संताल समाज के बीच ओलिचिकी जागरूकता अभियान, नामपट्ट में लिपि के प्रयोग की मांग

संताल समाज के लोगों का कहना है कि संताली भाषा व ओलचिकी लिपि में स्कूली शिक्षा मिलने से ड्रापआउट को कम करने में मदद मिलेगी।

दुमका: दुमका जिले के रानीश्वर प्रखंड के कठालिया गांव में लेखा होड़ (संताल गांव संचालक) की पहल पर कुल्ही दुरुप(बैठक) आयोजित कर ओलचिकी जागरूकता अभियान चलाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मंझी बाबा बेंजामिन मुर्मू ने की।

कार्यक्रम की शुरुआत संताली भाषा के ओलचिकी लिपि के जनक पंडित रघुनाथ मुर्मू के चित्र पर माल्यार्पण कर की गई। लेखा होड़ एवं ग्रामीणों द्वारा ओलचिकी लिपि के महत्व पर विस्तृत चर्चा की गई।

ग्रामीणों ने बताया कि संताली भाषा की ओलचिकी लिपि का आविष्कार पंडित रघुनाथ मुर्मू द्वारा वर्ष 1925 में किया गया था और इस वर्ष ओलचिकी लिपि के 101 वर्ष पूर्ण हुए हैं। संताली भाषा को वर्ष 2003 में भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था। झारखंड सरकार द्वारा पिछले वर्ष से बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर पंडित रघुनाथ मुर्मू की जयंती पर सरकारी अवकाश भी घोषित किया गया है।

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि द्रौपदी मुर्मू द्वारा ओलचिकी लिपि के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर पंडित रघुनाथ मुर्मू के नाम से डाक टिकट एवं 100 रुपये का स्मारक सिक्का जारी किया गया तथा भारतीय संविधान का संताली ओलचिकी संस्करण भी प्रकाशित किया गया। इससे आदिवासी समाज में काफी उत्साह एवं खुशी का माहौल है।

बैठक में ग्रामीणों ने कहा कि ओलचिकी लिपि उनकी पहचान है तथा “एक लिपि, एक भाषा” से संताल समाज एक सूत्र में बंधेगा और संताली साहित्य का समग्र विकास संभव हो सकेगा।

बच्चों के बीच ओलचिकी लिपि की पुस्तक वितरित की गई।

ग्रामीणों ने संताल समाज में बढ़ते स्कूल ड्रॉपआउट पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बच्चों को मातृभाषा संताली में शिक्षा नहीं मिलना भी इसका एक प्रमुख कारण है। ओलचिकी के प्रचार-प्रसार एवं अध्ययन को बढ़ावा देने हेतु ग्रामीणों के बीच ओलचिकी पुस्तकें भी वितरित की गईं ताकि लोग स्वअध्ययन के माध्यम से संताली ओलचिकी सीख सकें।

हाल ही में पंडित रघुनाथ मुर्मू की जयंती पर विधायक एवं सांसदों द्वारा शुभकामना संदेश नहीं दिए जाने पर ग्रामीणों ने नाराजगी जताई। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री, सभी विधायकों एवं सांसदों से मांग की कि केजी कक्षा से पोस्ट ग्रेजुएट तक संताली भाषा व ओलचिकी लिपि के माध्यम से पढ़ाई शुरू की जाए। संताली भाषा को प्रथम राज्य भाषा घोषित किया जाए तथा संताल बहुल क्षेत्रों के सभी सरकारी कार्यालयों के नामपट्ट ओलचिकी लिपि व संताली भाषा से भी लिखे जाएं।

इस अवसर पर अर्जुन मुर्मू, निनुस मरांडी, रोबिलाल सोरेन, प्रधान मुर्मू ,कुबरज सोरेन, बर्धन टुडू, बबलू सोरेन, आशा मरांडी, निहा सोरेन, मेरीशिला मरांडी, निशा हांसदा, मेरी हेम्ब्रम, प्रिया सोरेन, पकु टुडू सहित बड़ी संख्या में महिला, पुरुष, बुजुर्ग एवं बच्चे उपस्थित थे।

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