सीएमएस सूची : 49 प्रतिशत प्रजातियों की जनसंख्या में गिरावट, एक चौथाई संकटग्रस्त

सीएमएस में सूचीबद्ध 24 प्रतिशत प्रजातियां वैश्विक स्तर पर संकटग्रस्त हैं, पिछली रिपोर्ट में यह प्रतिशत 22 था। यानी संकट और बढा है।

दुनिया भर में प्रवासी प्रजातियों का संकट बढता जा रहा है। स्टेट ऑफ द वर्ल्डस माइग्रेटरी स्पेसिज की दूसरी रिपोर्ट State of The World’s Migratory Species Interim Report (2026) से यह पता चलता है कि प्रवासी प्रजातियों पर संकट गहर हो रहा है और सीएमएस (Convention on the Conservation of Migratory Species of Wild Animals) में सूचीबद्ध प्रजातियों के विलुप्त होने का खतरा बढ रहा है। प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर ब्राजील के कांपो ग्रैंडे में आयोजित कान्फ्रेंस ऑफ पार्टीज सीएमएस कॉप 15 (CMS COP 15) से ठीक पूर्व जारी प्रवासी प्रजातियों की स्थिति पर केंद्रित दूसरी रिपोर्ट में यह उल्लेख किया गया है कि सीएमएस सूचीबद्ध लगभग हर चार में एक प्रजाति (24 प्रतिशत) अब वैश्विक स्तर पर संकटग्रस्त है। संकटग्रस्त प्रजातियों के प्रतिशत में दो प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो पिछली रिपोर्ट में 22 प्रतिशत थी।

कॉप14 से पहले सीएमएस परिशिष्ट में सचूीबद्ध प्रजातियों में से 34 प्रजातियां इस अवधि के दौरान आइयूसीएन रेड लिस्ट में चली गई हैं। इनमें से 26 प्रजातियां अत्यधिक संकटग्रस्ट आइयूसीएन रेडलिस्ट में चली गई हैं, जिनमें 18 तटीय पक्षी शामिल हैं। इन तटीय पक्षी में अधिकतर के संरक्षण की स्थिति में गिरावट हुई है।

आइयूसीएन रेड लिस्ट मूल्यांकन के अनुसार, सीएमएस सूचीबद्ध प्रजातियों में जिन प्रजातियों की जनसंख्या में गिरावट का रूझान देखा जा रहा है, उनका अनुपात 49 प्रतिशत हो गया है जो कॉप14 में रिपोर्ट किए गए 14 प्रतिशत के आंकड़े से अधिक है।

नई रिपोर्ट में कहा गया है कि कॉप14 के बाद अलग-अलग समूहों, पहलों द्वारा प्रवासी मार्गों और उनके जुड़ावों के बारे में स्थानीय जानकारी एकत्र करने में काफी प्रगति हुई है। ताजा मैपिंग से प्रवासी प्रजातियों के लिए जगहों के पूरे नेटवर्क की पहचान करने में तेजी आ सकती है और उन इंसानी रूकावटों और गतिविधियों को ठीक से पहचानने में मदद मिल सकती है, जिनसे इनका जुड़ाव टूट जाने और प्रवासी मार्गों के विभाजित हो जाने का खतरा होता है।

कॉप15 के दौरान प्रवासी प्रजातियों की स्थिति अंतरिम रिपोर्ट जारी किए जाने का दृश्य। फोटो – सीएमएस।

हालांकि इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इन प्रगतियों के बावजूद सीएमएस सूचीबद्ध कई प्रजातियों के लिए जरूरी आवासों और प्रवासी मार्गों के बारे में अभी भी विस्तृत वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध नहीं है और क्षेत्रीय जानकारियों में काफी कमियां हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि सीएमसएस सूचीबद्ध प्रजातियों के लिए अबतक जिन जरूरी जगहों की पहचान की गई है, उनमें से कई जगहों की सुरक्षा का जरूरी स्तर नहीं मिला है।

औसतन सीएमएस सूचीबद्ध प्रजातियों के लिए अबतक जिन जरूरी जगहों की पहचान की गई है, उनमें कई जगहों के लिए सुरक्षा का जरूरी स्तर नहीं पाया गया। सिर्फ सीएमएस सूचीबद्ध प्रजातियों के लिए जरूरी मानी गई मुख्य जैव विविधिता क्षेत्र केबीए का सिर्फ आधा से थोड़ा अधिक 52.6 प्रतिशत ही अबतक सुरक्षित और संरक्षित क्षेत्र के अंतर्गत आता है। सीएमएस सूचीबद्ध प्रजातियों के वैश्विक अस्तित्व के लिए जरूरी जगहों की सुरक्षा में स।भावित रूप से काफी कमियां है।

इस रिपोर्ट के तनीजों के आधार पर वर्ष 2032 तक सीएमएस सूचीबद्ध प्रजातियों के लिए जरूरी आवासों के सुरक्षा, प्रभावी संरक्षण, संवर्द्धन और बहाली पर जोर दिया गया है।

ब्राजील में हो रहे कॉप15 का महत्व

संयुक्त राष्ट्र की वन्यजीव संरक्षण प्रयासों से संबंधित विभिन्न पक्षकारों की 23 से 29 मार्च 2026 तक ब्राजील में चल रही बैठक काफी महत्वपूर्ण है। इस सम्मेलन में 100 से ज्यादा एजेंडों पर चर्चा होगी और वार्ताकार उन खतरों से निबटेंगे जो मानवीय गतिविधियों के प्रभावों को पूरी व्यापकता से दर्शाता है। जैसे – प्रजातियों का अवैध शिकार, बायकैच यानी अनचाहा शिकार, वन्यजीवों के आवासों का विनाश व विखंडन, गहरे समुद्र में खनन, प्रकाश, शोर एवं रासायनिक प्रदूषण और जलवायु पविर्तन के कारण तेजी से बढ रहा व्यवधान। इस दौरान वार्ताकार संधि के तहत 42 प्रजातियों को शामिल करने के प्रस्तावों पर भी विचार करेंगे।

सीएमएस क्या है – सीएमएस संयुक्त राष्ट्र संघ की अंतरराष्ट्रीय संधि है, जिसके तहत प्रवासी जीवों के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर पर प्रयास किए जाते हैं। इस संधि में 133 देश शामिल हैं, यानी 133 देश इसके पार्टी या पक्षकार हैं। भारत भी इनमें से एक है।

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