महात्मा बुद्ध की जन्मस्थली के निकट उद्योगों पर रोक की वजह क्या है?

नेपाल की सर्वोच्च अदालत ने लुम्बिनी शहर से 15 किलोमीटर के दायरे में स्थित उद्योगों को दो साल के भीतर बंद करने या स्थानांतरित करने का आदेश जारी किया है। लुम्बिनी भगवान बुद्ध की जन्मस्थली के रूप में दुनिया भर में मशहूर है और नेपाल में लुप्तप्राय प्रजाति सारस क्रेन की सबसे बड़ी आबादी का घर भी है।

सोनम लामा ह्योलमो

दक्षिण-पश्चिमी नेपाल के लुम्बिनी के रहने वाले चंद्र प्रकाश पाठक जब भी अपने आस-पास के खेतों में जाते हैं, तो उन्हें वहां जमी कालिख की एक मोटी परत दिखाई देती है। सर्दियों में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है क्योंकि उस समय बारिश कम होती है।

पाठक ने फोन पर बताया, “इस क्षेत्र में स्थित फैक्ट्रियों और उद्योगों से निकलने वाली धूल खेतों पर जमी रहती है। यह औद्योगिक प्रदूषण सिर्फ इंसानों को ही नहीं, बल्कि पक्षी, नदियों और खेतों को भी प्रभावित कर रहा है।” इन फैक्ट्रियों में सीमेंट और स्टील से लेकर शराब तक, सब कुछ बनाया जाता है।

उन्होंने कहा, “प्रदूषण के कारण किसान अब चावल, गेहूं, सरसों, आलू और दालें जैसी फसलें नहीं उगा पा रहे हैं। यहां तक कि अब उन्हें अपने पशुओं तक को ‘तिनाउ नदी’ का गंदा पानी पिलाना पड़ रहा है।” इस समस्या का एक धार्मिक और आध्यात्मिक पहलू भी है। लुम्बिनी भगवान बुद्ध की जन्मस्थली के रूप में दुनिया भर में मशहूर है। साथ ही, यह ‘सारस क्रेन’ पक्षी का भी घर है। बौद्ध धर्म में इस पक्षी का गहरा महत्व माना जाता है, लेकिन यह अब विलुप्ति की कगार पर है।

इन सभी समस्याओं से अब जल्द ही राहत मिलने की उम्मीद है। नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार को लुम्बिनी के आसपास औद्योगिक विकास को रोकने के लिए एक दशक पुराने दिशानिर्देश का सख्ती से पालन करने का आदेश दिया है ताकि इस क्षेत्र की विरासत और जैव विविधता की रक्षा की जा सके। हालाँकि, स्थानीय समुदायों और संरक्षणवादियों ने इस कदम का स्वागत किया है, लेकिन इससे रोजगार, निवेश और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंताएं भी बढ़ गई हैं।

एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस कुमार रेग्मी और जस्टिस सुनील कुमार पोखरेल ने लुम्बिनी के 15 किलोमीटर के दायरे में भारी वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया और आसपास के उद्योगों को दो साल के भीतर बंद करने या स्थानांतरित करने का आदेश दिया है।

यह आदेश ऐसे समय आया है जब वैज्ञानिक आंकड़ों से पता चला है कि लुम्बिनी और उसके आसपास की सीमेंट फैक्ट्रियों, ईंट भट्टों और इस्पात मिलों से होने वाला औद्योगिक प्रदूषण क्षेत्र के सांस्कृतिक धरोहर स्थल और जैव विविधता को प्रभावित कर रहा है।

खेतों में उड़ता हुआ एक सारस क्रेन। तस्वीर – हरि के पतिबंदा द्वारा फ़्लिकर (CC BY-NC 2.0) के माध्यम से, Via – Mongabay Hindi

वरिष्ठ वकील और याचिकाकर्ता प्रकाश मणि शर्मा ने कहा, “यह फैसला लुम्बिनी की उस पवित्र विरासत की सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी था, जिसे यूनेस्को के तहत ‘असाधारण सार्वभौमिक मूल्य’ (ओयूवी) का विशेष दर्जा मिला हुआ है।”


शर्मा के मुताबिक, कई अध्ययनों में हवा की खराब गुणवत्ता और बढ़ते जल प्रदूषण की बात सामने आई है, इसके बावजूद प्रशासन ने प्रदूषण के असर को कम करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए। इसकी वजह से अशोक स्तंभ जैसी अनमोल ऐतिहासिक धरोहरों को भी खतरा पैदा हो गया है। साथ ही, यह स्थानीय लोगों के भोजन, स्वच्छ हवा और स्वस्थ पर्यावरण के उन अधिकारों का भी उल्लंघन है, जो उन्हें नेपाल के संविधान ने दिए हैं।

उन्होंने मोंगाबे से बात करते हुए कहा, “पर्यटकों और किसानों से लेकर पक्षियों और जलीय जीवों तक, हर किसी के लिए इस ऐतिहासिक स्थल का काफी महत्व है।”

हाल ही में हुए एक अध्ययन के अनुसार, नेपाल में पाए जाने वाले कुल 690 सारस क्रेन में से 685 अकेले लुम्बिनी प्रांत में ही पाए जाते हैं। हालाँकि, पहले इनकी संख्या बहुत ज्यादा थी, लेकिन वेटलैंड के कम होने, शहरों के फैलने और सिकुड़ते आवासों के कारण इन पक्षियों की संख्या अब तेजी से घट रही है।

पाठक ने बताया कि औद्योगिक इलाकों के आस-पास रहने वाले कुछ किसानों ने खेती करना छोड़ दिया है। इलाके के कई किसान वैकल्पिक आजीविका की तलाश में हैं और कुछ बेहतर नौकरियों की तलाश में दूसरे जिलों या यहां तक ​​कि दूसरे देशों में पलायन कर रहे हैं।

लुम्बिनी में सर्दियों के मौसम में छाई धुंध। एसीएस अर्थ स्पेस केम. 2021, 5, 2, 226-238. CC BY ND 4.0

एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस कुमार रेग्मी और जस्टिस सुनील कुमार पोखरेल ने लुम्बिकपिलवस्तु नेपाल के घनी आबादी वाले क्षेत्रों के पास स्थित है।

अदालत के इस फैसले से पाठक जैसे किसानों को कुछ राहत मिली है, लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि इन उद्योगों में दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करने वाले स्थानीय लोगों की नौकरियां जाने का खतरा है। अदालत के आदेश के अनुसार, अब लगभग दो दर्जन औद्योगिक इकाइयों को यहां से दूसरी जगह ले जाना पड़ सकता है।

लुम्बिनी क्षेत्र की देखरेख करने वाली सरकारी संस्था ‘लुम्बिनी विकास ट्रस्ट’ के सदस्य सचिव सनुरजा शाक्य ने बताया कि 15 किलोमीटर का नियम एक दशक पहले बनाया गया था, लेकिन तब इसे कभी ठीक से लागू नहीं किया गया।

साल 2022 की एक रिपोर्ट में जताई गई चिंताओं के बाद, 2024 में इस विश्व धरोहर स्थल को ‘खतरे में पड़ी विश्व धरोहरों’ की सूची में डाल दिया गया था। हालाँकि, जब सरकार ने यह आश्वासन दिया कि वे रिपोर्ट में बताई गई समस्याओं को दूर करने के लिए कदम उठाएंगे, तो पिछले साल इसे उस सूची से हटा दिया गया था।

शाक्य ने बताया कि 15 किलोमीटर के दायरे में आने वाली कुछ फैक्ट्रियां पिछले कुछ सालों में या तो बंद हो गई हैं या दूसरी जगह शिफ्ट हो गई हैं। उन्होंने मोंगाबे से कहा, “अगर इस कानून को सही तरीके से लागू किया गया, तो अदालत का यह फैसला लुम्बिनी के लिए एक ‘मील का पत्थर’ साबित हो सकता है।”

उधर कारोबारी समुदाय इस आदेश की आलोचना कर रहा है। लुम्बिनी में इस्पात और सीमेंट संयंत्र चलाने वाले समूह अंबे ग्रुप के अध्यक्ष शोवाकर हरि नेउपाने ने स्थानीय मीडिया आउटलेट बिज़मांडू को बताया, “हमारे उद्योग बैंक लोन पर चल रहे हैं। जब ये बंद होंगे, तो न केवल उद्योगों और बैंकों पर बुरा असर पड़ेगा, बल्कि हजारों लोगों की नौकरियां भी चली जाएंगी। उद्योगों को दूसरी जगह ले जाने के लिए बहुत ज्यादा संसाधनों की जरूरत होती है और सरकार की तरफ से मुआवजे के बिना यह संभव नहीं है।”

मोंगाबे ने इस क्षेत्र में काम कर रही अन्य कंपनियों से भी उनकी राय जानने की कोशिश की, लेकिन इस लेख की मूल रिपोर्ट के प्रकाशित होने तक किसी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली थी।

उद्योग विभाग के पर्यावरण निदेशक खगेंद्र बहादुर बसनेट ने कहा कि इन शिकायतों के बावजूद, अदालत के आदेश का पालन करना होगा।

उनके अनुसार, “इसे लागू करने के लिए सभी संबंधित पक्षों के साथ कई दौर की बातचीत और एक ठोस योजना की जरूरत है। कंपनियों ने यहां 30 अरब नेपाली रुपए (लगभग 213 मिलियन डॉलर) से ज्यादा का निवेश किया है, इसलिए उद्योगों को दूसरी जगह स्थांतरित करना वास्तव में एक चुनौतीपूर्ण काम हो सकता है।”

यह खबर हमने मोंगाबे हिंदी से साभार प्रकाशित की है। मूल वेबसाइट पर जाकर आप इसे हिंदीअंग्रेजी में पढ सकते हैं।

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