं। इनसे डरने की जरूरत नहीं है।

वे कहते हैं कि सांप के डंसने पर बिल्कुल न घबराएं। नीम हकीम के फेर में न पड़ें। चिकित्सों के परामर्श पर इलाज कराएं। सांप के कटे हुए स्थान पर रस्सी या अन्य साधन से न बांधे। रसल वाइपर के काटने पर बांधने से जान को भारी खतरा है। सर्पदंश के बाद तत्काल शरीर में धातु से बने आभूषण को उतार दें। सांप के डंसे हुए स्थान पर न चिरा लगाए और न मुंह से विष निकालने का प्रयास करें। यदि किसी के मुंह में छाला है या जख्म है तो मुंह से विष निकालने की प्रक्रिया जान लेवा साबित हो सकती है। मरीज को शांत करें। भीड़भाड़ वाली जगह से निकाल कर पास के अस्पताल में इलाज के लिए भेजें। लोग समझते हैं कि सांप के डंसने का मतलब मौत है, लेकिन यह भ्रांति है। यदि पीड़ित व्यक्ति संयमित रहे तो दो से तीन घंटे बाद भी इलाज शुरू हो तो वह बच जाएगा।

रमेश ने अपने जीवन को पूरी तरह से झारखंड के सांपों के निरीक्षण, अध्ययन और विश्लेषण में समर्पित कर दिया है। इस क्रम में इन्हें झारख्ंाड के रांची और गुमला जिले में सांप की एक नई प्रजाति रसल कुकरी मिला, जिसका जिक्र झारखंड में पाई जाने वाली सांपों की प्रजातियों में नहीं है। आने वाले दिनों में सांप के ऊपर इनकी लिखी पुस्तक का प्रकाशन झारखंड के सांपों के संदर्भ में सर्प प्रेमियों के लिए एक सौगात होगा। इनका उद्देश्य है कि झारखंड के सभी लोग कृषकमित्र सर्प को अपना मित्र मानें और उनकी सुरक्षा-संवर्धन के लिए आगे आएं।

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